लाइव टीवी
Elec-widget

महाराष्ट्र में कोई नई नहीं है चाचा-भतीजे की लड़ाई, अजित पवार से पहले ये लोग भी कर चुके हैं बगावत

भाषा
Updated: November 25, 2019, 7:10 PM IST
महाराष्ट्र में कोई नई नहीं है चाचा-भतीजे की लड़ाई, अजित पवार से पहले ये लोग भी कर चुके हैं बगावत
महाराष्ट्र में बीजेपी को समर्थन देकर डिप्टी सीएम बन गए अजित पवार

शरद पवार (Sharad Pawar) और अजित पवार (Ajit Pawar) की तरह ठाकरे परिवार में भी लगभग एक दशक पहले विवाद हुआ था. उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच विवाद के चलते शिवसेना (Shiv Sena) दो फाड़ हो गई थी.

  • Share this:
नई दिल्ली. महाराष्ट्र (Maharashtra) में सत्ता को लेकर शरद पवार-अजित पवार (Sharad Pawar-Ajit Pawar) की सियासी लड़ाई को कोई नई नहीं है. इससे पहले भी बाल ठाकरे-राज ठाकरे और गोपीनाथ मुंडे-धनंजय मुंडे के रूप में चाचा-भतीजा आमने-सामने होते रहे हैं. ये इस बात के उदाहरण हैं कि महाराष्ट्र में राजनीतिक परिवारों में चाचा-भतीजे की लड़ाई चलती आई है.

शरद पवार और अजित पवार की लड़ाई के चलते महाराष्ट्र (Maharashtra) के राजनीतिक घटनाक्रम ने एक नया मोड़ ले लिया है. इसके चलते राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में काफी बेचैनी है. महाराष्ट्र में एनसीपी से पहले शिवसेना और बीजेपी भी चाचा-भतीजे की लड़ाई से दो-चार हो चुकी हैं.

पिछले शनिवार को अजित पवार एनसीपी प्रमुख और अपने चाचा शरद पवार के विरुद्ध चले गए और बीजेपी के साथ मिलकर राज्य के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण कर ली. उनकी बगावत और बीजेपी को समर्थन देने के निर्णय ने न सिर्फ एनसीपी को झकझोर कर रख दिया, बल्कि एक-दूसरे से करीब से जुड़े परिवार को भी हिला दिया. अपने भाई अनंत राव की मौत के बाद शरद पवार ने उनके बेटे अजित पवार को अपने संरक्षण में ले लिया था.

राव सरकार में रक्षा मंत्री बने

अजित पवार ने 1991 में पहली बार बारामती से संसदीय चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. शरद पवार जब 1991 में पीवी नरसिंह राव सरकार में रक्षा मंत्री बने तो यह सीट उन्होंने अजित को दे दी. यह महज शुरुआत थी. सात बार विधायक और पूर्व में उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार एनसीपी प्रमुख के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में देखे जाने लगे, लेकिन तनाव तब शुरू हुआ जब शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने राजनीति में प्रवेश किया.

चाचा-भतीजे की लड़ाई में बंटी थी शिवसेना
इसी तरह का विवाद ठाकरे परिवार में भी लगभग एक दशक पहले हुआ था. उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच विवाद के चलते अंतत: शिवसेना दो फाड़ हो गई. बाल ठाकरे ने भतीजे की तुलना में अपने बेटे उद्धव को तवज्जो दी और राज ठाकरे ने नई पार्टी बना ली.
Loading...

पवार-ठाकरे परिवार की तरह मुंडे परिवार में भी हुआ विवाद
वर्ष 2009 में जब ओबीसी नेता गोपीनाथ मुंडे बीड से विजयी हुए तो ज्यादातर लोगों ने सोचा कि विधानसभा चुनाव में वह अपने भतीजे धनंजय मुंडे को उतारेंगे. लेकिन इसकी जगह उन्होंने अपनी बेटी पंकजा मुंडे को परली सीट से मैदान में उतारा. इससे चाचा-भतीजे के बीच मतभेद और गहरा गया और धनंजय मुंडे एनसीपी में शामिल हो गए. बाद में वह विधान परिषद में नेता विपक्ष बने.

गोपीनाथ मुंडे के निधन के बाद पारिवारिक प्रतिद्वंद्विता अक्सर सुर्खियों में आती रही. 2014 में पंकजा मुंडे ने परली से अपने चचेरे भाई को हरा दिया. वहीं, 2019 में धनंजय मुडे ने बाजी पलटते हुए अपनी चचेरी बहन पंकजा को हरा दिया.

महाराष्ट्र में ऐसे और भी उदाहरण हैं. पिछले महीने हुए विधानसभा चुनाव में शिवसेना के जयदत्त क्षीरसागर को उनके भतीजे एवं एनसीपी उम्मीदवार संदीप क्षीरसागर ने बीड सीट से हरा दिया.

यह भी पढ़ें :

संजय राउत ने राज्‍यपाल को बुलाया, कहा- आकर देख लें एकसाथ 162 विधायक

एसीबी ने सिंचाई घोटाले के मामले बंद किए, कहा- ये मामले अजित पवार से जुड़े नहीं

नहीं हो रहा है 'ऑपरेशन लोटस', हमारे पास बहुमत के लिए पर्याप्त MLAs हैं: BJP

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए Mumbai से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 25, 2019, 6:42 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...