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...तो तीन साल बाद ही रिहा हो जाता आतंकी अजमल कसाब!
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News18Hindi
Updated: November 26, 2018, 1:37 PM IST
...तो तीन साल बाद ही रिहा हो जाता आतंकी अजमल कसाब!
अजमल कसाब (फाइल फोटो)

जांच अधिकारी अगर पहले से सतर्कता नहीं बरतते तो कसाब को फांसी की सजा नहीं होती और सजा पूरी करने के बाद उसे पाकिस्तान भेजना पड़ता.

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  • Last Updated: November 26, 2018, 1:37 PM IST
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सचिन साल्वे
मुंबई में 26/11 को हुए देश के सबसे बड़े आतंकी हमले में एकमात्र जिंदा पकड़ा गया आतंकी अजमल कसाब सैकड़ों बेगुनाह का खून बहाने के बाद भी तीन साल बाद जेल से रिहा हो जाता. जांच अधिकारी अगर इस बात को लेकर पहले से सतर्कता नहीं बरतते तो कसाब को फांसी की सजा नहीं होती और उसे सजा पूरी करने के बाद पाकिस्तान भेजना पड़ता.

मुंबई हमले को 10 साल पूरे होने पर न्यूज18 से एक्सक्लूसिव बातचीत में जांच अधिकारी रमेश महाले ने यह खुलासा किया. महाले ने बताया कि अजमल कसाब ने 26/11 केस की सुनवाई शुरू होते ही अदालत में सबसे पहले दिए अपने बयान में खुद को नाबालिग बताया था. कसाब ने कहा था कि वह नाबालिग है और उसका केस जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने रखा जाए.

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महाले बताते हैं, 'हम इस बात के लिए पूरी तरह से तैयार थे. इस बात का अहसास पहले से ही था कि कसाब खुद को बचाने के लिए नाबालिग कार्ड खेल सकता है. इस वजह से हमने पहले ही सबूत जुटाकर रखे हुए थे, जिसके चलते कसाब का यह दांव फेल हो गया. यदि वह अपने मंसूबों में कामयाब हो जाता तो उसे तीन साल की सजा होती और फिर उसे पाकिस्तान भेजना पड़ता.'



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महाले 100 सदस्यीय उस टीम का अहम हिस्सा थे, जिस पर कसाब से पूछताछ को लेकर उसे फांसी तक पहुंचाने का जिम्मा था. महाले बताते हैं, 'कसाब पूरे 81 दिन उनके पास था. पहले दो-तीन दिन कसाब ने काफी झूठ बोलने की कोशिश की, लेकिन बाद में उसने सबकुछ कबूल कर लिया.'

और शर्त हार गया कसाब..!
मुंबई पुलिस के इस अफसर ने बताया कि जब आतंकी कसाब को फांसी के लिए ले जाया जा रहा था तब कसाब ने मुझसे कहा, 'महाले सर आप जीत गए और मैं हार गया.’

दरअसल, कसाब महाले से कहता था कि जब भारत की संसद पर हमले के गुनहगार अफजल गुरु को फांसी नहीं दे सके तो मुझे क्या दोगे? इसके बाद जब कसाब को फांसी पर चढ़ाए जाने के लिए मुंबई से पुणे लेकर जाया गया, तब उसने कहा था कि महाले सर आप शर्त जीत गए.

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First published: November 26, 2018, 12:38 PM IST
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