महाराष्ट्र की राजनीति में दो शब्दों का बोलबाला, बोलते ही जाता है हाईकमान को फोन

अगर किसी कांग्रेसी या एनसीपी नेता ने अपने स्टॉफ या साथी नेता को ये शब्द बोल दे तो लोग उस नेता की तरफ देखने लगते हैं और इसकी सूचना तुरंत हाई कमान को दी जाती है.

Abhishek Pandey | News18Hindi
Updated: July 30, 2019, 1:54 PM IST
महाराष्ट्र की राजनीति में दो शब्दों का बोलबाला, बोलते ही जाता है हाईकमान को फोन
इन दो शब्दों से बीजेपी और शिवसेना निश्चिंत है क्योंकि इससे उनको सिर्फ लाभ होना है. (फाइल फोटो)
Abhishek Pandey | News18Hindi
Updated: July 30, 2019, 1:54 PM IST
'कुठे चाललो' और 'मी चाललो'. मराठी के ये दोनों शब्द इन दिनों महाराष्ट्र की राजनीति में खूब प्रचलन में हैं. इन शब्दों का उपयोग कांग्रेस और एनसीपी के मुख्यालयों में धड़ल्ले से हो रहा है. इन दिनों महाराष्ट्र की सियासत में जिस तरीके से एनसीपी और कांग्रेस के नेता बीजेपी और शिवसेना का दामन थाम रहे हैं, उस परिपेक्ष्य में मराठी के इन दोनों शब्दों का खूब इस्तेमाल हो रहा है.

वैसे 'कुठे चाललो' का शाब्दिक मतलब होता है- कहां चले. लेकिन जिस तरीके से कांग्रेस और एनसीपी के नेता पाला बदल रहे हैं, इस मराठी शब्द का मतलब ही बदल गया है. सुबह तक पार्टी के कार्यक्रम में शामिल रहे नेता दोपहर तक पार्टी छोड़ बीजेपी या शिवसेना में शामिल हो जा रहे हैं.

ये शब्द बोलते ही पहुंच जाता है हाई कमान को फोन
डर ये है कि अगर किसी कांग्रेसी या एनसीपी के नेता ने अपने ऑफिस से निकलते समय अपने स्टॉफ या साथी नेता को मराठी में यह कह दे कि 'मी चालले' तो लोग उस नेता की तरफ देखने लगते हैं और इसकी सूचना तुरंत हाई कमान को दी जाती है.

'मी चाललो' का शाब्दिक अर्थ है कि मैं चला, लेकिन महाराष्ट्र की सियासत में इसका अर्थ लोग पार्टी छोड़ दूसरी पार्टी में शामिल होने से जोड़ने लगे हैं. कांग्रेस-एनसीपी के नेताओं के बीच भरोसा खत्म हो रहा है. तभी शायद मी चालले बोलते ही दूसरे नेता या कार्यकर्ता अपने ही नेता से कहने लगते हैं कि- कुठे चालले?

लोकसभा चुनाव से अबतक कई नेता बदल चुके हैं पाला
दरअसल पिछले लोकसभा चुनावों से लेकर अब तक लगातार कांग्रेस-एनसीपी के दिग्गज नेता बीजेपी और शिवसेना का दामन थाम रहे हैं. लोकसभा के समय में एनसीपी से डॉ भारती पवार, रणजीत सिंह मोहिते पाटिल, रणजीत सिंह नाइक निंबालकर और कांग्रेस के सुजय विखे पाटिल बीजेपी का दामन थाम लिए, तो वहीं विधानसभा की सुगबुगाहट को देखते हुए कांग्रेस के दिग्गज नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल बीजेपी में शामिल होकर मंत्री बन गए. वहीं एनसीपी छोड़ शिवसेना में शामिल जयदत्त क्षीरसागर भी शिवसेना कोटे से कैबिनेट मंत्री हो गए.
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एनसीपी प्रमुख शरद पवार को एक समय देश की राजनीति का चाणक्य कहा जाता था. (फाइल फोटो)


ये नेता भी पार्टी का छोड़ सकते हैं दामन
एनसीपी के मुंबई अध्यक्ष सचिन अहीर ने शिवसेना जॉइन कर लिया तो एनसीपी की महिला प्रदेश अध्यक्ष चित्रा वाघ बीजेपी में शामिल हो रही हैं. एनसीपी के एमएलसी अवधूत तटकरे बीजेपी में शामिल हो सकते हैं, तो कांग्रेस के मलाड से विधायक असलम शेख के जल्दी ही शिवसेना में शामिल होने की खबर है. एनसीपी के बड़े नेता मधुकर पिचड़ के बेटे और अहमद नगर की अकोले विधानसभा सीट से विधायक वैभव पीचड़ के बीजेपी में शामिल होने की खबर है.

विधायक से लेकर पार्षद तक पाला बदलने की फिराक में
इसके अलावा कांग्रेस के वडाला से विधायक कालीदास कोलंबकर बीजेपी में जा रहे हैं और उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है. एनसीपी से भास्कर जाधव जल्द ही बीजेपी में जा सकते हैं. कांग्रेस के दो विधायक जय कुमार गोरे और सुनील केदारे के बीजेपी में शामिल होने की चर्चा है. एनसीपी के समर्थन से उल्हास नगर से विधायक बनी ज्योती कलानी जल्दी ही शिवसेना में शामिल हो सकती हैं. खबर है कि नवी मुंबई महापालिका के 55 पार्षद बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. एनसीपी के 57 पार्षद बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. वहीं एनसीपी के पूर्व मंत्री गणेश नाइक भी बीजेपी में शामिल होने की दहलीज पर हैं.

राजनीति के चाणक्य की नीति फेल
एक समय शरद पवार को पूरे देश की राजनीति का चाणक्य कहा जाता था लेकिन जिस तरीके से उनके गृह प्रदेश में ही उनके लोग साथ छोड़ बीजेपी और शिवसेना में जा रहे हैं, निश्चित ही शरद पवार की रातों की नींद उड़ी हुई है और बीजेपी के उपर ईडी और इनकम टैक्स का डर दिखाकर अपनी पार्टी में नेताओं को शामिल कराने का आरोप लगा रहे हैं.

इतने नेताओं के नाम चर्चा में आने के बाद, अब लोग अपनी ही पार्टी के विधायक के दफ्तर छोड़ने के पहले 'मी चाललो' बोलने पर एक ही आवाज आती है कि 'काय नेते कुठे चाललो?' यानी क्या नेता जी कहा चलें?

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First published: July 30, 2019, 12:15 PM IST
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