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महाराष्ट्र: फ्लोर टेस्ट की तारीख देने के लिए मजबूर नहीं है गवर्नर, विपक्षी दलों को उठाने होंगे ये कदम

Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: November 23, 2019, 7:50 PM IST
महाराष्ट्र: फ्लोर टेस्ट की तारीख देने के लिए मजबूर नहीं है गवर्नर, विपक्षी दलों को उठाने होंगे ये कदम
महाराष्ट्र के राज्यपाल के फैसले पर संविधान विशेषज्ञों ने अपनी-अपनी राय रखी है.

संविधान विशेषज्ञ (Constitutional Experts) और लोकसभा (Lok Sabha) के पूर्व महासचिव सीके जैन (C K Jain) न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, 'राज्यपाल अमूमन तीन से 10 दिन के भीतर बहुमत साबित करने के लिए वक्त दे देते हैं. यह एक आदर्श स्थिति है, लेकिन संविधान में ऐसा स्पष्ट नहीं लिखा गया है कि राज्यपाल को एक बहुमत साबित करने के लिए एक निश्चित अवधि के दौरान ही वक्त देना होता है.'

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  • Last Updated: November 23, 2019, 7:50 PM IST
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नई दिल्ली. महाराष्ट्र (Maharashtra) में ताजा राजनीतिक घटनाक्रम के बाद राज्यपाल (Governor) की भूमिका को लेकर तरह-तरह के सवाल किए जा रहे हैं. महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari) ने शनिवार सुबह बीजेपी (BJP) नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) को मुख्यमंत्री (CM) पद की शपथ दिलाई. एनसीपी (NCP) नेता अजित पवार (Ajit Pawar) को उप मुख्यमंत्री (Deputy CM) पद के लिए शपथ दिला दी गई. लेकिन, इस फैसले को लेकर विपक्षी पार्टियों ने सवाल उठाए हैं. कांग्रेस (Congress), शिवसेना (Shiv Sena) और एनसीपी नेता शरद पवार (Sharad Pawar) ने राज्यपाल के इस फैसले को संविधान के अतंगर्त नहीं माना है.

क्या कहते हैं संविधान विशेषज्ञ
राज्यपाल के इस फैसले पर संविधान विशेषज्ञों ने अपनी-अपनी राय रखी है. देश के जाने-माने संविधान विशेषज्ञ (Constitutional Experts) और लोकसभा (Lok Sabha) के पूर्व महासचिव सीके जैन (C K Jain) न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, 'राज्यपाल अमूमन तीन से 10 दिन के भीतर बहुमत साबित करने के लिए वक्त दे देते हैं. यह एक आदर्श स्थिति है, लेकिन संविधान में ऐसा स्पष्ट नहीं लिखा गया है कि राज्यपाल को एक बहुमत साबित करने के लिए एक निश्चित अवधि के दौरान ही वक्त देना होता है. यह राज्यपाल का विशेषाधिकार और स्वविवेक है कि वह 3 दिन का समय दे या फिर उससे ज्यादा का. महाराष्ट्र में अगर राज्यपाल ने फ्लोर टेस्ट के लिए समय नहीं दिया है तो विपक्षी पार्टियों को राज्यपाल से मिलकर सदन बुलाने के लिए कहना चाहिए.'

How Maharashtra Political Situation changed in Past 12 Hours-Devendra Fadnavis-Ajit Pawar-NCP
राज्यपाल के फैसले पर विपक्षी पार्टियों ने सवाल उठाए हैं


जैन आगे कहते हैं, 'राज्यपाल के पास ये भी अधिकार है कि वह किसे मुख्यमंत्री नियुक्त करता है. राज्यपाल के विवेक पर निर्भर करता है वह जैसे भी संतुष्ट हो अगर वह संतुष्ट हैं तो वह मुख्यमंत्री नियुक्त कर सकता है. राज्यपाल द्वारा अपने विवेक से लिया गया फैसले को किसी भी कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती है.'

हालांकि, शिवसेना ने शनिवार को देवेंद्र फडणवीस के महाराष्ट्र के सीएम और अजीत पवार डिप्टी सीएम के रूप में शपथ लेने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. बीजेपी का दावा है कि उनके पास 288 सदस्यीय सदन में 170 विधायकों का समर्थन है.
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बिना कैबिनेट की मंजूरी के हटाया गया राष्ट्रपति शासन
महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन हटाने के लिए कैबिनेट की मंजूरी नहीं ली गई. इसका निर्णय प्रधानमंत्री ने स्वयं लिया. भारत सरकार ( कार्य-संचालन) नियम (THE GOVERNMENT OF INDIA TRANSACTION OF BUSINESS RULES) के मुताबिक संविधान के अनुच्छेद 77 की तीसरी उपधारा के मुताबिक सरकार के कामकाज को बिना बाधा के चलाने के लिए राष्ट्रपति ने कुछ नियम बनाए थे.

राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद द्वारा ये नियम 4 जनवरी, 1961 को लागू किए गए थे. इन्हीं नियमों में 12वें नियम के मुताबिक प्रधानमंत्री (PM) किसी भी मामले या किसी भी वर्ग के मामले में अनुमति दे सकता है या नियमों से प्रस्थान कर सकता है. वह जिस हद तक इसे जरूरी समझता है (उस हद तक नियमों से प्रस्थान कर सकता है). इसी का प्रयोग करते हुए महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन हटाया गया.

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First published: November 23, 2019, 7:40 PM IST
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