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BJP पर भड़के उद्धव ठाकरे, सामना में लिखा- महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन की धमकी है लोकतंत्र विरोधी

News18India
Updated: November 2, 2019, 1:12 PM IST
BJP पर भड़के उद्धव ठाकरे, सामना में लिखा- महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन की धमकी है लोकतंत्र विरोधी
महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के नतीजे के बाद से ही सत्ता में साझेदारी को लेकर शिवसेना और भाजपा में खींचतान चल रही है.

उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने सामना में लिखा, महाराष्ट्र (Maharashtra) में जो सियासी ड्रामा चल रहा है उसकी जिम्मेदार भाजपा (BJP) है. ठाकरे ने लिखा कि सत्ता से गायब होने वाली भाजपा महाराष्ट्र के नेताओं को जांच एजेंसी (Investigating Agency)का डर दिखा रही है. इसके बाद भी जब उसे कुछ हासिल नहीं हो रहा तो राज्य में राष्ट्रपति शासन (Presidents Rule) लागू करने की धमकी दे रही है.

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  • Last Updated: November 2, 2019, 1:12 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में भाजपा (BJP) और शिवसेना (Shiv Sena) के मुख्यमंत्री (Chief Minister) पद को लेकर चल रहा खींचतान के बीच शिवसेना के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने मुखपत्र 'सामना' (saamna) में संपादकीय (Editorial)लिखा है. ठाकरे ने इसमें भाजपा पर निशाना साधा है. इसमें उन्होंने व्यंग्य भरे लहजे में गठबंधन सहयोगी से पूछा कि क्या राष्ट्रपति की मुहर राज्य में उसके कार्यालय में पड़ी है?

उन्होंने लिखा कि महाराष्ट्र में जो सियासी ड्रामा चल रहा है उसकी जिम्मेदार भाजपा है. ठाकरे ने लिखा कि सत्ता से गायब होने वाली भाजपा महाराष्ट्र के नेताओं को जांच एजेंसी का डर दिखा रही है. इसके बाद भी जब उसे कुछ हासिल नहीं हो रहा तो भाजपा सात नवंबर के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की धमकी दे रही है.

वित्तमंत्री सुधीर मुनगंटीवार के बयान पर जताई आपत्ति
ठाकरे ने लिखा कि वित्तमंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने नई धमकी का शिगूफा छोड़ा है कि सात नवंबर तक सत्ता का पेंच हल न होने पर महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाएगा. ठाकरे ने लिखा कि मुनगंटीवार के इस बयान से समझा जा सकता है कि भाजपा में क्या चल रहा है. ठाकरे ने लिखा कि जब कानून और संविधान के बारे में जानकारी कम होती है तो ऐसा होता ही है.

जनादेश का अपमान है राष्ट्रपति शासन
ठाकरे ने लिखा कि भाजपा सोचती है कि महाराष्ट्र में हमारा शासन नहीं आया तो हम राष्ट्रपति शासन का आपातकाल लाद सकते हैं, लेकिन जनता उनकी इस धमकी को समझती है. ठाकरे ने लिखा कि सुधीर मुनगंटीवार द्वारा दी गई राष्ट्रपति शासन की धमकी लोकतंत्र विरोधी और असंवैधानिक है. ये महाराष्ट्र और विधानसभा चुनाव में मिले जनादेश का अपमान है.

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महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री के पद को लेकर भाजपा और शिवसेना में तल्खी बढ़ती जा रही है. (फाइल फोटो)

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'क्या राष्ट्रपति आपकी जेब में हैं?'
निवर्तमान सरकार में वित्त मंत्री मुंगंतीवार पर हमला बोलते हुए शिवसेना ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति शासन लगाने की 'धमकी' दी है, क्योंकि राजनीतिक समीकरण साधने के लिए जांच एजेंसियों के इस्तेमाल जैसे 'धमकाने वाले हथकंडे' महाराष्ट्र में कारगर नहीं है. शिवसेना ने पार्टी मुखपत्र 'सामना' में सवाल उठाया, 'मुंगंतीवार द्वारा दी गई इस धमकी से आम लोग क्या समझेंगे? इसका मतलब क्या यह है कि भारत के राष्ट्रपति आपकी (भाजपा की) जेब में हैं या राष्ट्रपति की मुहर महाराष्ट्र में भाजपा के दफ्तर में रखी है?'

आठवले को कटघरे में खड़ा किया
ठाकरे ने लेख में रामदास आठवले को कटघरे में खड़ा किया है, लिखा कि संविधान नामक घर में रहनेवाले रामदास आठवले डॉ. आंबेडकर के संविधान का अपमान सहन न करें. उन्होंने लिखा कि सवाल यह नहीं कि महाराष्ट्र में सरकार क्यों नहीं बन रही है ? इसका कारण क्या है यह कौन बताएगा? भाजपा की सरकार ना बनने पर क्या भाजपा महाराष्ट्र की जनता को जिम्मेदार ठहराएगी. इसलिए महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन की धमकी मत दो.

लोकतंत्र की प्रथा और परंपरा हमें पता है
ठाकरे ने अपने लेख में लिखा कि कानून, संविधान और संसदीय लोकतंत्र की प्रथा और परंपरा हमें पता है. कानून और संविधान किसी के गुलाम नहीं हैं. महाराष्ट्र में फिलहाल जो झमेला चल रहा है, उसकी चिंगारी हमने नहीं फेंकी है, जनता ये जानती है.

ठाकरे ने लिखा कि सार्वजनिक जीवन में नैतिकता निचले पायदान पर पहुंच चुकी है. वर्तमान व्यवस्था ऐसी है कि नैतिक कर्तव्य के बारे में राजनीतिज्ञ, पुलिस और अपराधियों में कम-ज्यादा कौन है, ये साबित नहीं किया जा सकता. राष्ट्र के चारों स्तंभों की कमर टूटी हुई दिख रही है और पुलिस महकमा अपने स्वामियों के लिए विधायकों की जोड़-तोड़ करना ही अपना कर्तव्य मान रही है.

धमकियों से महाराष्ट्र में फर्क नहीं पड़ता
ठाकरे ने लिखा कि भाजपा राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की चेतावनी दे रही है. ऐसी धमकियों से महाराष्ट्र को फर्क नहीं पड़ता. राष्ट्रपति शासन लगाने की धमकी देनेवाले पहले सरकार बनाने का दावा तो पेश करें. फिर आगे देखेंगे. राष्ट्रपति संविधान की सर्वोच्च संस्था हैं. वे व्यक्ति नहीं बल्कि देश हैं. देश किसी की जेब में नहीं है.

राउत बोले- राष्ट्रपति शासन निर्वाचित विधायकों के लिए खतरा
राज्य में मची सियासी हलचल के बीच संजय राउत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख, शरद पवार के साथ बैठक कर रहे हैं. सामना के संपादक संजय राउत ने कहा कि अगर किसी राज्य में सरकार बनाने में देरी हो रही है. इस बीच सत्तारूढ़ पार्टी मंत्री का कहता है कि महाराष्ट्र में सरकार नहीं बनी तो राष्ट्रपति शासन लागू हो जाएगा. यह उन विधायकों के लिये खतरा है जो निर्वाचित होकर आये हैं.

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First published: November 2, 2019, 11:29 AM IST
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