कांग्रेस-NCP की प्रेस कॉन्फ्रेंस: आपसी सहमति से तय करेंगे आगे की रणनीति
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कांग्रेस-NCP की प्रेस कॉन्फ्रेंस: आपसी सहमति से तय करेंगे आगे की रणनीति
सरकार गठन पर कांग्रेस और एनसीपी ने संयुक्त रूप से कहा कि बैठक में राज्य के राजनीतिक हालात पर चर्चा हुई.

महाराष्ट्र (Maharashtra) में राष्ट्रपति शासन (President Rule) लगने के बाद कांग्रेस-NCP ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की है.

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  • Last Updated: November 12, 2019, 11:23 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में राष्ट्रपति शासन (President Rule) लगने के बाद कांग्रेस-NCP ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की है. सरकार गठन पर कांग्रेस और एनसीपी ने संयुक्त रूप से कहा कि बैठक में राज्य के राजनीतिक हालात पर चर्चा हुई. प्रफुल्ल पटेल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि फैसले से पहले सभी पहलुओं पर चर्चा की गई.

दोनों पार्टियों के दिग्गज नेता शामिल
कांग्रेस और एनसीपी की इस संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में शरद पवार, अहमद पटेल, मल्लिकार्जुन खड़गे, वेणुगोपाल, अशोक चौव्हाण, पृथ्वीराज चौव्हाण, बाला साहब थोराट, प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, अजीत पवार, माणिक राव ठाकरे शामिल थे.

क्या बोले शरद पवार
शरद पवार ने कहा कि हमारी तरफ से कोई रुकावट नहीं है. आज स्पष्ट कहना ठीक नहीं. चूंकि शिवसेना ने बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था इसलिए अभी शिवसेना के साथ मिलकर बात होगी. हमारे बीच सरकार बनाने के बाद क्या मामले आ सकते हैं, इस पर चर्चा करेंगे. जब तक इन सभी पर बातें साफ नहीं हो जाती तब तक हम कुछ नहीं कह सकते हैं. वहीं सरकार गठन के सवाल पर शरद पवार ने कहा कि राज्यपाल ने बहुत समय दिया है, कोई चिंता नहीं. हम दोबारा चुनाव नहीं चाहते हैं.



क्या बोले कपिल सिब्बल
कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि देखिए जहां तक राज्यपाल का सवाल है, वो केन्द्र के इशारे पर चलते हैं. जब ये जाहिर था कि शिवसेना, बीजेपी के साथ नहीं जाना चाहती तो 9 दिन तक का इंतजार क्यों किया गया? ऐसे में कानून का क्या होगा, सिर्फ 24 घंटे का समय दिया गया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति शासन का मकसद हॉर्स ट्रेडिंग को बढ़ावा देना है. ये अनैतिक है. वहीं कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने कहा कि जिस तरह से राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की गई थी, मैं इसकी निंदा करता हूं. इस सरकार ने पिछले 5 वर्षों में कई अवसरों पर राष्ट्रपति शासन पर सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का उल्लंघन किया है. लोकतंत्र और संविधान का मजाक उड़ाने की कोशिश हुई. कांग्रेस को न्योता नहीं मिला ये गलत है. राष्ट्रपति शासन की जरूरत नहीं थी. सोमवार को शिवसेना ने अधिकृत तरीके से कांग्रेस को फोन किया गया. लेकिन एनसीपी से बात किये बिना फैसला नहीं ले सकते.

उन्होंने कहा कि सोमवार को शिवसेना ने अधिकृत तरीके से कांग्रेस को फोन किया था. लेकिन एनसीपी से बात किए बिना फैसला नहीं ले सकते. जरूरी है कि पहले शिवसेना के साथ बात की जाए और कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण के बाद ही कोई बात आगे बढ़ेगी. देरी बिलकुल भी नहीं कर रहे हैं, जब कल हमें फोन किया गया तो आज हम हाजिर हैं हमने कोई देरी नहीं की.
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