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महाराष्ट्र: गेंद फिर से राज्यपाल के पाले में, क्या कहते हैं संविधान के जानकार

Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: November 26, 2019, 7:11 PM IST
महाराष्ट्र: गेंद फिर से राज्यपाल के पाले में, क्या कहते हैं संविधान के जानकार
महाराष्ट्र को लेकर एक बार फिर से राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की भूमिका अहम होने जा रही है.

महाराष्ट्र (Maharashtra) में सत्ता की खींचतान में सीएम देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के इस्तीफे के बाद नया मोड़ आ गया है. अब राज्यपाल (Governor) के बुलाने पर एनसीपी, शिवसेना और कांग्रेस (Shiv Sena-NCP-Congress) की गठबंधन सरकार बना सकती है.

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  • Last Updated: November 26, 2019, 7:11 PM IST
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नई दिल्ली. महाराष्ट्र (Maharashtra) के सीएम देवेंद्र फडणवीस फडणवीस (Devendra Fadnavis) और डिप्टी सीएम अजित पवार (Ajit Pawar) के इस्तीफे के बाद राज्य की ताजा राजनीतिक हालात फिर बदल गए हैं. अब एक बार फिर से राज्यपाल (Governor) भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari) की भूमिका अहम होने जा रही है. ताजा राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अगर शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस (Shiv Sena-NCP-Congress) सरकार बनाने के लिए सामने आती है तो राज्यपाल को उनको बुला सकते हैं.

राज्यपाल के इस फैसले पर संविधान विशेषज्ञों ने अपनी-अपनी राय रखी है. देश के जाने-माने संविधान विशेषज्ञ (Constitutional Experts) और लोकसभा (Lok Sabha) के पूर्व महासचिव सीके जैन (C K Jain) न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, 'सुप्रीम कोर्ट के सोमवार को दिए निर्णय की कोई अहमियत अब नहीं रह गई, हालांकि राज्यपाल चाहे तो कल विधायकों का शपथ करवा सकते हैं. ऐसे जब सरकार ही गिर गई तो बहुमत साबित करने और फ्लोर टेस्ट का कोई महत्व नहीं बचता है. अब जो भी नई सरकार बनेगी उसको सदन में बहुमत साबित करना पड़ेगा. जो भी दल या गठबंधन सरकार बनाने का दावा पेश करेगी राज्यपाल अपने विवेक के आधार पर उसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं.'

महाराष्ट्र की राजनीतिक हालात मंगलवार को एक बार फिर से बदल गए हैं
महाराष्ट्र की राजनीतिक हालात मंगलवार को एक बार फिर से बदल गए हैं


महाराष्ट्र की राजनीतिक हालात मंगलवार को एक बार फिर से बदल गए हैं. राज्यपाल केअगले कदम की फिर से कयास लगाए जा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि महाराष्ट्र की नई सरकार बुधवार शाम तक बहुमत साबित करे. बता दें कि शनिवार सुबह ही बीजेपी नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद और एनसीपी नेता अजित पवार को उप मुख्यमंत्री (Deputy CM) पद की शपथ दिलाई गई थी.

लेकिन, इस फैसले को लेकर विपक्षी पार्टियों ने सवाल खड़े किए और सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. सुप्रीम कोर्ट में इस घटनाक्रम पर लगातार दो दिन रविवार और सोमवार को सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को फैसला सुरक्षित रख लिया था. मंगलवार सुबह सुप्रीम कोर्ट ने देवेंद्र फडणवीस की सरकरा को बुधवार शाम तक बहुमत साबित करने का आदेश दिया. लेकिन, मंगलवार सुबह से ही राज्य की राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदलने लगे. सबसे पहले राज्य के डिप्टी सीएम अजित पवार ने इस्तीफा दिया. पवार के इस्तीफे के कुछ ही देर बात राज्य के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी इस्तीफा दे दिया.

राज्यपाल के इस फैसले पर संविधान विशेषज्ञों ने अपनी-अपनी राय रखी है.


महाराष्ट्र में बदलते राजनीतिक घटनाक्रम पर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विनोद दिवाकर न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, 'देखिए, सुप्रीम कोर्ट के जो निर्णय आए थे वह शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की याचिका के आधार पर थे. इन दलों की याचिका पर ही कोर्ट ने हॉर्स ट्रेडिंग को रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया था. कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए साफ कहा था कि बुधवार शाम पांच बजे तक सभी विधायकों का शपथ हो जाना चाहिए और शपथ के बाद बहुमत परीक्षण हो. कोर्ट ने बहुमत परीक्षण के लिए लाइव टेलिकास्ट और ओपेन बैलेट पेपर से मतदान की भी बात की. क्योंकि,  अब राज्य की राजनीतिक हालात बदल गए हैं. राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति में एक बार फिर से राज्यपाल के पास ही निर्णय लेने का अधिकार है.'
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First published: November 26, 2019, 4:40 PM IST
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