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राज ठाकरे से नहीं मिले फडणवीस, बोले- BJP और MNS का वैचारिक मेल नहीं
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Updated: January 10, 2020, 8:29 AM IST
राज ठाकरे से नहीं मिले फडणवीस, बोले- BJP और MNS का वैचारिक मेल नहीं
देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया में आ रही राज ठाकरे के साथ मुलाकात की खबरों से इनकार किया है (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने कहा कि उनकी पार्टी और एमएनएस (MNS) का कोई वैचारिक मेल नहीं है. उन्होंने कहा, ‘मैं एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeary) से नहीं मिला और उनके साथ हाथ मिलाने की अभी कोई योजना नहीं है’

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  • Last Updated: January 10, 2020, 8:29 AM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे (Raj Thackeray) से मुलाकात की बात से इनकार किया है. फडणवीस ने कहा कि उनके साथ हाथ मिलाने की अभी कोई योजना नहीं है. विधानसभा में विपक्ष के नेता फडणवीस ने कहा कि उनकी पार्टी और एमएनएस का कोई वैचारिक मेल नहीं है. गुरुवार को उन्होंने मुंबई में एक कार्यक्रम में कहा, ‘मैं एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे से नहीं मिला और उनके साथ हाथ मिलाने की अभी कोई योजना नहीं है.’ उन्होंने कहा कि बीजेपी, एक राष्ट्रीय पार्टी के रूप में विभिन्न (क्षेत्रीय) संगठनों के साथ काम करने के पक्ष में है. हम भविष्य में इस पर विचार करेंगे.






मीडिया में दोनों नेताओं की मुलाकात की आई थी खबर

दरअसल गुरुवार को मीडिया के एक वर्ग में दावा किया गया था कि देवेंद्र फडणवीस ने हाल में (मंगलवार) राज ठाकरे से मुलाकात की है. इस दौरान दोनों के बीच राज्य में शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के गठबंधन वाली महा विकास अघाडी सरकार से मुकाबले के लिए एक संभावित समझौते पर चर्चा हुई है. दोनों नेताओं (देवेंद्र फडणवीस और राज ठाकरे) की मुलाकात की खबर आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल शुरू हो गई थी. कयास लगाए जाने लगे थे कि शिवसेना से गठबंधन खत्म होने के बाद बीजेपी एमएनएस से हाथ मिला सकती है.

बता दें कि राज ठाकरे ने लोकसभा चुनाव 2019 और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 के दौरान बीजेपी के खिलाफ जमकर प्रचार किया था. हालांकि विधानसभा चुनाव के नतीजों में एमएनएस का प्रदर्शन बहुत खराब रहा था और पार्टी को महज एक सीट पर जीत नसीब हुई थी. वहीं बीजेपी 105 सीटें हासिल कर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी. उस समय उसकी सहयोगी रही शिवसेना को 56 सीटें आई थीं. लेकिन मुख्यमंत्री पद और 50-50 फॉर्मूले के तहत सरकार गठन को लेकर शिवसेना की बीजेपी से ठन गई थी. इसके बाद शिवसेना ने बीजेपी से अपना तीस साल पुराना गठबंधन खत्म कर एनसीपी और कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया था. इन तीनों पार्टियों ने महा विकास अघाडी नाम से गठबंधन बनाकर राज्य में बहुमत वाली सरकार बनाई थी.

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First published: January 10, 2020, 8:27 AM IST
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