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Ayodhya Verdict: मुंबई के मुस्लिम नेताओं ने SC के फैसले को किया स्वीकार, कही ये बात

भाषा
Updated: November 9, 2019, 4:36 PM IST
Ayodhya Verdict: मुंबई के मुस्लिम नेताओं ने SC के फैसले को किया स्वीकार, कही ये बात
अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को बहुप्रतिक्षित फैसला सुनाया. (फाइल फोटो)

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (All India Muslim Personal Law Board) के सदस्य मौलाना सैय्यद अथरली (Maulana Syed Atharli) ने कहा कि देश में शांति का माहौल बनाए रखना चाहिए.

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मुंबई. मुंबई (Mumbai) के मुस्लिम नेताओं (Muslim leaders) ने शनिवार को अयोध्या मामले पर उच्चतम न्यायालय (Supreme court) के फैसले के बाद समुदाय के लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है. ऑल इंडिया उलेमा काउंसिल के महासचिव मौलाना महबूब दरयादी ने कहा, 'हम खुश हैं कि अदालत में सुनवाई पूरी हो गई. हम कहते आ रहे हैं कि जो भी फैसला आएगा, हम उसे स्वीकार करेंगे. हम सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय को स्वीकार करते हैं. हम इस बात से भी खुश हैं कि उच्चतम न्यायालय ने शिया वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े (Nirmohi Akhada) की अपील को खारिज कर दिया. हम सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए पांच एकड़ जमीन देने के फैसले को भी स्वीकार करते हैं.'

शिया जमात के वरिष्ठ सदस्य शब्बीर सोमजी ने कहा कि उन्होंने देश के हित में फैसला स्वीकार किया है. उन्होंने कहा, 'फैसला सभी समुदायों को कबूल होना चाहिए. हम उच्चतम न्यायालय के फैसले का सम्मान करेंगे. यह देश के हित में है.' ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना सैय्यद अथरली ने कहा, 'हमें देश में कानून व्यवस्था बनाकर रखनी चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि शांति बनी रहे. हमें उच्चतम न्यायालय के आदेश को स्वीकार करना चाहिए.'

पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का विकल्प खुला
एक सवाल के जवाब में मौलाना सैय्यद अथरली ने कहा कि उनके लिए पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का विकल्प खुला है और वह इस बारे में विचार करेंगे. माहिम दरगाह के प्रबंध ट्रस्टी और हाजी अली दरगाह के ट्रस्टी सुहैल खंडवानी ने कहा, 'गर्व की बात है कि भारतीयों ने शीर्ष अदालत के अंतिम आदेश को स्वीकार कर लिया है. उच्चतम न्यायालय ने संतुलित फैसला सुनाया है. यह फैसला किसी धर्म विशेष के पक्ष में नहीं है. फैसले से संदेश गया है कि भारत जाति और धर्म से ऊपर है.' इस्‍लामिक मामलों के जानकार हजरत मुइन मियां ने कहा कि पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का विकल्प खुला है, लेकिन वह समाज की बेहतरी के लिए फैसले को स्वीकार कर रहे हैं.

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First published: November 9, 2019, 3:19 PM IST
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