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महाराष्ट्र: शिवसेना को समर्थन देने पर कांग्रेस में घमासान, देवड़ा और निरुपम आमने-सामने

News18Hindi
Updated: November 10, 2019, 3:49 PM IST
महाराष्ट्र: शिवसेना को समर्थन देने पर कांग्रेस में घमासान, देवड़ा और निरुपम आमने-सामने
महाराष्ट्र में बदले राजनीतिक हालात पर शिवसेना को समर्थन देने के मुद्दे पर एनसीपी और कांग्रेस के समर्थन को लेकर विवाद पैदा हो गया है.

महाराष्ट्र (Maharashtra) में मचे सियासी घमासान के बीच शिवसेना (Shiv Sena) को समर्थन देने के मसले पर कांग्रेस दो खेमों में बंटती दिख रही है.

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  • Last Updated: November 10, 2019, 3:49 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में बदले राजनीतिक हालात में शिवसेना (Shiv Sena) को समर्थन देने के मुद्दे पर कांग्रेस (Congress) में विवाद पैदा हो गया है. मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा (Milind Deora) और कांग्रेस नेता संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) के ट्वीट ने साफ कर दिया है कि शिवसेना को समर्थन देने के मसले पर कांग्रेस दो खेमों में बंट चुकी है. दूसरी तरफ, देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के आवास (वर्षा) पर प्रदेश बीजेपी (BJP) कोर ग्रुप की बैठक हुई है. इसमें शामिल होने के लिए बीजेपी (BJP) के कई बड़े नेता सीएम आवास पर पहुंचे. वहीं, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे भी अपने विधायकों के साथ बैठक कर रहे हैं.

महाराष्ट्र कांग्रेस में शिवसेना को समर्थन देने को लेकर अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं. कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहा, 'हमारे पास विधायकों की संख्या 144 से कम है तो हमे शिवसेना का समर्थन लेना होगा. ये बस एक कल्पना ही है जो सच नहीं हो सकती, क्योंकि कांग्रेस का शिवसेना के साथ जाना एक घाटे का निर्णय साबित होगा. इससे कांग्रेस पार्टी को भारी नुकसान होगा. ये कोई व्यक्तिगत मसला नहीं है. शिवसेना और कांग्रेस अलग-अलग विचारधारा की पार्टियां हैं. बहुत सारे मुद्दे हैं, जिनमें कांग्रेस और शिवसेना में बड़े मतभेद हैं.'

इससे पहले संजय निरुपम ने ट्वीट कर भी साफ कर दिया था कि कांग्रेस को शिवसेना का समर्थन देना एक विनाशकारी कदम साबित होगा. संजय निरुपम ने अपने ट्वीट में लिखा, 'महाराष्ट्र के मौजूदा राजनीतिक अंकगणित में कांग्रेस-एनसीपी के लिए सरकार बनाना असंभव है. उसके लिए हमें शिवसेना चाहिए और हमें किसी भी परिस्थिति में शिवसेना के साथ सत्ता में भागीदारी करने के बारे में नहीं सोचना चाहिए. यह पार्टी के लिए विनाशकारी कदम साबित होगा.'

संजय निरुपम ने पार्टी ने पहले भी मुंबई कांग्रेस और एआईसीसी महासचिव मल्लिकार्जुन खड़गे पर निशाना साध चुके हैं
संजय निरुपम ने पार्टी ने पहले भी मुंबई कांग्रेस और एआईसीसी महासचिव मल्लिकार्जुन खड़गे पर निशाना साध चुके हैं.


मिलिंद देवड़ा पर पलटवार
संजय निरुपम का यह ट्वीट मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा के उस ट्वीट के ठीक बाद आया है, जिसमें देवड़ा ने कहा था कि राज्यपाल को एनसीपी-कांग्रेस को सरकार बनाने का न्योता भेजना चाहिए. मिलिंद देवड़ा ने रविवार को अपने ट्वीट में लिखा, 'राज्य में बीजेपी-शिवसेना के बाद एनसीपी-कांग्रेस का गठबंधन दूसरा सबसे बड़ा गठबंधन है. बीजेपी-शिवसेना मिलकर सरकार नहीं बना रही है तो हमें मौका मिलना चाहिए.'

संजय निरुपम ने उठाए सवाल
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बता दें कि हॉर्स ट्रेडिंग के डर से कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को जयपुर भेज रखा है. ऐसा कहा जा रहा है कि एनसीपी-शिवसेना गठबंधन को कांग्रेस बाहर से समर्थन दे सकती है. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Mumbai Assembly Elections) से पहले मुंबई कांग्रेस (Mumbai Congress) में अंदरूनी कलह की वजह से पार्टी शहर में केवल चार सीटें ही जीत पाई हैं, जो वर्ष 2014 की तुलना में एक कम है. कांग्रेस ने मुंबई की 29 सीटों पर चुनाव लड़ा था. कांग्रेस के उम्मीदवार असलम शेख (मलाड पश्चिम), वर्षा गायकवाड़ (धारावी) और अमीन पटेल (मुम्बादेवी) अपनी सीट बचा पाए, जबकि पार्टी उम्मीदवार ज़ीशान सिद्दीकी ने शिवसेना से बांद्रा पूर्व सीट छीन ली. मुंबई कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नसीम खान चांदीवली सीट पर 409 वोटों से हार गए.

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साल 2014 में, कांग्रेस ने मुंबई में पांच सीटें जीती थीं.


मुंबई में पिछड़ रही कांग्रेस
साल 2014 में कांग्रेस ने मुंबई में पांच सीटें जीती थीं, तब उसने 36 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. वडाला से जीतने वाले उसके मौजूदा विधायक कालिदास कोलम्बकर कुछ महीने पहले भाजपा में शामिल हो गए थे और भगवा दल के टिकट पर वह इस सीट से फिर से निर्वाचित हो गए हैं. चुनाव से पहले मुंबई कांग्रेस के नेताओं में फूट और वाक युद्ध चला जिससे कांग्रेस की संभावनाओं पर असर पड़ा. मुंबई कांग्रेस के पूर्व नेता संजय निरुपम टिकट बंटवारे से नाराज होकर प्रचार अभियान से दूर हो गए थे. उन्होंने खुले तौर पर पार्टी नेतृत्व पर हमला किया था और इसके लिए केंद्रीय नेतृत्व से फटकार भी पड़ी थी.

संजय निरुपम ने पहले भी मुंबई कांग्रेस और एआईसीसी महासचिव मल्लिकार्जुन खड़गे पर निशाना साध चुके हैं. उन्होंने कहा था, ‘पार्टी में जवाबदेही तय की जानी चाहिए. मुंबई में सीटों के लिए उम्मीदवारों को किसने चुना और उन्हें जिताने के लिए क्या प्रयास किए गए?’

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First published: November 10, 2019, 2:54 PM IST
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