बॉम्बे HC का आदेश- पिता की दूसरी शादी की वैधता को कोर्ट में चुनौती दे सकती है बेटी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया है. (फाइल फोटो)

बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया है. (फाइल फोटो)

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) के न्यायमूर्ति आरडी धनुका और न्यायमूर्ति वीजी बिष्ट की पीठ ने बुधवार को यह फैसला सुनाते हुए 66 वर्षीय उस महिला की याचिका स्वीकार कर ली, जिन्होंने फैमिली कोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी थी. दरअसल, फैमिली कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि वैवाहिक संबंध के सिर्फ पक्षकार ही शादी की वैधता को चुनौती दे सकते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 19, 2021, 7:45 PM IST
  • Share this:

मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने कहा है कि एक बेटी अपने पिता की दूसरी शादी की वैधता को अदालत में चुनौती दे सकती है. न्यायमूर्ति आरडी धनुका और न्यायमूर्ति वीजी बिष्ट की पीठ ने बुधवार को यह फैसला सुनाते हुए 66 वर्षीय उस महिला की याचिका स्वीकार कर ली, जिन्होंने परिवार अदालत के एक आदेश को चुनौती दी थी. दरअसल, फैमिली कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि वैवाहिक संबंध के सिर्फ पक्षकार ही शादी की वैधता को चुनौती दे सकते हैं.

फैसले के मुताबिक, महिला ने अपने (दिवंगत) पिता की दूसरी शादी की वैधता को चुनौती देते हुए 2016 में फैमिली कोर्ट में एक याचिका दायर की थी. महिला ने याचिका में कहा कि उसके पिता ने उसकी मां की 2003 में मृत्यु हो जाने के बाद दूसरी शादी कर ली थी, लेकिन उसके पिता की मृत्यु हो जाने पर 2016 में उसे पता चला कि उसकी सौतेली मां ने अपनी पिछली शादी से तलाक को अब तक अंतिम रूप नहीं दिया है.

फैमिली कोर्ट ने क्या कहा था

महिला ने याचिका में कहा कि इसलिए उसके पिता की दूसरी शादी को वैध नहीं माना जा सकता है. हालांकि, महिला की सौतेली मां ने फैमिली कोर्ट में दलील दी कि याचिकाकर्ता का इस विषय में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि वैवाहिक संबंध में सिर्फ दो पक्ष (पति और पत्नी) ही ऐसे होते हैं, जो इसकी वैधता को अदालत में चुनौती दे सकते हैं. हालांकि, उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता ने अपने पिता की मृत्यु के बाद उस महिला के तलाक के बारे में सच्चाई का पता लगाया और उसने यह पता चलने के शीघ्र बाद परिवार अदालत का रुख किया था.
दोबारा विचार के लिए फैमिली कोर्ट के पास भेजा

अदालत ने कहा कि चूंकि उसके पिता की मृत्यु हो गई है, इसलिए असंगत तथ्य को उसे ही सामने लाना था और इस तरह की शादी की वैधता को चुनौती देनी थी. पीठ ने कहा कि फैमिली कोर्ट अपने फैसले में गलत थी. उच्च न्यायालय ने याचिका पर नए सिरे से फैसला करने के लिए उसे फैमिली कोर्ट के पास वापस भेज दिया.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज