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Analysis: लोकतंत्र की मर्यादा को स्थापित करने वाला है सुप्रीम कोर्ट का फैसला

News18Hindi
Updated: November 26, 2019, 12:04 PM IST
Analysis: लोकतंत्र की मर्यादा को स्थापित करने वाला है सुप्रीम कोर्ट का फैसला
महाराष्ट्र को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला लोकतंत्र की मर्यादा को स्थापित करने वाला है

महाराष्ट्र (Maharashtra) को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का फैसला हर तरह से लोकतंत्र की मर्यादा को स्थापित करने वाला है. अदालत ने लोकतंत्र का सम्मान बढ़ाते हुए कहा है कि न्यायपालिका संसदीय प्रक्रिया में दखल नहीं देना चाहता.

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  • Last Updated: November 26, 2019, 12:04 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में चल रहे राजनीतिक उथल-पुथल पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का फैसला हर तरह से लोकतंत्र की मर्यादा को स्थापित करने वाला कहा जा सकता है. हालांकि, जानकारों के मुताबिक ये फैसला वैसा ही है जैसा कर्नाटक में संकट के समय सुप्रीम कोर्ट ने दिया था. यहां प्रोटेम स्पीकर (Protem Speaker) की अध्यक्षता में ही बहुमत परीक्षण की बात विशेष महत्वपूर्ण है. देश की सबसे बड़ी अदालत ने लोकतंत्र का सम्मान बढ़ाते हुए कहा है कि न्यायपालिका संसदीय प्रक्रिया में दखल नहीं देना चाहता. साथ ही अदालत ने तमाम अटकलों को दरकिनार करते हुए साफ कह दिया है कि बहुमत परीक्षण के दौरान जो कुछ भी विधानसभा में हो उसे पूरा देश देख ले. इसके लिए कोर्ट ने लाइव प्रासरण करने का भी निर्देश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले में दूसरी अहम बात ये है कि कोर्ट ने बहुमत परीक्षण से पहले विधानसभा का स्पीकर चुनने की प्रक्रिया में जाने की जरूरत नहीं है. दरअसल विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव अगर होता है तो यह प्रक्रिया गुप्त मतदान के जरिए पूरी की जाती है. जाहिर है इसमें ये पता नहीं चल सकता कि किसने किसे वोट दिया. अटकले थीं कि एक बार गुप्त मतदान के जरिए कुछ विधायकों से क्रास वोटिंग करके दूसरे पक्ष पर दबाव बढ़ाया जा सकता था. इन अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रोटेम स्पीकर के जरिए ही बहुमत परीक्षण करा लिया जाए.

कौन बनाया जाता है प्रोटेम स्पीकर?
यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि प्रोटेम स्पीकर बिना मतदान के उस सदस्य को बनाया जाता है जो सबसे अधिक समय से सदन का सदस्य रहा हो, वरिष्ठ हो. संभव है कि बीजेपी के पक्ष का ही कोई सदस्य इस पद के लिए उपयुक्त हो. फिर भी इसमें गुप्त मतदान जैसी स्थिति नहीं होगी.

ये भी अहम है कि कोर्ट ने विधायकों के खरीद-फरोख्त की अनदेखी नहीं की है. देश की सबसे बड़ी अदालत ने ये भी कहा है कि वो घोड़ा बाजार नहीं बनने देना चाहती. ये टिप्पणी करके कोर्ट ने ये स्थापित करने की कोशिश की है कि अगर इस तरह का कुछ होता है तो वो मूक दर्शक भर की भूमिका में नहीं रहेगी.

लाइव प्रसारण में दिखेगा मतदान
अब रह गई बात कल यानी 27 तारीख शाम 5 बजे का वक्त देने की तो बहुत संभव है कि कोर्ट ने शपथ लेने में लगने वाले समय पर विचार किया हो और शक्ति परीक्षण में लगने वाला समय देखा हो. साथ ही सदन में लाइव प्रसारण के बीच होने वाले मतदान में साफ तौर पर देखा जाएगा कि कौन क्या कर रहा है. सभी राजनीतिक दलों ने कमोबेस इस फैसले का स्वागत किया है.
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इस पूरे प्रकरण में सबसे विवादास्पद एनसीपी नेता के मामले को लेकर चल रहे विवाद पर भले ही अभी तक कोई बात पक्के तौर पर सामने नहीं आ पा रही है. फिर भी जब सदन में लाइव प्रसारण के तहत बहुतम परीक्षण में एनसीपी के विधायक किस तरफ है सभी देख सकेंगे.

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First published: November 26, 2019, 11:55 AM IST
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