अब शिवसेना ने मुंबई-पुणे की आबादी को लेकर जाहिर की चिंता, सामना में लेख
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अब शिवसेना ने मुंबई-पुणे की आबादी को लेकर जाहिर की चिंता, सामना में लेख
शिवसेना के मुखपत्र सामना में मुंबई-पुणे की आबादी को लेकर चिंता जाहिर की गई है.

सामना (Saamana) के संपादकीय (Editorial) में कहा गया है कि लॉकडाउन (Lockdown) के बाद अब फिर से मजदूर (Migrant Workers) मुंबई-पुणे की तरफ वापस लौट रहे हैं. अब इस बात पर विचार करना होगा कि मुंबई-पुणे की भीड़ को कैसे कम किया जाए. इसके लिए यूपी बिहार में मुंबई-पुणे की तरह स्मार्ट शहर बसाने होंगे.

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  • Last Updated: June 29, 2020, 10:31 AM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे (Mumbai and Pune) कोरोना (Covid-19) से बीते महीनों के दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित रहे हैं. अब शिवसेना (Shiv Sena) के मु्खपत्र सामना (Saamana) के संपादकीय (Editorial) में इन दोनों शहरों की आबादी को लेकर चिंता व्यक्त की गई है. संपादकीय में कहा गया है कि भविष्य में मुंबई-पुणे की जनसंख्या कम करनी पड़ेगी, ऐसा विचार केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने व्यक्त किया है. वर्तमान में विकास की दृष्टि रखनेवाले गडकरी एक महत्वपूर्ण नेता हैं. बड़ी योजनाओं और परियोजनाओं को साकार करने में उनका कोई सानी नहीं है.

नए शहर बसाने होंगे
सामना के लेख में कहा गया है कि लॉकडाउन के बाद अब फिर से मजदूर मुंबई-पुणे की तरफ वापस लौट रहे हैं. अब इस बात पर विचार करना होगा कि मुंबई की भीड़ को कैसे कम किया जाए. इसके लिए यूपी बिहार में मुंबई-पुणे की तरह स्मार्ट शहर बसाने होंगे. अगर केंद्र सरकार यूपी,बिहार और झारखंड जैसे राज्यों पर ज्यादा ध्यान दे तो मुंबई और पुणे जैसे शहरों की जनसंख्या कम की जा सकती है. इन शहरों पर अतिरिक्त बोझ है.

अटल सरकार में की गई थी मांग
संपादकीय में लिखा गया है कि मुंबई की भीड़ कम करने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय में शिवसेना की तरफ से परमिट पद्धति लागू करने की बात कही गई थी. तब यूपी बिहार के नेताओं ने इसे लेकर खूब हंगामा मचाया था. तब शिवसेना प्रमुख ने अपनी इस मांग को वापस ले लिया था. लेकिन अब नितिन गडकरी के कारण वो इतिहास फिर सामने आया है. मुंबई और पुणे शहर में कोरोना विस्फोट हुआ है और इसके पीछे घनी आबादी सबसे प्रमुख कारण है.



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क्या तेज हो जाएगा बाहरी बनाम स्थानीय का मुद्दा
गौरतलब है कि मुंबई में 'बाहरी लोगों' का मसला शिवसेना हमेशा से उठाती आई है. कई बार इसके लिए हिंसक विरोध भी किए जा चुके हैं. शिवसेना से अलग हटकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना बनाने वाले राज ठाकरे ने तो इस मुद्दे को और भी जोर-शोर के साथ उठाया था. अब माना जा रहा है कि कोरोना की भीषण मार झेलने के बाद के बाद एक मुंबई में स्थानीय और बाहरी का विवाद गहरा सकता है.
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