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भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच NIA को सौंपी गई, उद्धव सरकार का आरोप- हमसे नहीं पूछा गया

News18Hindi
Updated: January 24, 2020, 10:35 PM IST
भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच NIA को सौंपी गई, उद्धव सरकार का आरोप- हमसे नहीं पूछा गया
भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े सभी मामलों की जांच NIA को सौंपी गई

पुलिस का दावा है कि भीमा कोरेगांव में हिंसा एक दिन पहले एल्गार परिषद में भड़काऊ भाषणों के चलते हुई थी. इस केस में पुलिस ने सुधीर धवले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, महेश राउत, शोमा सेन, अरुण फरेरिया, वेरनॉन गोंजाल्विस, सुधा भारद्वाज और वरवर राव को आरोपी बनाया है.

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  • Last Updated: January 24, 2020, 10:35 PM IST
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मुंबई. साल 2018 की भीमा कोरेगांव (Bhima koregaon) हिंसा से जुड़े हुए सभी केसों की जांच अब NIA (National Investigation Agency) को सौंप दी गई है. महाराष्ट्र की उद्धव सरकार ने एक ही दिन पहले इस केस में हो रही छानबीन को लेकर पुलिस के साथ एक रिव्यू मीटिंग की थी.

NIA को मामले की जांच सौंप दिए जाने के बाद महाराष्ट्र की विकास अघाड़ी सरकार और केंद्र के बीच खींचतान की आशंकाएं बढ़ गई हैं. जांच NIA को सौंपे जाने के बाद उद्धव सरकार में गृह मंत्री अनिल देशमुख ने आरोप लगाया है कि केंद्र ने ऐसा करने से पहले उनसे किसी भी तरह की बातचीत नहीं की है. इससे पहले रिव्यू मीटिंग के कुछ केस वापस लिए जाने और पूरे मामले की SIT द्वारा जांच कराए जाने पर चर्चा हुई थी.

प्रदेश के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि कोरेगांव-भीमा मामले की जांच महाराष्ट्र सरकार की सहमति के बिना एनआईए को सौंपी गई. कोरेगांव भीमा मामले की जांच एनआईए को सौंपना संविधान के खिलाफ, मैं इसकी निंदा करता हूं.

 



एक दिन पहले ही हुई थी रिव्यू मीटिंग
महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार और राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कोरेगांव-भीमा हिंसा मामले की समीक्षा करने के लिए गुरुवार सुबह ही वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की थी. एक अधिकारी ने बताया कि मुंबई के राज्य सचिवालय में हुई ये रिव्यू मीटिंग एक घंटे से भी ज्यादा चली. गृह विभाग के अधिकारी ने कहा, 'वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने एक जनवरी 2018 को हुई कोरेगांव भीमा हिंसा के मामले में जांच की स्थिति के बारे में उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को जानकारी दी.' मिली जानकारी के मुताबिक ऐसी ही एक और बैठक भी होनी थी जिससे पहले ही ये मामला NIA को सौंप दिया गया.

 



पवार ने की थी SIT से जांच की मांग
बता दें कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार ने 2018 के कोरेगांव भीमा मामले में पुणे पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की जांच के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश के तहत एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की पिछले साल दिसम्बर में मांग की थी. राकांपा के नेता देशमुख ने राज्य के गृह मंत्री पद का कार्यभार संभालने के बाद कहा था कि वह मामले पर स्थिति रिपोर्ट मांगेंगे और उसके बाद निर्णय लेंगे.

इसी जांच में सामने आया 'अर्बन नक्सल' शब्द
पुणे पुलिस ने 31 दिसंबर 2017 को एल्गार परिषद और इसके अगले दिन पुणे जिले के कोरेगांव भीमा में हुई जातीय झड़पों के बीच कथित संबंधों की जांच के दौरान 'अर्बन नक्सल' शब्द का इस्तेमाल किया था. पुणे नगर पुलिस ने मामले में कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था, जबकि ग्रामीण पुलिस ने कथित तौर पर हिंसा भड़काने को लेकर हिंदुत्व नेता मिलिंद एकबोटे और संभाजी भिडे़ के खिलाफ मामला दर्ज किया था. एकबोटे को उच्चतम न्यायालय से जमानत मिल गई जबकि भिडे़ को कभी गिरफ्तार नहीं किया गया.

कोरेगांव भीमा युद्ध को एक जनवरी 2018 को दो सौ साल पूरे होने के मौके पर आयोजित सम्मेलन में हिंसा भड़क उठी थी जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे. पुलिस का दावा है कि उक्त हिंसा कोरेगांव भीमा में एक दिन पहले एल्गार परिषद में भड़काऊ भाषणों के चलते हुई थी. इस केस में पुलिस ने सुधीर धवले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, महेश राउत, शोमा सेन, अरुण फरेरिया, वेरनॉन गोंजाल्विस, सुधा भारद्वाज और वरवर राव को आरोपी बनाया है.

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First published: January 24, 2020, 10:19 PM IST
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