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वकीलों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान कोट, गाउन पहनने की जरूरत नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
Mumbai News in Hindi

News18Hindi
Updated: May 21, 2020, 7:19 PM IST
वकीलों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान कोट, गाउन पहनने की जरूरत नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने वकीलों को काला कोट और गाउन नहीं पहनने की छूट प्रदान की है.

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने कहा कि वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अदालत (Court) के समक्ष पेश होने के दौरान शिष्टाचार सुनिश्चित करने के लिए वकील टाई अथवा सफेद बैंड लगा सकते हैं.

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मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस (Video Conference) के जरिए सुनवाई के दौरान वकीलों को काला कोट और गाउन नहीं पहनने की छूट प्रदान की है. न्यायालय की ओर से जारी एक परिपत्र में कहा गया कि बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता ने वकीलों को उसके समक्ष और उसकी नागपुर, औरंगाबाद और गोवा पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान काला कोट और गाउन नहीं पहनने की छूट प्रदान की है.

'शिष्‍टाचार के लिए वकील लगा सकते हैं टाई या सफेद बैंड'
हालांकि, छूट प्रदान करने के पीछे किसी कारण का उल्लेख नहीं किया गया है. इसमें कहा गया कि वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अदालत के समक्ष पेश होने के दौरान शिष्टाचार सुनिश्चित करने के लिए वकील टाई अथवा सफेद बैंड लगा सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों को दी है ऐसी ही छूट



उच्चतम न्यायालय ने भी 13 मई को एक आदेश पारित कर वकीलों को इसी तरह की छूट प्रदान की थी, जिसके बाद उच्च न्यायालय का यह आदेश आया है. कोविड-19 महामारी के बाद देशव्यापी लॉकडाउन होने से गत 25 मार्च से उच्चतम न्यायालय समेत अधिकतर उच्च न्यायालय जरूरी मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कर रहे हैं.



कोविड-19 प्रभावित दो क्षेत्रों में अग्रिम योद्धाओं की जांच के लिए करें विचार: HC
इससे पहले बॉम्‍बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को नागपुर के जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त को यहां के दो निषिद्ध क्षेत्रों- सतरंजीपुरा और मोमिनपुरा में ड्यूटी पर तैनात सभी चिकित्साकर्मियों एवं पुलिसकर्मियों की कोविड-19 की जांच कराने पर विचार करने को कहा.

उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति आर बी देव ने जांच के संबंध में जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त को निर्देश दिए. अदालत ने यह सुझाव गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) सिटिजन फोरम फॉर इक्वैलिटी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया. याचिका में अनुरोध किया गया था कि कोविड-19 से निपटने के लिए ड्यूटी कर रहे अग्रणी योद्धाओं की जांच करवायी जाए.

याचिका दायर करने वाले वकील तुषार मांडलेकर ने दलील दी कि इन कर्मियों को अत्यंत जोखिम वाले संपर्क के तौर पर देखना चाहिए क्योंकि ये लोग निषिद्ध क्षेत्रों, अस्पतालों, पृथक-वास केद्रों में अपनी ड्यूटी कर रहे हैं. इसलिए इनकी संक्रमण की जांच होनी चाहिए.

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First published: May 21, 2020, 6:52 PM IST
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