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OPINION: महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव- एक्जिट पोल के नतीजे सच्‍चाई से दूर नहीं

Jagdish Upasane | News18Hindi
Updated: October 22, 2019, 5:26 PM IST
OPINION: महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव- एक्जिट पोल के नतीजे सच्‍चाई से दूर नहीं
एग्जिट पोल के नतीजों के अनुसार महाराष्ट्र और हरियाणा में बीजेपी सरकार की वापसी होगी.

इन दोनों भाजपा (BJP) शासित सरकारों का 5 साल का पारदर्शी तरीके से चला लोकोन्मुखी कामकाज और पहली बार मुख्यमंत्री बनाए गए देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) तथा मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) की बेदाग, साफ-सुथरी छवि और पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की मजबूत इरादों वाले नेता के बतौर अविच्छिन्न लोकप्रियता- इन दोनों तथ्यों से जीत की संभावना को एक ठोस आधार मिला है.

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  • Last Updated: October 22, 2019, 5:26 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव (Maharashtra and Haryana Assembly Election) के लिए 21 अक्तूबर को हुए मतदान के तुरंत बाद आए एक्जिट पोल उन्हीं नतीजों की ओर इशारा कर रहे हैं जिनकी पुरजोर संभावना व्यक्त की जा रही है.

इन दोनों राज्यों में विपक्ष यानी मुख्यतः कांग्रेस या उससे निकले राष्ट्रवादी कांग्रेस जैसे धड़े मजबूत तथा संगठित होते और राज्यस्तरीय मुद्दों को चुनाव प्रचार में महत्वपूर्ण बना देते तब भी क्या ऐसे परिणामों की संभावना व्यक्त की जाती? बेशक, संभावना ऐसे ही नतीजों की होती.

मोदी के फैसलों ने उन्हें सामान्य लोगों का मुरीद बना रखा है
जिन्हें लगता है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने के फैसले का जनमानस पर असर संसद में इस पर मुहर लग जाने के साथ खत्म हो गया, उनको राष्ट्र की एकता-अखंडता तथा मजहबी आतंकवाद के विरुद्ध आम लोगों की संवेदनशीलता का कोई भान नहीं है. सामान्य लोग अपने देश के लिए अपनी रोजमर्रा की तकलीफों को बाजू रखकर निर्णय करते हैं और मोदी सरकार का केवल यही एक फैसला नहीं है जिसने अधिकतर सामान्य लोगों को प्रधानमंत्री मोदी का मुरीद बना रखा है.

स्वच्छता, सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद करने जैसे आग्रह चुनाव जीतने के लिए नहीं
तीन तलाक के अभिशाप से मुक्ति से लेकर सरकारी/सार्वजनिक धन के गोलमाल या उसकी बंदरबांट करने वालों को कानूनी शिकंजे में लेकर उनसे जनता के पैसे का हिसाब मांगने तथा स्वच्छता, सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद करने या पानी बचाने जैसे सामाजिक मुद्दों के प्रति मोदी के आग्रह जैसे अनगिनत कदम हैं, जिनसे आम लोगों का 2014 में बना यह विश्वास और मजबूत हुआ है कि मोदी यह सब जो करते हैं, वह महज चुनाव जीतने के लिए नहीं करते, बल्कि भारत को हर तरह से एक मजबूत और उन्नत देश बनाने के लिए करते हैं.

चुनावों के संभावित नतीजों पर नहीं दिखा मंदी का कोई असर
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गरीबों, किसानों की तरह समाज के लगभग हर वर्ग ने जान लिया कि प्रधानमंत्री उनके बारे में सिर्फ बातें नहीं करते अपितु उनकी सरकार ने सचमुच उनके लिए कुछ न कुछ किया है और कर भी रही है. जब नेता के इरादों पर कोई संदेह नहीं होता तो लोग कठिनाई बर्दाश्त करके भी उसके साथ खड़े रहते हैं. विद्वान लोग इन चुनावों के ठीक पहले से आर्थिक मंदी की बातें कर रहे हैं. विकास दर कुछ कम भी हुई होगी लेकिन इन चुनावों के संभावित नतीजों पर उसका कोई असर दिखा?

फडणवीस सरकार की शानदार वापसी के कयास क्यों
मुंबई तो देश की आर्थिक राजधानी कहलाती है. ऐसा था तो फडणवीस सरकार की शानदार वापसी के कयास चुनाव विशेषज्ञ किस आधार पर लगा रहे हैं? महाराष्ट्र के पानी की किल्लत तथा किसानों की आत्महत्या वाले मराठवाड़ा और विदर्भ में भाजपा-शिवसेना महायुती की जबरदस्त जीत के अंदाज कैसे? हरियाणा में मनोहर लाल तथाकथित रूप से राजनीति के 'जूनियर', 'बाहरी' (हालांकि वे मूलत: हरियाणा के ही हैं) तथा राज्य की प्रमुख और राजनीति-समाज जीवन में प्रभुत्व रखने वाली जाति के न होने के बाबजूद उसके गढ़ों में भी वे भाजपा का परचम शान से फहराते कैसे दिख रहे हैं?

धूल-धूसरित होते जा रहे हैं ईवीएम की हैकिंग, टेंपरिंग जैसे बहाने
ईवीएम की हैकिंग, टेंपरिंग जैसे सारे बहाने एक-एक कर धूल-धूसरित होते जा रहे हैं फिर भी विपक्ष, खासकर कांग्रेस इस सचाई के लिए आंखें खोलने को तैयार नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी और उनके इन दोनों मुख्यमंत्रियों ने सत्ता तथा राजनीति का 70 साल तक चलाया गया पैटर्न ध्वस्त कर दिया है और वे एक नयी इबारत लिख रहे हैं, जिसके केंद्र में उनके नागरिक हैं.

दोगुना हो गया महाराष्ट्र का सकल घरेलू उत्पाद
हरियाणा के मनोहर लाल की तरह फडणवीस भी अपने राज्य के प्रमुख और प्रभावी जाति वर्ग से नहीं हैं लेकिन मराठों की आरक्षण की मांग मानने वाले वही साबित हुए. उन्होंने राज्य की राजनीति समेत सहकारी क्षेत्र, शिक्षण और बैंकिंग क्षेत्र से सरकारी धन के बल पर परस्पर फायदा पहुंचाने का गहरी जड़ों वाला ढांचा निर्ममता से ध्वस्त कर दिया. पांच साल पहले जो राज्य आर्थिक बदहाली तथा कर्ज के संजाल में बुरी तरह उलझा था वह उससे बाहर आ गया. महाराष्ट्र का सकल घरेलू उत्पाद दोगुना हो गया.

'आपले सरकार' विंडो योजना से सरकार से जुडी हर मांग या शिकायत का किया गया तुरंत निबटारा
सड़कों, बिजली, बंदरगाहों पर युद्धस्तर पर काम हो रहा है. किसानों की बीमा, पेंशन योजना राज्य सरकार ने नये सिरे से तैयार की है. अनगिनत जलयुक्त शिवार (गांव-गांव में छोटे तालाब या पोखर) जनसहयोग से तैयार हुए, मंडी शुल्क (एपीएमसी) खत्म कर दिया गया, बांधों के पानी का प्रोफेशनल ढंग से प्रबंधन किया गया. 'आपले सरकार' विंडो आम-खास लोगों की सरकार से जुडी हर मांग या शिकायत का तुरंत निबटारा करने वाली साबित हुई. सरकारी विभागों के डिजिटलीकरण से पैसे का खेल खत्म हो गया. मुंबई या महाराष्ट्र में पिछले पांच साल में कोई आतंकी वारदात क्यों नहीं हुई? वजह: पुलिसवालों को सब जरूरी सुविधाएं, 1,000 अहम थानों का एक लाइव नेटवर्क, अपराधियों का बायोमिट्रिक डाटा, मुंबई में सीसीटीवी नेटवर्क जैसे कई उपाय.

हरियाणा के लोग अपने मुख्यमंत्री के किसी भाई-बंद को नहीं जानते
हरियाणा में मनोहर लाल ने भी लूट-खसोट और आम लोगों की मजबूरी से फायदा उठाने के पुराने धंधे एकदम से बंद कर दिए. समस्या या शिकायत है तो उसके लिए हर जगह 'सीएम विंडो'! हरियाणा में यह चमत्कार ही था कि 40,000 से ज्यादा छोटी सरकारी नौकरियां हर जाति-वर्ग के युवाओं को घर बैठे मिल जाए और सरकारी कर्मचारियों की भर्ती तथा तबादला ऑनलाइन होने लगे.

मनोहर लाल सरकार ने पांच साल में हर जिले को कुछ न कुछ ऐसा दिया जो उसे पहले देने की किसी सरकार ने नहीं सोची. हरियाणा के लोग अपने मुख्यमंत्री के किसी भाई-बंद को नहीं जानते. लेकिन पांच साल में वे यह जरूर जान गए कि हर हरियाणावासी सचमुच उनका रिश्तेदार है. एक्जिट पोल के आंकडे कम या ज्यादा हो सकते हैं लेकिन यह तय है कि उनकी दिशा यही रहने वाली है. पुराने ढांचे जमींदोज किए बिना समूचा नया निर्माण नहीं हो सकता. महाराष्ट्र और हरियाणा के भाजपा मुख्यमंत्रियों ने यही किया. नतीजतन उनकी झोली भरती दिख रही है.

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First published: October 22, 2019, 1:52 PM IST
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