महाराष्ट्र के 200 तालुकों में पानी की कमी, प्रभावित क्षेत्रों की घोषणा इसी माह : फडणवीस

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा कि राज्य में करीब 200 तालुकों के लोग पानी की किल्लत का सामना कर रहे हैं और महाराष्ट्र सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों को इस मुद्दे पर एक रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है.

भाषा
Updated: October 10, 2018, 8:35 AM IST
महाराष्ट्र के 200 तालुकों में पानी की कमी, प्रभावित क्षेत्रों की घोषणा इसी माह : फडणवीस
महाराष्ट्र में 200 तालुकों में पानी की कमी: देवेंद्र फडणवीस (image credit: PTI)
भाषा
Updated: October 10, 2018, 8:35 AM IST
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा कि राज्य में करीब 200 तालुकों (तहसीलों) के लोग पानी की किल्लत का सामना कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों को इस मुद्दे पर एक रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है.

मंत्रियों के साथ एक बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा कि राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल और परिवहन मंत्री दिवाकर राउते को उन तालुकों में पानी की कमी की स्थिति की समीक्षा करने तथा एक रिपोर्ट देने का जिम्मा सौंपा गया है.

उन्होंने कहा कि इन तालुकों में पानी की किल्लत होने की घोषणा 31 अक्टूबर तक की जाएगी. उसके बाद एक केंद्रीय टीम दौरा कर स्थिति की समीक्षा करेगी. उसके बाद उन तालुकों के सूखा प्रभावित होने की घोषणा करने के संबंध में फैसला किया जाएगा. उन्होंने कहा कि सूखे की घोषणा करना केंद्र के अधिकार क्षेत्र में है.

ये भी पढ़ें - 


मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्रियों को राज्य के बांधों और जलाशयों में पानी के भंडार का जायजा लेने को कहा गया है. इस बीच कांग्रेस ने 200 तालुकों में पानी की कमी की घोषणा में देरी को लेकर सवाल उठाया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने अहमदनगर जिले में पूछा कि क्या मुख्यमंत्री इसके लिए किसी शुभ दिन की प्रतीक्षा कर रहे हैं?

कांग्रेस की ओर से शुरू की गई जन संघर्ष यात्रा का दूसरा चरण मंगलवार को समाप्त हो गया. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लोग पानी की गंभीर कमी का सामना कर रहे हैं. हर गांव की मांग है कि उसे सूखा घोषित किया जाए. उन्होंने कहा कि राज्य के कई हिस्सों में बिजली की कटौती भी शुरू हो गई है. चव्हाण ने सवाल किया कि सिंचाई के लिए पानी नहीं है, बोरवेल से पानी निकालने के लिए बिजली नहीं है. ऐसे में किसान किस प्रकार बचेंगे?
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर