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शिवसेना के लिए कितना असरदार होगा आदित्य ठाकरे का चुनावी राजनीति में आना

Anil Rai | News18Hindi
Updated: October 11, 2019, 11:55 PM IST
शिवसेना के लिए कितना असरदार होगा आदित्य ठाकरे का चुनावी राजनीति में आना
आदित्य ठाकरे के चुनाव लड़ने से शिवसेना को कितना लाभ होगा, यह रिजल्ट के दिन पता चल पाएगा. (फाइल फोटो)

बाला साहब ठाकरे (Bala Sahab Thackeray) राजवंश के उत्तराधिकारी माने जाने वाले आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) पहली बार चुनावी मैदान में हैं. शिवसेना (Shiv Sena) ने उन्हें इस रणनीति के तहत चुनाव मैदान में उतारा है कि वे पार्टी को अभूतपूर्व सफलता दिलाएंगे.

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  • Last Updated: October 11, 2019, 11:55 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र चुनाव में कांग्रेस (Congress) और एनसीपी (NCP) के सामने अपना वजूद बचाने की चुनौती है तो दूसरी तरफ शिवसेना (Shiv Sena) के सामने भी संकट छोटा नहीं है. दशकों तक बीजेपी (BJP) के बड़े भाई की भूमिका निभा रही शिवसेना इस चुनाव में छोटे भाई की भूमिका में है और अगर इस चुनाव में पार्टी ठीक-ठाक प्रदर्शन नहीं कर पाई तो आने वाले चुनावों में वह हाशिए पर खड़ी नजर आएगी.

शिवसेना ने इस बार भले ही बीजेपी से गठबंधन कर लिया हो लेकिन उसके लिए आगे की राह इतनी आसान नहीं है और इसका अंदाजा शिवसेना के उप-मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवारी से बैकफुट पर आने से लगाया जा सकता है और शायद यही वह कारण है जिसने शिवसेना प्रमुख उद्धव को ठाकरे परिवार को चुनावी राजनीति में लाने को मजबूर कर दिया है. बाला साहब ठाकरे से लेकर उद्धव ठाकरे यहां तक कि शिवसेना से अलग हुए एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे भी चुनावी राजनीति से अब तक दूर ही रहे, लेकिन इस बार ठाकरे परिवार के उत्तराधिकारी माने जाने वाले आदित्य ठाकरे महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के मैदान में हैं.

आदित्य ठाकरे के साथ उनकी नई टीम ने भी संभाला मोर्चा
आदित्य ठाकरे भले ही चुनावी राजनीति में पहली बार उतर रहे हो लेकिन पार्टी की राजनीति में वे लम्बे अरसे से सक्रिय हैं. बाल ठाकरे के रहते ही आदित्य संगठन की राजनीति में सक्रिय हो गए थे. आदित्य को अक्टूबर 2010 में ही शिवसेना की युवा इकाई युवा सेना का अध्यक्ष बना दिया गया था. ऐसे में आदित्य के सामने भी खुद को साबित करने की बड़ी चुनौती है.

युवा सेना के कंधों पर हैं आदित्य ठाकरे और पार्टी को चुनाव जिताने की जिम्मेदारी
29 साल के आदित्य की टीम पर नजर डालें तो युवा सेना के महासचिव आमोल किटरीकर, सचिव वरुन सरदेसाई,  कार्यकारिणी के सदस्य सुरज चौहान को आदित्य की कोर टीम में जाना जाता है. युवा सेना के कंधों पर आदित्य को चुनाव जिताने के साथ-साथ पार्टी को सोशल मीडिया पर दमदार उपस्थिति दिलाना और पार्टी के प्रचार-प्रसार का भी जिम्मा है.

उद्धव ने इसलिए आदित्य ठाकरे को चुनावी मैदान में उतारा
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शिवसेना की कमान भले ही उद्धव ठाकरे के पास हो, लेकिन उद्धव की पकड़ शिवसेना और महाराष्ट्र पर उस तरह नहीं है जैसे कि बाल ठाकरे की हुआ करती थी. इसका एक बड़ा कारण राज ठाकरे का पार्टी से बाहर जाना भी माना जाता है. कुछ लोगों का तो यहां तक मानना है कि राज ठाकरे की राजनीति की शैली बाल ठाकरे से ज्यादा मिलती है.

आदित्य के चेहरे पर मांगा जाएगा वोट
ऐसे में पार्टी के कुछ नेताओं को उम्मीद है कि आदित्य ठाकरे के चुनावी राजनीति में आने से पार्टी पर ठाकरे परिवार की पकड़ और मजबूत होगी क्योंकि अब आदित्य के चेहरे पर वोट मांगा जाएगा और उनके चुनावी राजनीति में आने से यह संदेश देना आसान होगा कि सरकार भले ही भाजपा की हो लेकिन शिवसेना को सत्ता में सम्मानजनक हिस्सेदारी जरूर मिलेगी.

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First published: October 11, 2019, 8:43 PM IST
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