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79 साल के मराठा योद्धा ने साबित कर दिया कि वो न रुके हैं न थके हैं और न डरे हैं

Kinshuk Praval | News18Hindi
Updated: November 26, 2019, 5:22 PM IST
79 साल के मराठा योद्धा ने साबित कर दिया कि वो न रुके हैं न थके हैं और न डरे हैं
चाचा शरद पवार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अजित को फोन किया. इसके कुछ देर बाद अजित ने फडणनवीस सरकार से इस्तीफा दे दिया

79 साल के शरद पवार ने 24 घंटों के भीतर महाराष्ट्र की पूरी राजनीति और बीजेपी के शह-मात के खेल को बदल कर रख दिया

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  • Last Updated: November 26, 2019, 5:22 PM IST
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एक दिन सुबह होने के पहले सरकार बनी तो तीन दिन बाद शाम ढलने से पहले सरकार गिर गई. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफे के साथ ही शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस के लिए सरकार बनाने का रास्ता साफ हो गया है. इस पूरे घटनाक्रम में एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार महाराष्ट्र चुनाव के बाद दूसरी बार मराठा योद्धा बनकर उभरे. 79 साल के शरद पवार ने जिस तरह से 24 घंटों के भीतर महाराष्ट्र की पूरी राजनीति और बीजेपी के शह-मात के खेल को बदल कर रख दिया उसने ये साबित कर दिया कि पवार के भीतर अभी राजनीति उसी अंदाज़ में सांस भर रही है जैसे कि युवावस्था में मौजूद हुआ करती थी.

महाराष्ट्र की वो सुबह जब ये खबर फूटी कि अजित पवार ने बीजेपी को समर्थन देकर डिप्टी-सीएम पद की शपथ ले ली है तो एकबारगी शिवसेना और कांग्रेस को लगा कि खेल खत्म हो गया. शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस की सरकार बनाने की सारी संभावनाएं खत्म हो गई थीं. लेकिन शरद पवार ने वहां से नए खेल की शुरुआत की. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि डिप्टी सीएम पद की शपथ अजित पवार का निजी फैसला है और उन्हें इसकी जानकारी नहीं है.

शरद पवार ने अपने भतीजे के फैसले के आगे सरेंडर नहीं किया बल्कि उन्होंने नए सिरे से अचानक आई विपत्ति को काउन्टर करने की रणनीति पर काम किया. उन्होंने सबसे पहले एनसीपी विधायकों को एकजुट करने का काम किया और उन विधायकों को वापस लाए जो कि अजित पवार के साथ चले गए थे. गुरूग्राम से लेकर महाराष्ट्र तक इधर-उधर सुरक्षा में रखे गए विधायकों को ढूंढ निकाला. उन ‘भटके’ हुए विधायकों को वापस अपने पाले में ले आए. लापता हुए 15 विधायक शरद पवार की राजनीतिक कौशल के आगे ज्यादा दिन अजित पवार के साथ रह नहीं सके और उनकी घर वापसी हो गई.


मुंबई के होटल ग्रैंड हयात में हुई 162 विधायकों की परेड ने बीजेपी और अजित पवार के मनोबल को तोड़ने का काम किया. उसके बाद बची-खुची कसर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने पूरी कर दी. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि शक्ति-परीक्षण में गुप्त मतदान नहीं होगा. साथ ही अगले दिन शाम 5 बजे से पहले फ्लोर टेस्ट करने का आदेश सुना दिया. ऐसे में एनसीपी विधायकों को वापस अपने पाले में लाना अजित पवार के लिए मुनसिब नहीं था. ये पवार के 50 साल के राजनीतिक अनुभव का दम था जिसके आगे पहले अजित पवार नतमस्तक हुए और फिर बीजेपी. पहले अजित पवार ने डिप्टी सीएम पद से इस्तीफा दिया तो बाद में देवेंद्र फडणवीस ने. 3 दिन में फडणवीस सरकार गिर गई.

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी मराठा 'टाइगर' कहलाने वाले शरद पवार ने अपने दम पर तूफान से कश्ती निकालने का काम किया था. उनकी पार्टी छोड़कर बड़े-बड़े दिग्गज चले गए थे. सतारा से सांसद रहे छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज उदयन राजे भोंसले का एनसीपी छोड़कर बीजेपी जाना बड़ा झटका था. लेकिन शरद पवार के इरादे उससे टूटे नहीं. वो अपने दम पर सतारा में चुनाव प्रचार करते रहे. उनकी बारिश में भीगते हुए चुनावी रैली करने वाली तस्वीर वायरल हुई. उनकी मेहनत रंग लाई और बीजेपी उम्मीदवार बने उदयन राजे भोंसले की सतारा सीट से उपचुनाव में हार हुई.


खासबात ये है कि ऐन विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और एनसीपी छोड़कर बड़े बड़े दिग्गज बीजेपी और शिवसेना में शामिल हो रहे थे. इससे कांग्रेस का मनोबल गिरा हुआ था. कांग्रेस की तरफ से चुनाव में राहुल गांधी ने सिर्फ 5 ही रैलियां की थीं जबकि सोनिया गांधी और प्रियंका ने एक भी रैली नहीं की थी. जबकि इसके ठीक उलट शरद पवार पूरी ताकत से बीजेपी और शिवसेना के खिलाफ डटे हुए थे और अपने दम पर प्रचार में जुटे हुए थे. उनकी मेहनत रंग लाई और एनसीपी आश्चर्यजनक रूप से 54 सीटें जीतने में कामयाब हुई. जबकि शरद पवार एक तरफ परिवार की अंदरूनी लड़ाई से जूझ रहे थे तो दूसरी तरफ केंद्रीय जांच एजेंसियों के छापों का भी दबाव देख रहे थे. लेकिन उनकी बदौलत जहां अजित पवार बारामती सीट से रिकॉर्ड मतों से चुनाव जीते तो एनसीपी ने रिकॉर्ड छलांग लगाई.

शरद पवार ने एक बार फिर पार्टी छोड़कर जाने वालों को गलत साबित किया. इस बार अजित पवार गलत साबित हुए तो उनसे पहले वो लोग जो बीजेपी-शिवसेना में शामिल हो गए थे. देवेंद्र फडणवीस अपनी रैलियों में कहते थे कि इस बार महाराष्ट्र चुनाव के बाद महाराष्ट्र की राजनीति से पवार युग का अंत होगा लेकिन इस बार पवार ने ही देवेंद्र की मुख्यमंत्री पद की दूसरी पारी पर ग्रहण लगाने का काम किया. एक बार फिर शरद पवार ने ये साबित कर दिया कि न वो रुके हैं और न थके हैं और न ही डरे हैं.

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First published: November 26, 2019, 4:43 PM IST
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