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महाराष्ट्र चुनाव 2019: कितना कारगर होगा राज ठाकरे का ये नया राग!

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Updated: October 17, 2019, 1:04 PM IST
महाराष्ट्र चुनाव 2019: कितना कारगर होगा राज ठाकरे का ये नया राग!
राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस ने महाराष्ट्र चुनाव में 101 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं (फाइल फोटो)

अभी तक अपने भाषणों में 'मुझे एक बार सत्ता की चाभी देकर देखो, मैं महाराष्ट्र का चित्र बदल दूंगा' की बात करने वाले राज ठाकरे इसपर अपने भाषणों में अब राज्य को एक सक्षम विपक्ष की जरूरत बता रहे हैं.

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  • Last Updated: October 17, 2019, 1:04 PM IST
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नई दिल्ली. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 (Maharashtra Assembly Election 2019) के लिए वोट डाले जाने में अब चंद रोज बचे हैं. सभी पार्टियां जोर-शोर से प्रचार कर रही हैं. बीजेपी (BJP) की तरफ से दिल्ली के नेताओं की फौज महाराष्ट्र (Maharashtra) में प्रचार सभाएं कर रही है. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) यहां नौ तो गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) 20 सभाएं कर रहे हैं, बाकी पार्टियां भी जैसे शिवसेना (Shiv Sena) से उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और उनके बेटे आदित्य राज्य के कोने-कोने में घूमकर अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिशों में लगे हैं. कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी (Rahul Gandhi) उम्मीदवारों के लिए वोट मांगते नजर आ रहे हैं तो एनसीपी के सर्वेसर्वा शरद पवार किसी अन्य नेता से ज्यादा प्रचार, सभा करने का दावा कर रहे हैं. ऐसे में राज ठाकरे (Raj Thackeray) की सभाओं की बात ना हो ये मुमकिन नहीं है.

वर्ष 2006 में शिवसेना से अलग होकर राज ठाकरे ने अपनी नई पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) की स्थपना की, बाला साहेब ठाकरे की परछाई के रूप में देखे जाने वाले राज ने पार्टी से अलग होते ही बाला साहेब के बेटे और बड़े भाई उद्धव के खिलाफ आग उलगना शुरू कर दिया, मराठी माणुस यानी भूमि पुत्रों का मुद्दा उछालकर राज की पार्टी ने युवाओं में नई उम्मीद जगा दी, साल 2009 में इसी मुद्दे पर लड़कर एमएनएस के 13 उम्मीदवार चुनकर आए, शिवसेना के लिए ये एक बड़ा झटका माना जाता है क्योंकि अब मराठी वोटरों के लिए एक नया विकल्प खड़ा हो रहा था पर कामयाबी और राज ठाकरे का साथ ज्यादा दिनों तक नहीं चला. राज उन्हीं मराठी भूमि पुत्रों के लिए नॉट रिचेबल हो गए और यहां से शुरुआत हुई पार्टी के गिरने की. 2014 में राज ठाकरे की पार्टी से सिर्फ एक उम्मीदवार जीता, बाद में उसने भी राज का साथ छोड़कर उद्धव ठाकरे के शिवसेना का दामन थाम लिया.

राज ने साधा कांग्रेस-एनसीपी पर निशाना
अपनी भाषण की शैली के जोर पर राज ठाकरे ने पहले तो कांग्रेस और एनसीपी के बड़े नेताओं पर तोप दागा साथ ही उस समय के गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ कर उनके प्रधानमंत्री के लिए सही विकल्प होने की बात लोगों के सामने रखी. बाद में अपनी बात से यू-टर्न लेकर राज अब नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर तंज कसते नजर आते हैं यहां तक कि 2019 के लोकसभा चुनाव ना लड़ने के बावजूद राज ने बीजेपी सरकार के खिलाफ प्रचार किया. वीडियो कैंपेन के तहत राज ठाकरे ने बीजेपी के किए कामों को एक्सपोज कर काफी सुर्खियां भी बटोरी.

ईवीएम का किया विरोध
राज ठाकरे ने लोकसभा चुनाव के बाद सभी पार्टियों को साथ लाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया, ईवीएम मशीनों में होने वाली गड़बड़ी के चलते राज ठाकरे ने चुनावों पर बहिष्कार तक कर डालने की सलाह सभी को दी. राज ने इसके लिए दिल्ली आकर सोनिया गांधी और कोलकाता में ममता बनर्जी से मुलाकात की पर उनकी दाल ना गली. चुनाव बहिष्कार की बात से सभी ने अपना रास्ता बदल दिया और राज अकेले पड़ गए.

कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन में राज ठाकरे को नो एंट्री !
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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 से पहले राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस के कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन में शामिल होने की चर्चा तेज थी, एनसीपी तो एमएनएस को साथ लेकर चलने के समर्थन में थी पर कांग्रेस को राज का साथ गवारा ना था. मराठी माणुस को लेकर राज का स्टैंड कांग्रेस के लिए अन्य राज्यों में सिरदर्द बन सकता था, इसीलिए गठबंधन में एमएनएस को एंट्री नहीं मिल पाई.

2019 के चुनाव एमएनएस के लिए अस्तित्व की लड़ाई !
पैसों की कमी और चुनाव बहिष्कार की बात के बाद राज ठाकरे के सामने विधानसभा चुनाव लड़ने या ना लड़ने का सवाल खड़ा हो रहा था, राज ने लगभग चुनाव ना लड़ने का फैसला कर ही लिया था पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने राज को चुनाव लड़ने पर जोर दिया. जिसके बाद राज ठाकरे ने भी अपना फैसला बदला और राज्य की 288 में से 101 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए.

राज ठाकरे के बदले सुर!
अभी तक अपने भाषणों में 'मुझे एक बार सत्ता की चाभी देकर देखो, मैं महाराष्ट्र का चित्र बदल दूंगा' की बात करने वाले राज ठाकरे इसपर अपने भाषणों में अब राज्य को एक सक्षम विपक्ष की जरूरत बता रहे हैं. राज कहते हैं कि लोगों के मन का आक्रोश सरकार तक पहुंचने के लिए एक मजबूत विरोधी पक्ष होना जरूरी है इसलिए हमे वोट करें. उन्होंने सभी 101 विधानसभा सीटों पर युवा उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी है, जो लोगों की बात सरकार तक पहुंचा सके. आने वाले 24 अक्टूबर को ही पता चलेगा कि अपने भाषणों से हजारों की भीड़ जुटाने वाले राज ठाकरे का ये नया राग मतों में परिवर्तित होता है या नहीं.

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First published: October 17, 2019, 12:35 PM IST
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