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महाराष्ट्र में सरकार गठन में देरी नई बात नहीं, 20 साल पहले भी बनी थी ऐसी ही परिस्थिति

भाषा
Updated: November 1, 2019, 11:41 PM IST
महाराष्ट्र में सरकार गठन में देरी नई बात नहीं, 20 साल पहले भी बनी थी ऐसी ही परिस्थिति
1999 और 2004 में भी 1 हफ्ते तक स्पष्ट नहीं हुई थी सरकार की स्थिति

1999 में कांग्रेस (Congress) ने शरद पवार की नवनिर्मित राकांपा (NCP) के साथ मिलकर नई सरकार बनाई थी लेकिन इससे पहले मुख्यमंत्री के पद और मंत्रियों को लेकर काफी रस्साकशी हुई थी.

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मुंबई. महाराष्ट्र में चुनाव (maharashtra Assembly Election) परिणाम घोषित होने के एक सप्ताह बाद भी नई सरकार का गठन नहीं हो पाया है, लेकिन विधानसभा के सूत्रों के अनुसार यह देरी अभूतपूर्व नहीं है और तत्काल राष्ट्रपति शासन (President Rule) लगाना जरूरी नहीं होगा. राज्य में 24 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद अधिक सीटें जीतने वाली गठबंधन सहयोगी भाजपा और शिवसेना के बीच मुख्यमंत्री के पद को लेकर गतिरोध बना हुआ है.

ऐसी स्थिति में 7 नवंबर तक लग सकता है राष्ट्रपति शासन
हालांकि सूत्रों ने बताया कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी विधानसभा का पहला सत्र बुला सकते हैं. भाजपा नेता सुधीर मुणगंतीवार ने आज कहा कि अगर सात नवंबर तक नई सरकार नहीं बनती तो महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लग सकता है. राज्य की 13वीं विधानसभा का कार्यकाल 9 नवंबर को समाप्त हो रहा है. विधानसभा के सूत्रों ने पहचान उजागर नहीं होने की शर्त पर कहा कि राज्यपाल को नई विधानसभा का सत्र भंग करने के लिए कैबिनेट की सिफारिश जरूरी है, लेकिन यदि कैबिनेट में फिलहाल मुख्यमंत्री भी हों तो पर्याप्त होगा.

1999 और 2014 में भी आया था ऐसा ही संकट

उन्होंने कहा कि राज्यपाल सदस्यों के शपथ ग्रहण के लिए सत्र बुला सकते हैं. 1999 और 2004 में सरकार गठन में दो सप्ताह से ज्यादा की देरी हुई थी जब चुनाव में जीतने वाले सहयोगी दलों कांग्रेस तथा राकांपा के बीच सत्ता बंटवारे पर सहमति नहीं बन पा रही थी. 1999 में कांग्रेस ने शरद पवार की नवनिर्मित राकांपा के साथ मिलकर नई सरकार बनाई थी लेकिन इससे पहले मुख्यमंत्री के पद और मंत्रियों को लेकर काफी रस्साकशी हुई थी. उस समय कांग्रेस के विलासराव देशमुख को मुख्यमंत्री बनाया गया था.

इसी तरह की स्थिति 2004 में देखने को मिली जब राकांपा को ज्यादा सीटें मिलीं और उसने मुख्यमंत्री के पद की मांग उठाई. हालांकि यह शीर्ष पद कांग्रेस के पास ही रहा तथा राकांपा को दो अतिरिक्त मंत्रालय दिए गए.

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First published: November 1, 2019, 10:34 PM IST
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