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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019: दादा ने कहा था 'बजाओ पुंगी', पोते ने 'पहन ली लुंगी'

manoj khandekar | News18Hindi
Updated: October 16, 2019, 10:07 PM IST
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019: दादा ने कहा था 'बजाओ पुंगी', पोते ने 'पहन ली लुंगी'
राजनीतिक शैली से पूरी तरह यू-टर्न लेते हुए ठाकरे परिवार के युवा चेहरे आदित्य ठाकरे लुंगी पहनकर चुनाव प्रचार करते हुए

शिवसेना (Shiv Sena) के संस्थापक बाला साहब ठाकरे (Balasaheb Thackeray) ने 1960 और 70 के दशक में दक्षिण भारतीयों (South Indians) के खिलाफ छेड़े अभियान में 'बचाओ पुंगी, हटाओ लुंगी' का नारा दिया था. अब उनकी तीसरी पीढ़ी के आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) ने मतदाताओं को लुभाने के लिए वर्ली (Worli) विधानसभा क्षेत्र में लुंगी पहन कर चुनाव प्रचार किया.

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  • Last Updated: October 16, 2019, 10:07 PM IST
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नई दिल्ली. राजनीति में फैसले सही या गलत नहीं होते हैं बेटा, उनका मूल तो मकसद पूरा करने के लिए होता है. 'राजनीति' फिल्म में नाना पाटेकर और अजय देवगन के बीच का यह संवाद शिवसेना (Shiv Sena) की मौजूदा राजनीति पर सटीक बैठता है. 'बजाओ पुंगी-हटाओ लुंगी' कैंपेन चलाने वाले बालासाहब ठाकरे (Balasaheb Thackeray) की राजनीतिक शैली से पूरी तरह यू-टर्न लेते हुए उनकी तीसरी पीढ़ी के युवा चेहरे आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) अपने विधानसभा क्षेत्र वर्ली (Worli Assembly Seat) में मतदाताओं को रिझाने के लिए लुंगी पहनकर प्रचार करते हुए नजर आए.

दरअसल, वर्ली विधानसभा क्षेत्र में युवा सेना प्रमुख आदित्य ठाकरे का प्रचार जोर-शोर से चल रहा है. वर्ली में मराठी भाषी के अलावा अन्य भाषा के लोग भी बड़ी संख्या में रहते हैं. ऐसे मतदाताओं तक पहुंचने के लिए आदित्य ठाकरे ने 'सोशल इंजीनियरिंग' का सहारा लिया है. इसी कड़ी में दक्षिण भाषी बाहुल्य इलाके में प्रचार के दौरान आदित्य परंपरागत लुंगी और अंगवस्त्रम पहने हुए नजर आए. इसके बाद से ही सोशल मीडिया पर शिवसेना को बाल ठाकरे के ऐतिहासिक 'बजाओ पुंगी-हटाओ लुंगी' आंदोलन की याद दिलाई जा रही है.

Mumbai: Shiv Sena President Uddhav Thackeray holds the hand of his son and Yuva Sena President Aditya Thackeray, after the former filed his nominations papers from Worli seat for upcoming Maharashtra Assembly elections, in Mumbai, Thursday, Oct. 3, 2019. (PTI Photo/Mitesh Bhuvad)(PTI10_3_2019_000067B)
आदित्य ठाकरे (दायें) वर्ली विधानसभा सीट पर चुनाव प्रचार करते हुए


क्या था 'बजाओ पुंगी-हटाओ लुंगी' आंदोलन

1960 और 70 के दशक में दक्षिण भारत से बड़ी संख्या में लोग अच्छी नौकरी और बेहतर जिंदगी के लिए मुंबई आकर बस गए थे. उस वक्त मराठी मानूस खुद को अलग-थलग महसूस करने लगा था. बाल ठाकरे इसी नब्ज को पकड़ते हुए धरती पुत्र यानी मराठी लोगों की आवाज बन गए. इसकी शुरुआत उन्होंने अपनी पत्रिका 'मार्मिक' के जरिए की थी, जिसमें वह दक्षिण भारत से आकर नौकरी करने वालों के नाम अपनी पत्रिका में छाप दिया करते थे.

इसके बाद तमिल रेस्तरां और फिल्मों के विरोध ने उन्हें मराठियों का सबसे बड़ा नेता बना दिया था. दक्षिण भारतीय विरोध के आधार पर ही उन्होंने 1966 में शिवसेना की स्थापना की थी. अपने 'बजाओ पुंगी-हटाओ लुंगी' के नारे से वह विवादों में भी आए लेकिन बेहद जल्द पूरे देश में उन्हें लोकप्रियता हासिल हो गई थी. इसके बाद से शिवसेना ने ट्रेड यूनियन पर धीरे-धीरे अपना आधिपत्य कायम कर लिया था और उनकी पार्टी मुंबई की आवाज बन गई.

दादा की पृष्ठभूमि और पोते का यू-टर्न
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ठाकरे घराने की राजनीति में आदित्य नित नए अध्याय लिख रहे हैं. वह चुनावी मैदान में उतरने वाले पहले ठाकरे हैं. साथ ही अब पार्टी की छवि बदलने के लिए शिवसेना के बुनियादी मुद्दों से परे एक अलग राह पर चलते हुए नजर आ रहे हैं. उन्होंने वर्ली इलाके में अपने चुनावी अभियान की शुरुआत बहुभाषी होर्डिंग्स के साथ की थी. गुजराती में 'केम छो' के अलावा दक्षिण भारतीय भाषाओं में उनके होर्डिंग्स लगे थे. इसके बाद से ही संकेत मिलने लगे थे कि पोते की युवा सेना अब दादा की शिवसेना से अलग होगी.

शिवसेना के बदलते चेहरे के पीछे चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की रणनीति है


प्रशांत किशोर का अहम रोल...?
महाराष्ट्र की राजनीति पर करीबी नजर रखने वाले लोग बताते हैं कि शिवसेना के बदलते चेहरे के पीछे चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की रणनीति है. दावा किया जा रहा है कि शिवसेना को बहुसांस्कृतिक रूप देने के लिए आदित्य की नई छवि गढ़ी जा रही है. इसके लिए सोशल मीडिया से लेकर होर्डिंग्स और बैनर के अलावा पहनावे तक का सहारा लिया जा रहा है.

वक्त बदलाव का है...?
शिवसेना का चुनावी कैंपेन 'यही वक्त है नए महाराष्ट्र गढ़ने का' की थीम पर किया जा रहा है. इस कैंपेन के तहत ही लग रहा है कि यही वक्त नई शिवसेना गढ़ने का भी है. मराठी अस्मिता के बाद हिंदूवादी पार्टी और अब शिवसेना व्यापक जनाधार हासिल करने के लिए नया चोला ओढ़ने की तरह कदम बढ़ा चुकी है.

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First published: October 16, 2019, 9:15 PM IST
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