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Mumbai 26/11: 50 साल से कारोबार करने वाला रमजान फिर कभी लौटकर मुंबई नहीं आया
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Updated: November 26, 2018, 3:55 PM IST
Mumbai 26/11: 50 साल से कारोबार करने वाला रमजान फिर कभी लौटकर मुंबई नहीं आया
शकील

10 साल पहले 26 नवंबर को समुद्र के मार्ग से आए आतंकियों के हमले में मुंबई में जगह-जगह खून की नदियां बहने लगी थीं. उनमें से दो आतंकियों ने लियोपार्ड कैफे का रुख किया था. वहां पहुंचते ही दोनों आतंकियों ने AK-47 से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी थी.

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  • Last Updated: November 26, 2018, 3:55 PM IST
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(अक्षय शितोले)

कभी नहीं रुकने वाली मुंबई 26 नवंबर 2008 की रात को थम गई थी. एक रात में सैकड़ों परिवार उजड़ गए, तो कइयों की जिंदगी की राह हमेशा के लिए बदल गई. उन्हीं लोगों में एक है रमजान अली, जो उस रात को हुए हमले को ताउम्र नहीं भूल सकेंगे.

देशी-विदेशी पर्यटकों से हमेशा गुलजार रहने वाले कुलाबा कॉजवे के लेपर्ड कैफे के सामने पान की एक छोटी सी गुमटी लगाने वाले रमजान अली. 55 साल से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ शहर को छोड़कर रोजी-रोटी के मायानगरी का रुख करने वाले रमजान अली की जिंदगी 2008 की उस काली रात के बाद हमेशा के लिए अंधेरा छा गया.

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10 साल पहले 26 नवंबर को समुद्र के मार्ग से आए आतंकियों के हमले में मुंबई में जगह-जगह खून की नदियां बहने लगी थीं. उनमें से दो आतंकियों ने लेपर्ड कैफे का रुख किया था. वहां पहुंचते ही दोनों आतंकियों ने AK-47 से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी थी. कैफे को टारगेट कर की जा रही फायरिंग में एक गोली निशाना चूककर सामने पान की गुमटी पर जाकर लगती है.

रमजान अली को कुछ पलों के लिए तो समझ में ही नहीं आया, फिर चीख-पुकार और आतंकियों का तांडव देखकर वह नजदीक की बिल्डिंग में जाकर छिप गए. करीब दो घंटे बाद बाहर निकले तो जगह-जगह लाशें पड़ी हुई थीं. एक गोली उनकी गुमटी से भी आर-पार हो निकल गई थी. अगर रमजान वहां से निकलने में थोड़ी भी देर कर देते, तो शायद वह भी जिंदा नहीं बचते.


खुद के नाम के बजाए मुंबई शहर के नाम पर भरोसा करने वाले रमजान उस दिन थर-थर कांप रहे थे. उनके मन में पहली बार दहशत और अविश्वास का भाव था. आखिरकार रमजान ने हमेशा के लिए सपनों के शहर को अलविदा कह दिया.

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रमजान अली उस दिन के बाद उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के अपने छोटे से गांव लौट गए. 26/11 की घटना से उन्हें इतना धक्का लगा कि वो कभी भी लौटकर मुंबई नहीं आए. रमजान के लौटने के बाद उनके गांव में रहने वाला शकील ही अब पान की दुकान का मालिक है.

रमजान की दास्तां बताते शकील भी भावुक हो गए. उन्होंने भले ही कहा हो कि डर नहीं लगता, लेकिन उनके चेहरे के भाव सबकुछ बयां कर रहे थे.

शकील की जुबानी रमजान अली की कहानी जानकर पता चलता है कि केवल मुंबई में 10 ठिकानों पर हमला नहीं हुआ था, बल्कि इस हमले ने देशभर में लोगों को ताउम्र के जख्म दिए. कुछ लोग इस हमले से खुद को संभालते हुए जिंदगी की रफ्तार से कदमताल करने की कवायद में जुटे है, तो कुछ जिंदगियां हमेशा के लिए बिखर गई. उनमें एक रमजान भी हैं.

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First published: November 26, 2018, 3:43 PM IST
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