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बीजेपी-शिवसेना गठबंधन: मजबूत दोस्ती के बीच दिखती विवाद की लकीरें

Pankaj Kumar | News18Hindi
Updated: October 7, 2019, 8:49 PM IST
बीजेपी-शिवसेना गठबंधन: मजबूत दोस्ती के बीच दिखती विवाद की लकीरें
आरे (Aarey forest) में पेड़ कटाई से लेकर शरद पवार (Sharad Pawar) के खिलाफ ईडी की जांच सहित कई मुद्दों पर बीजेपी को घेरने वाली शिवसेना आक्रामक रूप अख्तियार कर बीजेपी पर कटाक्ष का कोई मौका नहीं चूक रही है.

शिवसेना (Shiv Sena) और बीजेपी (BJP) के बीच गठबंधन को लेकर औपचारिक सहमति बन गई है लेकिन दोनों के बीच रिश्तों में तल्खी से साफ है दोनों पार्टियों के रिश्ते सहज हो नहीं पाए हैं.

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  • Last Updated: October 7, 2019, 8:49 PM IST
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मुंबई. शिवसेना (Shiv Sena) और बीजेपी (BJP) के बीच गठबंधन को लेकर औपचारिक सहमति बन गई है लेकिन दोनों के बीच रिश्तों में तल्खी से साफ है. दोनों पार्टियों के रिश्ते सहज हो नहीं पाए हैं. आरे (Aarey forest) में पेड़ कटाई से लेकर शरद पवार (Sharad Pawar) के खिलाफ ईडी की जांच सहित कई मुद्दों पर बीजेपी को घेरने वाली शिवसेना आक्रामक रूप अख्तियार कर बीजेपी पर कटाक्ष का कोई मौका नहीं चूक रही है.

आरे के बहाने बीजेपी के खिलाफ लगातार हमलावर
एनजीटी और मुंबई हाईकोर्ट के फैसले के बाद मेट्रो की सेवा शुरू करने को लेकर 2647 पेड़ों की कटाई का काम क्या शुरू किया गया, शिवसेना ने कोर्ट सहित प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पर सीधा हमला कर दिया. सामना में लिखे लेख में कहा गया है कि आरे में रातों रात पेड़ काटे गए लेकिन इस पर न तो पीएम को रोना आया और न ही मुख्यमंत्री परेशान हुए. इतना ही नहीं, सामना में यह आरोप भी लगाया कि पेड़ को वोट देने का अधिकार नहीं है तो क्या उनकी हत्या कर देनी चाहिए ? बीजेपी पर वोटबैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया गया है.

सिंगल यूज प्लास्टिक बैन के औचित्य पर भी उठाए सवाल

इससे पहले शिवसेना के 'युवराज' आदित्य ठाकरे ने कई ट्वीट कर पूछा है कि एक तरफ तो केंद्र सरकार प्लास्टिक बैन कर रही है वहीं दूसरी तरफ आरे में बड़ी संख्या में हरे पड़ों की कटाई की जा रही है. आदित्य आरे कॉलोनी में सरकार द्वारा चलाई गई मुहिम के खिलाफ लोगों को प्रदर्शन को समर्थन दे चुके हैं. आलम यह है कि शिवसेना की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी की गिरफ्तारी इस बात का प्रमाण है कि 21 अक्टूबर को महाराष्ट्र भले ही लोकतंत्र का महापर्व मनाएगा लेकिन राज्य की दो प्रमुख पार्टियां मैदान में एक-दूसरे का साथ देने का वादा करने के बावजूद एक-दूसरे पर कड़े तेवर अख्तियार करने में पीछे नहीं हट रहीं.

प्रदेश में गठबंधन के बावजूद दो सीटों पर आमने-सामने होगी शिवसेना और बीजेपी
गठबंधन का औपचारिक ऐलान हो चुका है लेकिन राज्य की दो विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां बीजेपी और शिवसेना एक दूसरे के खिलाफ मैदान में पूरी तैयारी से उतरेंगी. कंकावली और माण सीटों पर शिवसेना ने बीजेपी के कैंडिडेट के खिलाफ अपने उम्मीदवार को मैदान में उतारने का ऐलान कर दिया है. दरअसल कंकावली से नारायण राणे के पुत्र नितेश राणे बीजेपी के टिकट पर उम्मीदवार बनाए गए हैं, वहीं माण से जयकुमार गोरे को टिकट दिया है.

शिवसेना इन दोनों को धूल चटाने के इरादे से अपना कैंडिडेट उतार रही है ताकि दोनों की हार सुनिश्चित हो सके. दरअसल नितेश राणे के पिता साल 2005 से पहले शिवसैनिक थे और उद्धव ठाकरे से हुई अनबन की वजह से उन्हें शिवसेना छोड़कर कांग्रेस की शरण में जाना पड़ा था. कहा जाता है कि दोनों की अदावत पुरानी है, जिसके चलते शिवसेना बीजेपी द्वारा नारायण राणे के पुत्र को टिकट दिए जाने का खुलकर विरोध कर रही है.

वहीं नारायण राणे बीजेपी से राज्यसभा के सदस्य हैं और कोंकण रीजन में बीजेपी को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है. ऐसे में बीजेपी में इस बात को लेकर रोष बढ़ता जा रहा है कि अगर शिवसेना गठबंधन धर्म का पालन नहीं करती है तो बीजेपी भी उनके उम्मीदवारों को हराने के लिए कमर कस लेगी.

नितेश राणे
नितेश राणे


शिवसेना ने साफ कहा कि सरकार में दोनों की भागीदारी होगी समान
उद्धव ने पार्टी के मुखपत्र सामना के जरिए लोगों को बताया है कि शिवसेना और बीजेपी के मंत्रियों की संख्या सरकार में समान होगी. जाहिर है कि शिवसेना कम सीटों पर चुनाव भले लड़ रही हो लेकिन सरकार में अपनी भागीदारी बीजेपी के बराबर ही रखना चाहती है. उद्धव ने सामना के जरिए लोगों के बीच यह संदेश पहुंचाने की कोशिश भी की है. यहां तक कि उद्धव वे सोमवार को बयान दिया कि महाराष्ट्र में एक दिन शिवसैनिक मुख्यमंत्री बनेगा.

ज़ाहिर है शिवसेना ऐसा कर बीजेपी पर लगातार दबाव बनाए रखना चाहती है ताकि बीजेपी अपने किए हुए वायदों से पीछे न हट सके. शरद पवार और राज ठाकरे मामले पर भी शिवसेना का बयान बीजेपी के बिल्कुल विरोध में था. राज ठाकरे मामले पर शिवसेना ने यह कह दिया कि ईडी राज के खिलाफ सबूत जुटाने में कामयाब नहीं हो सकती वहीं शरद पवार को ईडी द्वारा पूछताछ के लिए बुलाए जाने के मसले पर शिवसेना ने इसे राजनीति से प्रेरित बताकर सबको हैरान कर दिया था. जाहिर है शिवसेना और बीजेपी गठबंधन में चुनाव लड़ने का ऐलान भले कर चुकी हैं लेकिन दोनों के बीच का गठबंधन अब भी 'मन'बंधन नहीं बन पाया है.

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First published: October 7, 2019, 8:29 PM IST
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