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BJP को मात दे महाराष्ट्र के सियासी खेल के नायक बने ‘चाणक्य’ शरद पवार

भाषा
Updated: November 26, 2019, 11:11 PM IST
BJP को मात दे महाराष्ट्र के सियासी खेल के नायक बने ‘चाणक्य’ शरद पवार
शरद पवार ने सतारा में बारिश के बीच रैलो को भीगते हुए संबोधित किया था (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र (Maharashtra) में अब शिवसेना-कांग्रेस और एनसीपी (NCP) गठबंधन की सरकार बनने जा रही है. तीनों पार्टियों के बीच हुए गठबंधन में शरद पवार (Sharad Pawar) ने अहम भूमिका निभाई.

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  • Last Updated: November 26, 2019, 11:11 PM IST
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मुंबई. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) अध्यक्ष शरद पवार (Sharad Pawar) ने गत 21 अक्टूबर को हुए विधानसभा चुनाव के लिए महाराष्ट्र (Maharashtra) के सतारा में बारिश के बीच चुनावी रैली को संबोधित किया था, लेकिन तब कुछ ही लोगों को अहसास होगा कि 79 वर्षीय पवार राज्य की नई सरकार के मुख्य कर्ता-धर्ता होंगे. अब शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस महाराष्ट्र में सरकार बनाने जा रही हैं. बीजेपी (BJP) विरोधी इस गठबंधन को बनाने और बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने में पवार की अहम भूमिका रही.

विधानसभा चुनाव में अपनी मेहनत के बल पर शरद पवार अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही एनसीपी को मजबूत स्थिति में ले आए लेकिन उनकी कोशिशों को उस समय झटका लगा, जब भतीजे ने उन्हें स्तब्ध करते हुए बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली. बीजेपी की यह सरकार अजित पवार के निजी कारणों से उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने और उसके कुछ घंटे बाद ही देवेंद्र फडणवीस के भी मुख्यमंत्री पद छोड़ने के ऐलान करने से पहले महज 80 घंटे ही अस्तित्व में रही और गैर बीजेपी गठबंधन की सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया.

चुनाव से पहले एनसीपी को लगे थे कई झटके
महाराष्ट्र चुनाव से पहले एनसीपी को कई झटके लगे थे लेकिन शरद पवार ने चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी ली और पूरे राज्य का दौरा किया. उनकी कोशिशें रंग लाईं और पार्टी 288 सदस्यीय सदन में 54 सीटें जीतकर आई, जो 2014 के मुकाबले 13 सीटें अधिक है.


27 साल की उम्र में पहली बार विधायक बने शरद पवार
शरद पवार राज्य में सरकार बनाने और बीजेपी को सत्ता से दूर रखने में सभी को जोड़ने वाली ताकत के रूप में उभरे. उनका 52 साल का राजनीतिक करियर है, जिसमें वह रक्षा मंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और तीन बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. शरद पवार सात-सात बार महाराष्ट्र विधानसभा और लोकसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं. वह 27 साल की उम्र में पहली बार विधायक बने और 38 साल की उम्र में कांग्रेस की सरकार गिरा दी.
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वंसंतदादा पाटिल की सरकार गिरा जनता पार्टी के साथ बना ली सरकार
एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार को 1978 में उस समय ख्याति मिली, जब उन्होंने वंसंतदादा पाटिल की सरकार गिराकर जनता पार्टी के साथ सरकार बना ली. उस समय उनकी उम्र मात्र 38 साल थी और वह महाराष्ट्र के सबसे युवा मुख्यमंत्री थे. शरद पवार जून 1988 से जून 1991 और मार्च 1993 से मार्च 1995 तक मुख्यमंत्री रहे. उन्होंने जून 1991 और मार्च 1993 तक देश के रक्षामंत्री की जिम्मेदारी निभाई.

10 साल तक रहे देश के कृषि
वर्ष 1999 में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के विदेशी मूल का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने अपने रास्ते अलग किए और एनसीपी की स्थापना की. 1999 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और एनसीपी राज्य सरकार बनाने के लिए साथ आए. शरद पवार मनमोहन सिंह की सरकार में देश के कृषि मंत्री बने और लगातार दस साल तक इस पद पर रहे. वह उन चुनिंदा नेताओं में है, जिन्हें विचारधारा से इतर सभी पार्टियों में सम्मान मिलता है.

एनसीपी अध्यक्ष पर अक्सर विरोधी परिवारवाद बढ़ाने का आरोप लगते हैं. उनकी बेटी सुप्रिया सुले तीन बार से बारामती से सांसद हैं. उनके पोते रोहित पवार करजत जामखेड सीट से विधायक चुने गए हैं. राजनीति के अलावा शरद पवार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद सहित क्रिकेट निकायों से भी जुड़े रहे हैं.

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First published: November 26, 2019, 11:06 PM IST
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