सामने आया डॉ. पायल तड़वी का सुसाइड नोट, लिखा था- सीनियर मुझे काम नहीं करने देते...

डॉ. पायल तड़वी ने सुसाइड नोट में लिखा है कि यह कदम उठाने के लिए माता-पिता मुझे माफ करना...मैं एक अच्छी डॉक्टर बनना चाहती थी, परंतु लोगों ने मुझे बनने नहीं दिया.

News18Hindi
Updated: July 25, 2019, 5:44 PM IST
सामने आया डॉ. पायल तड़वी का सुसाइड नोट, लिखा था- सीनियर मुझे काम नहीं करने देते...
सामने आया डॉ. पायल तड़वी का सुसाइड नोट, क्या लिखा है जानने के लिए पढ़ें खबर.
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Updated: July 25, 2019, 5:44 PM IST
डॉ. पायल तड़वी केस में नया मोड़ आ गया है. मामले में अब सुसाइड नोट सामने आया है. डॉ. पायल तड़वी ने सुसाइड नोट में लिखा है, "यह कदम उठाने के लिए माता-पिता मुझे माफ करना...मैं एक अच्छी डॉक्टर बनना चाहती थी, परंतु लोगों ने मुझे बनने नहीं दिया. परेशान करने की सीमा खत्म हो चुकी है... मुझे हर समय परेशान किया जा रहा है, हर काम को करने के लिए रोका जा रहा है..."

"मैं एक गाईनेक बनना चाहती थी, पर मेरे सीनियर मुझे कोई भी मामला हैंडल करने का मौका नहीं देते थे, ऑपरेशन थिएटर में जाने नहीं देते थे, लेबर पेन के मामले को देखने नहीं देते थे, हमेशा ओपीडी में भेज देते थे... मुझे मानसिक रूप से काफी ज्यादा परेशान किया जा रहा है, इसलिए मैं यह कदम उठा रही हूं...” पायल ने यह भी लिखा है कि इस कदम के पीछे (तीन महिला डॉक्टर) यह लोग हैं, मुझे माफ करना...

आरोपियों की सुनवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग कराएगा हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को अपने रजिस्ट्री विभाग को निर्देश दिया कि वह तीन वरिष्ठ चिकित्सकों की जमानत याचिका पर होने वाली सुनवाई की वीडियोग्राफी की व्यवस्था करे. इन चिकित्सकों को यहां नगर निकाय संचालित एक अस्पताल में अपने कनिष्ठ सहयोगी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.

न्यायमूर्ति डीएस नायडू, हेमा आहूजा, भक्ति मेहर और अंकिता खंडेलवाल की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे. इन तीनों को जातिवादी टिप्पणी करने और अपनी सहयोगी डॉ. पायल तड़वी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.

तड़वी ने 22 मई को कथित तौर पर की थी आत्महत्या
तड़वी (26) मेडिकल में स्नातकोत्तर द्वितीय वर्ष की छात्रा थी और वह बीवाईएल नायर अस्पताल से संबद्ध थी. उसने 22 मई को अपने हॉस्टल के कमरे में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी. न्यायमूर्ति नायडू ने गुरुवार को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम की धारा 15 (ए) (10) पर गौर किया जिसमें यह प्रावधान है कि अधिनियम के तहत सभी कार्यवाही की संबंधित अदालत वीडियो रिकॉर्डिंग कराए.
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30 जुलाई को होगी जमानत याचिकाओं पर अगली सुनवाई
इस प्रावधान का उल्लेख पीड़िता की मां के वकील गुणारतन सदावर्ते ने किया. जहां विशेष लोक अभियोजक राजा ठाकरे ने कहा कि यह नीतिगत मामला है. वहीं, आरोपी की ओर से उपस्थित अधिवक्ता आबाद पोंडा ने कहा कि यह प्रावधान सिर्फ मुकदमे की सुनवाई के लिए है, न कि जमानत पर सुनवाई के लिए है, हालांकि, न्यायमूर्ति नायडू ने कहा कि कार्यवाही से आशय सभी न्यायिक कार्यवाही से है. इसके बाद अदालत ने उच्च न्यायालय के रजिस्ट्री विभाग को वीडियो रिकॉर्डिंग के लिये सभी जरूरी व्यवस्था करने का निर्देश दिया और जमानत याचिकाओं पर अगली सुनवाई की तारीख 30 जुलाई निर्धारित कर दी।

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First published: July 25, 2019, 5:18 PM IST
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