महाराष्ट्र: कोर्ट ने तबलीगी जमात के 28 सदस्यों को रिहा करने का दिया आदेश
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महाराष्ट्र: कोर्ट ने तबलीगी जमात के 28 सदस्यों को रिहा करने का दिया आदेश
कोर्ट ने तबलीगी जमात के 28 सदस्यों को रिहा करने का दिया आदेश (फाइल फोटो)

पिछले सप्ताह बंबई हाईकोर्ट (Bombay High Court) की औरंगाबाद पीठ ने दिल्ली के कार्यक्रम के बाद महाराष्ट्र आने वाले 29 विदेशी नागरिकों के खिलाफ दर्ज ऐसी ही प्राथमिकियों को निरस्त कर दिया था.

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ठाणे. महाराष्ट्र (Maharashtra) के ठाणे की मजिस्ट्रेट अदालत ने दो अलग-अलग मामलों में 21 विदेशी नागरिकों समेत तबलीगी जमात (Tabligi Jamaat) के 28 सदस्यों को रिहा करने का आदेश दिया. इन लोगों के खिलाफ मार्च में दिल्ली हुए तबलीगी जमात के कार्यक्रम के बाद मामले दर्ज किए गए थे. विदेशी नागरिकों पर वीजा नियमों के उल्लंघन के साथ-साथ कोरोना वायरस प्रकोप के बाद जारी किए गए दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का आरोप था.

पिछले सप्ताह बंबई हाईकोर्ट (Bombay High Court) की औरंगाबाद पीठ ने दिल्ली के कार्यक्रम के बाद महाराष्ट्र आने वाले 29 विदेशी नागरिकों के खिलाफ दर्ज ऐसी ही प्राथमिकियों को निरस्त कर दिया था. मजिस्ट्रेट आर एच झा ने मंगलवार को उच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि तबलीगी जमात के 28 सदस्य अपने खिलाफ दर्ज मामलों से मुक्त होने के हकदार हैं. बचाव पक्ष के वकील इस्माइल शेख ने कहा कि आरोपियों में 13 बांग्लादेशी, आठ मलेशियाई, चार भारतीय और मुंब्रा में विदेशी नागरिकों के ठहराव के दौरान उनकी मदद करने वाले चार लोग शामिल हैं.

हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने के दिए थे आदेश



बता दें कि इसी महीने 22 अगस्त को बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay Highcourt) ने तब्लीगी जमात (Tablighi Jamaat) के 29 विदेशी सदस्यों को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी को रद्द कर दिया था. इन 29 विदेशी लोगों पर भारतीय दंड संहिता (IPC), महामारी रोग अधिनियम, महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, विदेशी नागरिक अधिनियम और आपदा प्रबंधन अधिनियम के अलग-अलग प्रावधानों के तहत एक एफआईआर दर्ज की गई थी और इसमें कहा गया गया था कि उन्होंने टूरिस्ट वीजा का उल्लंघन किया. ये सभी लोग राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित निजामुद्दीन के तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए थे और इसी आरोप में इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी.
हाईकोर्ट की औरंगबाद बेंच के जस्टिस टीवी नलवाड़े और जस्टिस एमजी सेवलिकर की खंडपीठ ने तीन अलग-अलग पीटिशन की सुनवाई की, जिसे आइवरी कोस्ट, घाना, तंजानिया, बेनिन और इंडोनेशिया जैसे देशों के लोगों ने दायर की थी. इन सभी याचिकाकर्ताओं को पुलिस ने कथित तौर पर गुप्त सूचना के आधार पर अलग-अलग मस्जिदों में रहने और लॉकडाउन के आदेशों का उल्लंघन करते हुए नमाज अदा करने के आरोप में मामला दर्ज किया था.
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