सहकारी बैंक घोटाला मामले में राकांपा नेता अजीत पवार पर मुकदमा दर्ज

मुंबई पुलिस (Mumbai Police) की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले के संबंध में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता, अजीत पवार और 76 अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.

News18Hindi
Updated: August 26, 2019, 11:03 PM IST
सहकारी बैंक घोटाला मामले में राकांपा नेता अजीत पवार पर मुकदमा दर्ज
BREAKING: सहकारी बैंक घोटाला मामले में राकांपा नेता अजीत पवार पर मुकदमा दर्ज.
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Updated: August 26, 2019, 11:03 PM IST
मुंबई पुलिस (Mumbai Police) की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (एमएससीबी) घोटाले के संबंध में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता, अजीत पवार और 76 अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. बांबे हाईकोर्ट की जस्टिस एससी धर्माधिकारी और जस्टिस एसके शिंदे की पीठ ने गुरुवार को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था. अजित पवार के अलावा राकांपा नेता जयंत पाटिल, अन्य कई राजनेता, सरकारी अधिकारी और राज्य के 34 जिलों के कोऑपरेटिव बैंक के कई अधिकारी इस मामले में आरोपी हैं. आरोप है कि इन सभी लोगों ने 2007 से 2011 के बीच एमएससीबी में कथित रूप से 1,000 करोड़ रुपए का घोटाला किया है.

इन धाराओं में दर्ज किया गया है मामला
राकांपा प्रमुख शरद पवार के भतीजे अजित पवार 10 नवम्बर 2010 से 26 सितम्बर 2014 तक उपमुख्यमंत्री रहे थे. एक अधिकारी ने बताया कि अन्य आरोपियों में पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी के नेता जयंत पाटिल और राज्य के 34 जिलों में बैंक के अधिकारी शामिल हैं. एक अधिकारी ने बताया, हमने आर्थिक अपराध शाखा की शिकायत पर एमआरए मार्ग थाने में मामला दर्ज किया है. उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (ठगी और बेईमानी), 409 (नौकरशाह या बैंकर, व्यवसायी या एजेंट द्वारा आपराधिक विश्वासहनन), 406 (आपराधिक विश्वासहनन के लिए सजा), 465 (धोखाधड़ी के लिए सजा), 467 (मूल्यवान चीजों की धोखाधड़ी) और 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र की सजा) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

उच्च न्यायालय ने 5 दिनों में प्राथमिकी दर्ज करने के दिए थे निर्देश

उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एस सी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति एस के शिंदे की पीठ ने 22 अगस्त को कहा कि मामले में आरोपियों के खिलाफ ठोस साक्ष्य हैं और ईओडब्ल्यू को पांच दिनों के अंदर प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए. एमएससीबी को 2007 और 2011 के बीच एक हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था जिसमें आरोपियों की कथित तौर पर मिलीभगत थी.

2015 में ईओडब्ल्यू में दर्ज कराई गई थी शिकायत
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की जांच के साथ ही महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव सोसायटीज कानून के तहत अर्द्ध न्यायिक जांच आयोग की तरफ से दायर आरोप पत्र में नुकसान के लिए अजित पवार और अन्य आरोपियों के ‘निर्णयों, कार्रवाई और निष्क्रियताओं’ को जिम्मेदार ठहराया गया है. स्थानीय कार्यकर्ता सुरिंदर अरोड़ा ने 2015 में ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज कराई और उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की थी.

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First published: August 26, 2019, 7:59 PM IST
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