महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की तैयारियों में पिछड़ती क्यों दिख रही है कांग्रेस?

केंद्र की सत्ता में जबरदस्त बहुमत के साथ सरकार बना चुकी भारतीय जनता पार्टी महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए प्रत्याशी तलाशने की शुरुआत कर दी है. वहीं, मुख्‍य विपक्षी पार्टी कांग्रेस इस मामले में पिछड़ती नजर आ रही है.

News18Hindi
Updated: June 12, 2019, 4:02 PM IST
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की तैयारियों में पिछड़ती क्यों दिख रही है कांग्रेस?
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की तैयारियों में सिर्फ कांग्रेस ही एक ऐसी पार्टी है जो पीछे छूटती दिख रही है. ( फाइल फोटो )
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Updated: June 12, 2019, 4:02 PM IST
केंद्र की सत्ता में जबरदस्त बहुमत के साथ वापसी करने वाली भारतीय जनता पार्टी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए प्रत्याशी तलाशने की शुरुआत कर दी है. चुनाव अक्टूबर में संभावित हैं, लेकिन बीजेपी ने अभी से ही पूरी गंभीरता से मजबूत प्रत्याशियों की तलाश शुरू कर दी है. वहीं, बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना राज्य के सूखाग्रस्त ग्रामीण इलाकों में वोटर्स को आकर्षित करने के लिए काम करना शुरू कर दिया है.

पिछड़ती कांग्रेस


शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने तो लोकसभा चुनावों से पहले ही महाराष्‍ट्र की जनता के बीच अपनी पैठ बनानी शुरू कर दी थी. इस कवायद में सिर्फ कांग्रेस ही एक ऐसी पार्टी है जो पिछड़ती दिख रही है. लोकसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने अपना इस्तीफा पार्टी शीर्ष नेतृत्व को भेज दिया था. हालांकि, उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है. इस पर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि न ही उन्हें यह पता है कि हाईकमान उनका इस्तीफा स्वीकार करेगा या फिर उन्हें काम करने के लिए कहा जाएगा. ऐसे में विधानसभा चुनाव की तैयारी प्रभावित हो रही है.

गठबंधन पर फोकस

ऐसा नहीं है कि कांग्रेस की तरफ से अभी तक कोई चुनावी मीटिंग नहीं हुई है, लेकिन इसमें फोकस ज्यादातर इस बात पर रहा है कि कैसे वंचित बहुजन अघाड़ी पार्टी को कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन का हिस्सा बनाया जाए. पार्टी ने सुशील कुमार शिंदे की अगुवाई में एक पैनल भी बनाया है जो इस काम को पूरा करवा सके. पार्टी का मानना है कि प्रकाश अंबेडकर की अगुवाई वाली अघाड़ी पार्टी का साथ मिलने से उन्हें राज्य में एकमुश्त दलित वोटों का फायदा हो सकता है. हालांकि, अभी तक इसको लेकर तस्‍वीर साफ नहीं हो सकी है. हालांकि, यह बात गौर करने वाली है कि सुशील कुमार शिंदे खुद दलित वोटों को अपने पक्ष में न करने के कारण लोकसभा चुनाव हार चुके हैं.

कार्यकर्ताओं में निराशा
माना जा रहा कि शीर्ष नेतृत्व की तरफ से विधानसभा चुनावों को लेकर कोई मजबूत रणनीति न होने की वजह से स्थानीय नेताओं में भी मायूसी है. पार्टी लोकसभा चुनावों में बुरी शिकस्त का सामना करना पड़ा है, ऐसे में राज्य में सत्ता हासिल करने की किसी ठोस रणनीति का अभाव चुनाव में बड़ा झटका दे सकता है.
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