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महाराष्ट्र: शिवसेना के 'हिंदुत्व' से इस वजह से किनारा कर रही है कांग्रेस!

Ranjeeta Jha | News18Hindi
Updated: December 2, 2019, 7:31 PM IST
महाराष्ट्र: शिवसेना के 'हिंदुत्व' से इस वजह से किनारा कर रही है कांग्रेस!
उद्धव ठाकरे ने विधानसभा में हिंदुत्व को लेकर बयान दिया था. (File Photo)

उद्धव ठाकरे (uddhav thackeray) के हिंदुत्व (Hindutva) को लेकर दिए बयान पर कांग्रेस किनारा करने में लगी है. कांग्रेस इसे शिवसेना (shiv sena) प्रमुख की निजी राय बता रही है.

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  • Last Updated: December 2, 2019, 7:31 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के गठबंधन से बनी सरकार के लिए 'हिंदुत्व' शब्द से पीछा छुड़ाना आसान नहीं है. यही कारण है कि विधानसभा में उद्धव ठाकरे के हिंदुत्व (Hindutva) को लेकर दिए बयान को कांग्रेस, शिवसेना की निजी लाइन बता रही है. कांग्रेस पार्टी का कहना है कि सरकार महाराष्ट्र में चलेगी तो सिर्फ 'कॉमन मिनीमम प्रोग्राम' पर. महाराष्ट्र की सत्ता में काबिज तीन पार्टियों की सरकार जिसे 'महाराष्ट्र विकास अघाड़ी' कहा जा रहा है, इस सरकार को चला पाना चुनौती से कम नहीं है. एक तरफ जहां उद्धव ठाकरे ये कहते नजर आ रहे हैं कि वो हिंदुत्व को कभी नहीं छोड़ेंगे तो वहीं इसके बाद से कांग्रेस को जवाब देते नहीं बन रहा है. कांग्रेस (Congress) ये कहकर बच रही है कि ये सीएम उद्धव की निजी राय हो सकती है. लेकिन सरकार चलाने का फॉर्मूला 'कॉमन मिनीमम प्रोग्राम' है.

इन शर्तों पर कांग्रेस ने शिवसेना से किया था गठबंधन
कांग्रेस शायद सरकार बनने से पहले ही इन चीज़ों को समझ रही थी. यही कारण है कि फैसला लेने में पार्टी को इतना समय लगा. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने सरकार बनाने को लेकर जब चर्चा शुरू ही हुई थी, तभी ये कह दिया था कि शिवसेना को अब कट्टर हिंदुत्व की राह छोड़ धर्मनिरपेक्षता की ओर आना होगा. शिवसेना अपने 'सामना' में इस तरह के किसी लेख को प्रकाशित भी नहीं करेगी. जिससे गठबंधन में कांग्रेस-एनसीपी को जवाब देना मुश्किल हो और सरकार बनाते वक्त शिवसेना ने इन शर्तों पर हामी भी भरी थी, लेकिन विधानसभा में उद्धव के हिंदुत्व वाले बयान ने बीजेपी को बैठे-बिठाए कांग्रेस पर हमला बोलने का मौका दे दिया है.

किसी पार्टी ने ज्यादा दबाव डाला तो गिर जाएगा सरकार

वरिष्ठ पत्रकार गौतम लहरी ने कहा, "निश्चित तौर पर ये अनहोली गठबंधन है, महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार चलेगी या नहीं, इसकी संभावना 50-50 प्रतिशत की है. जब यूपीए-1 की सरकार बनी थी तो उस गठबंधन को भी अनहोली गठबंधन कहा गया था. लेकिन उस गठबंधन की खासियत ये थी कि कांग्रेस उसमें सबसे बड़ी पार्टी थी, जिस कारण कांग्रेस का दबाव सरकार पर दिखता था. लेकिन महाराष्ट्र के गठबंधन में लगभग तीनों ही पार्टियों के विधायक संख्या में एक जैसे ही हैं. इसलिए किसी एक पार्टी का दबाव नहीं चलेगा और अगर किसी पार्टी ने ज्यादा दखल देने की कोशिश की तो सरकार गिर जाएगी."

कांग्रेस को केरल में नुकसान पहुंचा सकता है 'हिंदुत्व'
वहीं कांग्रेस की परेशानी ये भी है, इस तरह का बयान आना सबसे ज्यादा पार्टी के लिए नुकसान केरल में कर सकता है. डेढ़ साल बाद केरल में विधानसभा चुनाव हैं और वहां इस गठबंधन का प्रभाव सबसे ज्यादा पड़ेगा. यही कारण है कि शिवसेना के साथ सरकार बनाने को लेकर किए गए फैसले के समय सोनिया गांधी के करीबी केरल लॉबी इस गठबंधन के सबसे खिलाफ दिखी थी. हालांकि वरिष्ठ पत्रकार रेणु मित्तल  मानते हैं कि शिवसेना खुद को कांग्रेस के रंग में ढ़ालने में लगी है. ये बात सही है कि हिंदुत्व से शिवसेना अलग नहीं हो सकती क्योंकि वही शिवसेना की पहचान है, लेकिन सरकार चलाते वक्त हिंदुत्व को पीछे रखना ही सरकार और गठबंधन दोनों के लिए हितकर होगा.

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First published: December 2, 2019, 7:31 PM IST
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