ANALYSIS: क्या शिवसेना के लिए बंद हो गए हैं सरकार बनाने के सारे रास्ते?
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ANALYSIS: क्या शिवसेना के लिए बंद हो गए हैं सरकार बनाने के सारे रास्ते?
शिवसेना की राह में कई मुश्किलें हैं. (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र विधानसभा (Maharashtra Legislative Assembly) के समीकरण से साफ है कि बिना कांग्रेस-एनसीपी (Congress-NCP) के समर्थन के शिवसेना की सरकार नहीं बन सकती है.

  • News18India
  • Last Updated: November 12, 2019, 12:09 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में सरकार बनाने के लिए शिवसेना (Shiv Sena) को दिया गया समय समाप्त हो गया, लेकिन कांग्रेस और एनसीपी (NCP) ने अभी तक शिवसेना के समर्थन पर अपना रुख साफ नहीं किया है. वहीं, राज्यपाल ने शिवसेना को सरकार बनाने के लिए दिए गए समय को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है. ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या माहाराष्ट्र में सरकार बनाने के सारे रास्ते शिवसेना के लिए बंद हो गए हैं, क्योंकि अब सरकार बनाने का न्योता राज्यपाल (Governor) ने एनसपी को दे दिया है. सूत्रों की मानें तो आज शाम तक कांग्रेस नेताओं को भी बुलाया जा सकता है. शिवसेना को समर्थन के मामले में अब तक जो खबरें सामने आ रही हैं, उसमें कांग्रेस (Congress) नेतृत्व ने शीर्ष नेताओं की एक टीम दिल्ली से मुम्बई भेजने से इनकार करते हुए फैसला स्थानीय नेताओं पर छोड़ दिया है. इससे साफ है फैसला लेने में अभी और वक्त लगेगा.


समर्थन जुटाने में लग सकता है अभी और वक्त
महाराष्ट्र विधानसभा के समीकरण से साफ है कि बिना कांग्रेस-एनसीपी के समर्थन के शिवसेना की सरकार नहीं बन सकती है. लेकिन, कांग्रेस और एनसीपी शिवसेना को समर्थन देने से पहले अपने फायदे और नुकसान का आकलन करने में जुटे हैं और इस आकलन में उन्हें कितना वक्त लगेगा यह साफ-साफ नहीं कहा जा सकता. महाराष्ट्र के नेताओं के अब तक आ रहे बयानों के देखें तो शिवसेना और एनसीपी जहां राज्य में सरकार बनाने को लेकर जल्दबाजी में हैं. वहीं, कांग्रेस इस मामले पर कुछ भी साफ-साफ बोलने से बच रही है. शिवसेना को समर्थन देने का मामला दिल्ली से मुम्बई वाया जयपुर घूम रहा है. दरअसल, शिवसेना का समर्थन के मामले पर एनसीपी को जहां सिर्फ महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरण का आकलन करना है. जबकि कांग्रेस को पूरे देश के सियासी समीकरण का आकलन करना है, क्योंकि कांग्रेस के कुछ शीर्ष नेता मानते हैं कि शिवसेना को समर्थन से देश में यह साफ संदेश जाएगा कि कांग्रेस ने कट्टर हिंदूवादी पार्टी से हाथ मिला लिया है. ऐसे में समर्थन की चिट्ठी सौंपने से पहले कांग्रेस इस संदेश से पार्टी को होने वाले फायदे और नुकसान का आकलन कर लेना चाहती है.


शिवसेना के पास कब तक का है वक्त?
सूत्रों की मानें तो राज्यपाल राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुशंसा करने से पहले चारों बड़ी राजनीतिक पार्टियों से सरकार बनाने के लिए जरूरी विधायकों की संख्या दिखाने को कह सकते हैं. राजभवन से तीन पार्टियों को पहले ही बुलावा आ चुका है. दरअसल, राज्यपाल नहीं चाहते हैं कि राष्ट्रपति शासन लगने के बाद कोई भी पार्टी राज्यपाल और केन्द्र सरकार पर लोकप्रिय सरकार बनाने की कोशिश न करने का आरोप लगाए. राष्ट्रपति शासन लगने के बाद भी राज्य में लोकप्रिय सरकार के गठन की संभावना तब तक बनी रहेगी, जब तक विधानसभा भंग कर फिर से चुनाव कराने का ऐलान न कर दिया जाए. ऐसे में शिवसेना का पास जरुरी आकड़े जुटाने का समय तब तक बचा है, जब तक राज्यपाल विधानसभा निलंबित रखते हैं.


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