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कैब को शिवसेना के समर्थन पर NCP ने कहा- अलग पार्टियों के हमेशा समान विचार, संभव नहीं

News18Hindi
Updated: December 10, 2019, 7:06 PM IST
कैब को शिवसेना के समर्थन पर NCP ने कहा- अलग पार्टियों के हमेशा समान विचार, संभव नहीं
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि दोनों पार्टिया अलग हैं.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मुख्य प्रवक्ता नवाब मलिक (Nawab Malik) दोनों पार्टिया अलग हैं और उनके लिए हमेशा सभी मुद्दों पर समान विचार रखना संभव नहीं है.

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  • Last Updated: December 10, 2019, 7:06 PM IST
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मुंबई. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने महाराष्ट्र में अपने गठबंधन साझेदार शिवसेना (Shiv Sena) के लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) का समर्थन करने पर मंगलवार को कहा कि दोनों पार्टिया अलग हैं और उनके लिए हमेशा सभी मुद्दों पर समान विचार रखना संभव नहीं है. राकांपा के मुख्य प्रवक्ता नवाब मलिक ने हालांकि कहा कि पार्टियां यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि महाराष्ट्र में किसी के साथ भी धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर भेदभाव न हो. गौरतलब है कि शिवसेना-राकांपा और कांग्रेस महा विकास आघाड़ी गठबंधन सरकार में साझीदार हैं. इस गठबंधन ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में सरकार बनाई है.

उम्मीद है शिवसेना राज्य में साझा न्यूनतम कार्यक्रम का पालन करेगी: सचिन सावंत
महाराष्ट्र कांग्रेस के महासचिव सचिन सावंत ने भी कहा कि भले ही शिवसेना ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन किया हो, लेकिन उम्मीद है कि उद्धव ठाकरे नीत पार्टी राज्य में शासन चलाते समय साझा न्यूनतम कार्यक्रम (सीएमपी) का पालन करेगी.



राजनीतिक फायदे के लिए कैब का प्रयोग करेगी भाजपा
शरद पवार नीत पार्टी ने इससे पहले नागरिकता संशोधन विधेयक को संविधान-विरोधी करार देते हुए कहा था कि भाजपा नीत केन्द्र सरकार इसका इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर रही है.हम दो अलग-अलग पार्टियां हैं: राकांपा प्रवक्ता
राकांपा के मुख्य प्रवक्ता मलिक ने कहा, ‘हम दो अलग-अलग पार्टियां हैं. राज्य में शासन की बात करें तो हमारे बीच कुछ मुद्दों पर सहमति है. बिहार के दो सहयोगियों ने भी कुछ मुद्दों पर अलग रुख अपनाया है.’ मलिक का इशारा स्पष्ट रूप से बिहार में सत्तारूढ़ जद (यू) और भाजपा की ओर था, जिनका जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने को लेकर अलग-अलग रुख है.

ये है नागरिकता संशोधन विधेयक
लोकसभा से पास हो चुके मोदी सरकार के बिल के अनुसार, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध प्रवासी के तौर पर नहीं देखा जाएगा. ये सभी लोग भारत में नागरिकता के लिए आवेदन करने के पात्र बन जाएंगे.

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First published: December 10, 2019, 6:52 PM IST
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