हाईकोर्ट ने टेस्ट ट्यूब बेबी के बर्थ सर्टिफिकेट मामले में बीएमसी से मांगा जवाब

बर्थ सर्टिफिकेट पर जैविक पिता का नाम दर्ज करने को लेकर दायर एक याचिका पर बंबई हाईकोर्ट ने बीएमसी से जवाब मांगा है.

भाषा
Updated: February 25, 2018, 7:41 PM IST
हाईकोर्ट ने टेस्ट ट्यूब बेबी के बर्थ सर्टिफिकेट मामले में बीएमसी से मांगा जवाब
बॉम्बे हाईकोर्ट
भाषा
Updated: February 25, 2018, 7:41 PM IST
बंबई हाईकोर्ट ने मंगलवार को वृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) से 31 वर्षीय एक महिला की उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें वह चाहती है कि नगर निगम के अधिकारी उसे बर्थ सर्टिफिकेट पर अपनी बेटी के जैविक पिता का नाम दर्ज करने के लिए बाध्य नहीं करें.

याचिकाकर्ता नालासोपारा की एक अविवाहित मां है जिसने अगस्त 2016 में टेस्ट ट्यूब विधि से लड़की को जन्म दिया है.

बच्ची के जन्म के बाद महिला ने बीएसमसी जन्म पंजीकरण विभाग से बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र में पिता का स्थान खाली रखने की अनुमति देने का आग्रह किया. बीएमसी ने जब इससे इंकार कर दिया तो वह हाईकोर्ट पहुंच गई.

हाईकोर्ट ने पिछले साल दिसंबर में बीएमसी को नोटिस जारी किया था जिसका जवाब निगम ने अभी तक नहीं दिया है.

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के 2015 के उस महत्वपूर्ण फैसला का भी हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि अकेली मां को बर्थ सर्टिफिकेट में अपने बच्चे के जैविक पिता का नाम का खुलासा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.

जस्टिस ए एस ओका और पीएन देशमुख की बेंच ने अब बीएमसी को दो सप्ताह के भीतर इस पर जवाब दायर करने का निर्देश दिया है.

इस बीच, 22 वर्षीय एक अविवाहित मां की याचिका पर सुनवाई करते हुये बेंच ने इस महीने के आखिर में होने वाली अगली सुनवाई में बच्चे के जैविक पिता को अदालत में बुलाया है.

नवंबर 2013 में बच्चे को जन्म देने वाली अविवाहित मां ने इस याचिका में बच्चे के बर्थ सर्टिफिकेट से बच्चे के जैविक पता का नाम हटाने की उसे अनुमति देने की मांग की है.

हालांकि, बीएमसी ने उसे अनुमति देने से इंकार किया और कहा कि राज्य के नियम के मुताबिक नगर निगम एक बर्थ या डेथ सर्टिफिकेट में तभी संशोधन कर सकता है जब इसमें कोई गलती हो. निगम ने इस मामले में हाईकोर्ट को सूचित किया कि बच्चे के जन्म के समय याचिकाकर्ता ने स्वेच्छा से ही उसके जैविक पिता के नाम और पेशे की जानकारी दी थी. अब सिर्फ विचार बदलने की वजह से प्रविष्ठि मे बदलाव का मतलब बच्चों के जन्म रिकार्ड में गलत प्रविष्ठि करना होगा और याचिकाकर्ता को इसे हटाने या संशोधन की अनुमति नहीं दी जा सकती है.

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