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शिवसेना भी नहीं बना पाई सरकार तो क्या होगी महाराष्ट्र में आगे की राह?

News18Hindi
Updated: November 11, 2019, 8:28 AM IST
शिवसेना भी नहीं बना पाई सरकार तो क्या होगी महाराष्ट्र में आगे की राह?
राज्‍यपाल भगत सिंह कोश्‍यारी के पास हैं कुछ विकल्‍प.

राज्यपाल नियमों के अनुसार दलों को सरकार बनाने का मौका दे रहे हैं. उनके पास राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने में विलंब का विकल्प है. लेकिन तबतक कोई शपथ नहीं ले पाएगा. इसका मतलब यह भी नहीं हुआ कि फिर से चुनाव होंगे.

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  • Last Updated: November 11, 2019, 8:28 AM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में सरकार गठन को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना (Shiv Sena) में चल रहे गतिरोध के बीच राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari) ने सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी को सरकार बनाने के लिए न्योता दिया था. हालांकि रविवार को बीजेपी ने सरकार बनाने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि हमारे पास बहुमत नहीं है. अब राज्यपाल ने शिवसेना को सरकार गठन के लिए न्योता दिया है और सोमवार शाम 7.30 बजे मिलने का समय दिया है.

इससे पहले शुक्रवार को सीएम देवेंद्र फडणवीस ने राज्यपाल से मुलाकात कर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. फिलहाल वे राज्य के कार्यवाहक मुख्यमंत्री हैं. फडणवीस के इस्तीफे के एक दिन बाद राज्यपाल ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी बीजेपी को सरकार गठन के लिए न्योता दिया था.

प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद रविवार को कहा, 'हम सरकार नहीं बना रहे हैं क्योंकि हमारे पास बहुमत नहीं है. हम राज्य में अकेले सरकार नहीं बना सकते. पाटिल ने कहा कि हमें (बीजेपी-शिवसेना) एक साथ काम करने के लिए जनादेश मिला था. अगर शिवसेना इसका अनादर करना चाहती है और कांग्रेस-एनसीपी के साथ सरकार बनाना चाहती है, तो हमारी शुभकामनाएं उनके साथ हैं.'

अब आगे क्या?

ऐसी स्थितियों में राज्यापाल की भूमिका अहम हो जाती है. राज्यपाल नियमों के अनुसार दलों को सरकार बनाने का मौका दे रहे हैं. उनके पास राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने में विलंब का विकल्प है. लेकिन तबतक कोई शपथ नहीं ले पाएगा. इसका मतलब यह भी नहीं हुआ कि फिर से चुनाव होंगे. राज्यपाल के पास बहुत विकल्प पड़े हैं, जिनपर वे विचार कर सकते हैं.

राज्यपाल ने सबसे बड़े दल को सरकार बनाने का न्योता दिया था, बहुमत न होने के कारण इससे वे इनकार कर चुके हैं. अब उन्होंने दूसरे सबसे बड़े दल को न्योता दिया है. बीजेपी-शिवसेना के चुनाव पूर्व गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिला है लेकिन आपसी खींचतान के कारण वे सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किए. ऐसे में राज्यपाल इस विकल्प का इस्तेमाल नहीं केरेंगे.

इसीलिए सबसे बड़ी पार्टी के मना करने के बाद दूसरे सबसे बड़े दल (शिवसेना) को राज्यपाल ने न्योता दिया है. अगर शिवसेना सरकार का गठन नहीं कर पाई तो राज्यपाल सबसे आखिर में चुनाव बाद अगर कोई गठबंधन होता है, उसे सरकार बनाने के लिए बुलाएंगे. इसके बाद भी अगर राज्य में सरकार का गठन नहीं हो पाया तो राज्यपाल एक विस्तृत रिपोर्ट केंद्र को भेजेंगे, जिसमें राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश होगी.
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First published: November 11, 2019, 8:28 AM IST
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