बिस्तर की कमी के कारण पूरे दिन एम्बुलेंस में रखा गया कोरोना संक्रमित मरीज
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बिस्तर की कमी के कारण पूरे दिन एम्बुलेंस में रखा गया कोरोना संक्रमित मरीज
सांकेतिक तस्वीर

मुंबई (Mumbai) में कोरोना वायरस (Coronavirus) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच लापरवाही की घटनाएं भी सामने आ रही हैं. ताजा घटनाक्रम में नवी मुंबई (Navi Mumbai) में कोरोना मरीज (Corona Patient) की इलाज के अभाव में मौत का मामला सामने आया है.

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मुंबई. मुंबई (Mumbai) में कोरोना वायरस (Coronavirus) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच लापरवाही की घटनाएं भी सामने आ रही हैं. ताजा घटनाक्रम में नवी मुंबई (Navi Mumbai) में कोरोना मरीज (Corona Patient) की इलाज के अभाव में मौत का मामला सामने आया है. मृतक के परिवारवालों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल ने 64 वर्षीय कोरोना पॉजिटिव मरीज को तुरंत भर्ती करने की बजाय पूरे दिन एम्बुलेंस में रखा. जब उन्हें आखिरकार भर्ती कराया गया, तो मरीज के परिवार को एक इंजेक्शन लाने के लिए कहा गया. परिवारवालों का कहना है कि ये इंजेक्शन 32 हजार रुपये का था, जिसे खरीदने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे.

मृतक के बेटे का कहना है, "उन्हें 20 जून को खांसी और सांस लेने में समस्या हुई. हम उन्हें वाशी स्थित नवी मुंबई म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (NMMC) के COVID-19 अस्पताल ले गए. ऑक्सीजन की आपूर्ति के साथ कोई बिस्तर उपलब्ध नहीं था, इसलिए मुझे दूसरे अस्पताल में जाने के लिए कहा गया. मैंने उनसे कहा कि हमें बताएं कि कहां जाना है, लेकिन उन्होंने हमारा मार्गदर्शन नहीं किया, कई अस्पताल भटकने के बाद हम लोगों ने कार्डियक एम्बुलेंस को फोन किया. इस एम्बुलेंस में ऑक्सीजन था, जिसमें मरीज को तत्काल रखा गया."

अगले दिन अस्पातल में किया गया भर्ती
जब सरकारी अस्पातल ने मरीज को लेने से मना कर दिया तो उनके परिवार ने उन्हें कोपर खैरन इलाके के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया. डॉक्टरों ने मरीज के बेटे को बताया कि उन्हें एक इंजेक्शन की जरूरत होगी, जिसकी कीमत लगभग 32,000 रुपये है, तो उन्होंने मदद के लिए NMMC से संपर्क किया, लेकिन अधिकारियों ने कहा कि वे कुछ नहीं कर सकते. 4 दिन बाद मरीज की मौत हो गई.




परिजनों ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
प्रशासन पर आरोप लगाते हुए मरीज के बेटे ने कहा, ‘शव वाहन तीन घंटे बाद आया, जिसमें कोई कर्मचारी नहीं था. मैंने और मेरे एक रिश्तेदार ने पीपीई पहना और शव को अंत्येष्टि के लिए लेकर गए.’’ उसने इस बात पर तकलीफ जतायी कि स्थानीय होने, करदाता होने के बावजूद निकाय ने उसके पिता को बचाने के लिए एक इंजेक्शन की व्यवस्था नहीं की.‘

उसने यह भी कहा, मैं अब मीडिया को यह कह रहा हूं क्योंकि मैं नहीं चाहता कि किसी और मरीज को इस तरह मरना पड़े. नवी मुंबई नगर निगम को अपनी मेडिकल सुविधाएं दुरूस्त करनी चाहिए.
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