चंद्रकांत दादा पाटिल बने महाराष्‍ट्र BJP के नये अध्‍यक्ष, ABVP से शुरू हुआ था सफर

चंद्रकांत दादा पाटिल पूर्व में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं और लगातार राजनीति में रहते हुए भी उनको 2014 के पहले महाराष्ट्र में कोई जानता नहीं था.

Prashant LilaRamdas | News18Hindi
Updated: July 16, 2019, 9:35 PM IST
चंद्रकांत दादा पाटिल बने महाराष्‍ट्र BJP के नये अध्‍यक्ष, ABVP से शुरू हुआ था सफर
चंद्रकांत दादा पाटिल बने महाराष्‍ट्र भाजपा के प्रदेश अध्‍यक्ष.(फाइल फोटो)
Prashant LilaRamdas
Prashant LilaRamdas | News18Hindi
Updated: July 16, 2019, 9:35 PM IST
भारतीय जनता पार्टी के महाराष्‍ट्र अध्यक्ष पर आज कैबिनेट मंत्री और कद्दावर नेता चंद्रकांत दादा पाटिल की नियुक्ति हाईकमान ने की है. वर्तमान अध्यक्ष रावसाहेब दानवे की जगह पर उनकी नियुक्ति की गई है. मजेदार बात ये है कि एक तरफ दानवे ने इस्तीफा दिया और दूसरे ही क्षण चंद्रकांत दादा पाटिल की नियुक्ति की गई. इसका मतलब हाईकमान ने पहले की तय कर लिया था कि आज चंद्रकांत दादा को पार्टी के राज्य अध्यक्ष पद पर नियुक्त करना है.

अमित शाह से है खास नजदीकी
अमित शाह से खासी नजदीकी रखने वाले चंद्रकांत दादा पाटिल की नियुक्ति के पीछे संगठन की भूमिका महत्वपूर्ण है. पश्चिम महाराष्ट्र के कोल्हापुर शहर से आने वाले चंद्रकांत का नाम राज्य में 2014 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद सबकी जुबान पर आया. दिल्ली में सब लोग इनको सीआर पाटिल के नाम से जानते हैं. जबकि कुछ यह भी मानते थे कि सीआर पाटिल तो गुजरात के एमपी हैं. इसलिए वह महाराष्ट्र में मंत्री कैसे बन सकते हैं. लेकिन कैबिनेट में दूसरे नंबर का मंत्रालय दिया गया तो विधान परिषद से चुन के आने वाले चंद्रकांत के पीछे अमित शाह से नजदीकी प्रमुख कारण थी. आपको बता दें कि अमित शाह की पत्नी कोल्हापुर से आती हैं. इसलिए अमित शाह का कोल्हापुर में जाना आना लगा रहता है और इसी वजह से वह पाटिल से मिलते-जुलते रहते थे.

ऐसे जमाए राजनीति में पैर

चंद्रकांत दादा पाटिल पूर्व में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं और लगातार राजनीति में रहते हुए भी उनको 2014 के पहले महाराष्ट्र में कोई जानता नहीं था. दरअसल, वह हर वक्त पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाले व्यक्ति हैं. वहीं, ऐसा माना जाता है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने के बाद उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का काम शुरू किया था, लेकिन फिर भी उनको महाराष्ट्र में पहचाना नहीं जाता था. जैसे ही 2014 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई तो सबसे बड़े और संगठन के महत्वपूर्ण व्यक्ति के नाम पर चंद्रकांत दादा पाटिल का नाम लिया जाने लगा, तो आज वह (चंद्रकांत) संपूर्ण महाराष्ट्र में पहचाने जाने वाला नाम हैं.

विधानसभा चुनाव को लेकर हुआ बदलाव
महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव में 2 महीने ही बचे हैं और ऐसे वक्त में रावसाहेब दानवे को हटाकर चंद्रकांत दादा पाटिल के हाथों में राज्य का नेतृत्व देने के पीछे उनकी संगठन में रही प्रमुख भूमिका है. जब 2014 में गोपीनाथ मुंडे की दुर्घटना में मौत हो गई थी, तब विधानसभा चुनाव के लिए जो कोर ग्रुप बनाया गया था उसमें पाटिल का नाम शामिल नहीं था, लेकिन सरकार आते ही उनका नाम इस ग्रुप में शामिल हो गया. इसका मतलब पार्टी में अभी राज्य के स्तर पर जो भी निर्णय हो रहे थे उसमें प्रमुख भूमिका चंद्रकांत दादा पाटिल की थी.
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मराठा समाज के कद्दावर नेता हैं पाटिल
मराठा समाज के कद्दावर नेता जैसी पहचान चंद्रकांत दादा पाटिल की नहीं थी, लेकिन 2014 में सरकार आने के बाद मराठा समाज के मोर्चा को लेकर जो भूमिका निश्चित करना था उसमें भी उनकी छाप रहती थी. जबकि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी में मतभेद रहते हैं, लेकिन वह दिखते नहीं है. चंद्रकांत दादा पाटिल दोनों नेताओं को संभालने की क्षमता रखते हैं. यही वजह है कि उन्‍हें राज्य के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है.

चर्चा तो यह भी है
दिल्ली के गलियारों में ऐसी चर्चा है कि 2014 से 2019 के दरमियान बड़ा नाम उभर कर ऊपर के आने वाले चंद्रकांत दादा पाटिल के हाथों में राज्य का नेतृत्व देखकर भाजपा के राष्‍ट्रीय अमित शाह ने अपनी अमिट छाप छोड़ी है. आखिर देवेंद्र फडणवीस को पीएम नरेंद्र मोदी का सबसे विश्वस्त मुख्यमंत्री माना जाता है तो अमित शाह ने पाटिल को राज्‍य का अध्‍यक्ष बनाकर नया दांव खेला है.

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First published: July 16, 2019, 9:27 PM IST
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