महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को नोटिस जारी, इस दिन तक देना होगा जवाब
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को नोटिस जारी, इस दिन तक देना होगा जवाब
मजिस्ट्रेट की अदालत ने सोमवार को कहा कि देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के चुनावी हलफनामे में दो जानकारियां छुपाने के इस केस को एक आपराधिक मामले के रूप में देखा जाएगा और उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा.

मजिस्ट्रेट की अदालत ने सोमवार को कहा कि देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के चुनावी हलफनामे में दो जानकारियां छुपाने के इस केस को एक आपराधिक मामले के रूप में देखा जाएगा और उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा.

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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) की एक अदालत ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) को एक चुनावी हलफनामे में उनके द्वारा दो आपराधिक मामलों का खुलासा न करने का आरोप लगाते हुए सोमवार को नोटिस जारी किया. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 1 अक्टूबर को निर्देश दिया था कि मजिस्ट्रेट अदालत वकील सतीश उके द्वारा दायर आवेदन के पर आगे की कार्रवाई करे, ताकि मामले में फडनवीस के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू की जा सके.

4 दिसंबर तक देना होगा जवाब
मजिस्ट्रेट एस डी मेहता ने आदेश में कहा कि, ‘प्रक्रिया आरोपी (फडनवीस) के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 125 ए के तहत दंडनीय अपराध के लिए जारी नोटिस किया जाता है. मुख्यमंत्री को नोटिस का जवाब देने के लिए 4 दिसंबर तक का समय दिया गया है. 1996 और 1998 में फडणवीस के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले दर्ज किए गए थे, लेकिन दोनों मामलों में आरोप तय नहीं किए गए थे.

उके ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की अपील
उके ने 2014 में मजिस्ट्रेट की अदालत में एक आवेदन दायर किया था जिसमें फडनवीस के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई थी. 2015 में, मजिस्ट्रेट की अदालत ने उके के आवेदन को खारिज कर दिया था. इसके बाद उन्होंने 2016 में सत्र अदालत का रुख किया, जिसने आवेदन को अनुमति दी. फडणवीस ने तब सत्र न्यायालय के आदेश को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसने सत्र न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया और मजिस्ट्रेट के आदेश को खारिज कर दिया. इसके बाद उके ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की, तो सर्वोच्च अदालत ने 1 अक्टूबर को हाईकोर्ट के आदेश को अलग रखा.



सुप्रीम कोर्ट ने आवेदन पर आगे बढ़ने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में उल्लेख किया गया है कि प्रथम दृष्टया, जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 125 के तहत मामला (सूचना छिपाकर या चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी प्रस्तुत करना) बनाया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने मजिस्ट्रेट की अदालत को उके के आवेदन पर आगे बढ़ाने का निर्देश दिया. 1 नवंबर को नागपुर में मजिस्ट्रेट की अदालत ने उके के आवेदन को बहाल कर दिया.

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