लाइव टीवी

मराठी अखबार ने ‘बेताल’ से की राउत की तुलना, कहा- बाला साहेब के सपने को तोड़ने की कोशिश कर रहे

भाषा
Updated: November 4, 2019, 6:47 PM IST
मराठी अखबार ने ‘बेताल’ से की राउत की तुलना, कहा- बाला साहेब के सपने को तोड़ने की कोशिश कर रहे
एक मराठी अखबार ने शिवसेना नेता संजय राउत की तुलना 'बेताल' से की है (फाइल फोटो)

मराठी दैनिक समाचार पत्र (Marathi newspaper) ने संजय राउत (Sanjay Raut) का नाम लिए बगैर उसने उन्हें ‘विदूषक’ बताया और उनकी तुलना ‘बेताल’ (Betal) से की.

  • Share this:
मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में सरकार गठन पर गतिरोध के बीच मराठी दैनिक समाचार पत्र (Marathi newspaper) ने शिवसेना (Shiv Sena) नेता संजय राउत (Sanjay Raut) की तुलना ‘बेताल’ (Betal) से की. माना जाता है कि यह दैनिक समाचार पत्र आरएसएस (RSS) की ओर झुकाव रखता है. सोमवार को दैनिक समाचार पत्र ने संजय राउत की तुलना अपनी पहेलियों से राजा विक्रमादित्य (Raja Vikramaditya) को चुनौती देने वाले पौराणिक पिशाच ‘बेताल’ से की और उन्हें विदूषक बताया.

राउत पर निशाना साधने की कोशिश करते हुए नागपुर के अखबार ‘तरुण भारत’ ने कहा कि वह महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को सत्ता में आने के मौके को नुकसान पहुंचा रहे हैं. अखबार ने कहा कि राज्य में ‘स्थायी सरकार’ होना महत्वपूर्ण है क्योंकि निकट भविष्य में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने की संभावना है.

राउत का नाम लिए बगैर उसने उन्हें ‘विदूषक’ बताया और कहा, ‘उनकी यह तस्वीर पेश करने की कोशिशें कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भाजपा में अलग-थलग है, कुछ नहीं बल्कि बस शुद्ध मनोरंजन है.’

बता दें, शिवसेना के राज्यसभा सदस्य एवं उसके मुखपत्र ‘सामना’ के कार्यकारी संपादक राउत सत्ता के समान बंटवारे और मुख्यमंत्री पद के बंटवारे को लेकर अपनी पार्टी की मांगों को उठाने में सबसे मुखर रहे हैं.

‘उद्धव और बेताल’ नाम से प्रकाशित किया संपादकीय
सोमवार को ‘तरुण भारत’ ने ‘उद्धव और बेताल’ नाम से एक संपादकीय को प्रकाशित किया. ‘बेताल’ शब्द का इस्तेमाल मराठी में भी किया जाता है, जहां उसका मतलब ऐसे व्यक्ति से होता है जो संयमित बातें नहीं करता है. अखबार ने कहा, ‘दिवंगत बालासाहेब ठाकरे ने अपना पूरा जीवन कांग्रेस और एनसीपी को सत्ता से बेदखल करने में बिताया लेकिन यह बेताल उनके सपनों को तोड़ने की कड़ी मशक्कत कर रहा है.’

शिवसेना के भविष्य के बारे में चिंता करने की जरूरत
Loading...

महाभारत का जिक्र करते हुए अखबार ने कहा कि शिवसेना नेता का पहला नाम- संजय इस महाकाव्य का एक किरदार भी था, जिसने नेत्रहीन राजा धृतराष्ट्र को पांडवों और कौरवों के बीच युद्ध का ‘आंखों देखा हाल’ सुनाया था. संपादकीय में व्यंगात्मक लहजा अपनाते हुए कहा गया है, ‘संजय का काम कीमती जानकारियां मुहैया कराना है लेकिन वह खुद आंखें मूंदे बैठे है. इसलिए शिवसेना के भविष्य के बारे में चिंता करने की जरूरत है.’

लोगों ने फैसला किया है कि भाजपा-शिवसेना में बड़ा भाई कौन
संपादकीय में आगे कहा गया है, ‘सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते भाजपा सरकार गठन के लिए हमेशा दावा जता सकती है और उसे दोनों सदनों के अगले सत्र तक विश्वास मत जीतने का समय मिलेगा. जनादेश ‘महायुति’ (भाजपा-शिवसेना गठबंधन) के लिए है और सीटों की संख्या के लिहाज से लोगों ने फैसला किया कि उनमें से कौन बड़ा भाई है.’

अखबार ने कहा कि भाजपा के सरकार गठन के लिए दावा न जताने के पीछे संदेश है क्योंकि पार्टी जनादेश का मतलब जानती है. संपादकीय में हैरानी जताई गई है कि शिवसेना ने 1995-99 में भाजपा के साथ सत्ता में होने के दौरान वरिष्ठ सहयोगी दल होने के नाते उस समय कभी मुख्यमंत्री पद साझा करने के बारे में सोचा था.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए Mumbai से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 4, 2019, 6:47 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...