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OPINION: 2014 के चुनाव से अलग है माहौल, इस बार NCP-BJP के बीच कांटे की टक्कर

News18India
Updated: October 14, 2019, 2:32 PM IST
OPINION: 2014 के चुनाव से अलग है माहौल, इस बार NCP-BJP के बीच कांटे की टक्कर
इस बार एनसीपी और बीजेपी के बीच कांटे का होगा टक्कर

एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार (Sharad Pawar) के पोते रोहित पवार इन दिनों चर्चा में हैं. रोहित बीजेपी के गद्दावर नेता राम शिंदे के सामने अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.

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  • Last Updated: October 14, 2019, 2:32 PM IST
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आशीष दीक्षित 

मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में इन दिनों चुनावी हवाएं तेज हैं. अब चुनावों को बस कुछ ही दिन बचे हैं. ऐसे में सारी पार्टियां पूरी शक्ति के साथ प्रचार में लगी हुई हैं. पहले गठबंधन होगा या नहीं इस फैसले को लेकर खबरों में रहने वाली पार्टियों ने अपने पारंपरिक साथी के साथ गठबंधन कर चुनावी बिगुल बजा दिया है. ये चुनाव 2014 के विधानसभा चुनावों (Assembly election) से कई मायनों में अलग है. पहले तो छोटे भाई की भूमिका में रहने वाली एनसीपी और बीजेपी (BJP) के बीच काटे की टक्कर हो रही है. इसके पहले बड़े भाई की भूमिका में रहने वाली शिवसेना और कांग्रेस बैकफुट पर हैं. बड़े और पुराने नेताओं का पत्ता काटकर लगभग सभी पार्टियों ने युवाओं पर ज्यादा ध्यान देते हुए अपने उम्मीदवार चुने है. इसमें सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी है ठाकरे परिवार के युवराज आदित्य ठाकरे ने और हो भी क्यों ना ? पिछले 53 साल के इतिहास में पहली बार कोई ठाकरे चुनावी मैदान में लड़ने के लिए उतरा है.

इससे पहले पार्टी के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे हों या उनके बेटे उद्धव दोनों ने ही हमेशा रिमोट कंट्रोल संभालते हुए किंग मेकर की भूमिका में रहना पसंद किया. आदित्य मुंबई की वर्ली विधासभा क्षेत्र से लड़ रहे हैं, जाहिर सी बात है पहले चुनाव में शिवसेना आदित्य को जीतने के लिए एड़ी- चोटी का जोर लगा रही है. इससे पहले इस सीट पर शिवसेना को शरद पावर के करीबी और एनसीपी के पूर्व मुंबई अध्यक्ष सचिन अहीर कड़ी टक्कर देते थे, पर चुनावों के बस कुछ ही दिनों पहले अहीर ने अपने हाथों पर शिवबंधन बांध लिया और शिवसेना में शामिल हो गए.

रोहित पवार इन दिनों चर्चा में हैं

दूसरे युवा उम्मीदवार के तौर पर एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के पोते रोहित पवार इन दिनों चर्चा में हैं, एनसीपी की लगतार बढ़ती मुश्किलों के समय में रोहित की लॉन्चिंग चर्चा का विषय बनी हुई है. रोहित बीजेपी के गद्दावर नेता राम शिंदे के सामने अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. वहीं,  उनके चाचा अजितदादा पवार पारंपरिक बारामती सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. कुछ लड़ाइयां जो इस चुनाव में चर्चा का विषय बनी हुई है वो है मुंडे परिवार की लड़ाई. एक तरफ बीजेपी के वरिष्ठ नेता गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा मुंडे हैं तो वहीं, उनके भतीजे धनंजय मुंडे एनसीपी की तरफ से पंकजा को कड़ी चुनौती दे रहे हैं. धनंजय, गोपीनाथ मुंडे की मौत के बाद एनसीपी में शामिल हुए हैं. युवा और आक्रामक नेता के रूप में उनकी पहचान है. वो विरोधी पक्ष के नेता भी रह चुके हैं. ऐसे में पंकजा मुंडे और जीत के रास्ते में धनंजय रोड़ा बने हुए हैं.

मुंह मीठा करा रहे हैं
भले ही शिवसेना और बीजेपी के वरिष्ठ नेता गठबंधन की घोषणा कर एक दूसरे को बधाई दे रहे हों, एक दूरे का मुंह मीठा करा रहे हैं, पर उनके कार्यकर्ताओं के मन की कड़वाहट कम होने का नाम नहीं ले रही है.  5 सालों से उम्मीद लगाए बैठे कार्यकर्ताओं की सीट अगर दूसरी पार्टी के कोटा में चली गई तो ऐसे में बिचारे कार्यकर्ता करें भी तो क्या? ऐसे में बगावत कर अपने उम्मीदवार को लड़वाने के सिवाय कोई चारा भी नहीं है. ऐसा ही कुछ हुआ जलगांव की मुकताईनगर सीट पर. यहां से कई साल तक चुनकर आने वाले और सीएम की कुर्सी की महत्वकांक्षा रखने वाले एकनाथ खडसे को पार्टी ने टिकट न देकर उनकी बेटी रक्षा खडसे को उम्मीदवार बनाया. रक्षा खडसे के नाम की घोषणा होते है स्थानिक शिवसेना जिला प्रमुख चंद्रकांत पाटिल ने बगावत कर निर्दलीय फॉर्म भर दिया. हालांकि, शिवसेना ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है पर एनसीपी ने खडसे को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ा.
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खडसे की ताकत कम करने का प्रयास
उन्होंने पाटिल को समर्थन देकर खडसे की ताकत कम करने का पूरा प्रयास किया. वहीं, कोकन में भी 15 साल पहले शिवसेना छोड़ कांग्रेस में शामिल होने वाले महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे के लिए ये चुनाव उनके राजनीतिक कैरियर की दिशा तय करने वाले चुनाव साबित हो रहे हैं. राणे को पार्टी में शामिल न करने को लेकर बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना अड़ी हुई है.  हालांकि, नारायण राणे के छोटे बेटे नितेश राणे बीजेपी में शामिल हो गए और उन्हें सिंधुदुर्ग की कांकावली सीट से टिकट भी मिल गया. पर ये बात शिवसेना को गवारा नहीं है.

नए चेहरों को जगह दी गई है
सेना में नितेश के सामने अपना अधिकृत उम्मीदवार के तौर पर सुनील शिंदे को टिकट देकर कंकानवली सीट पर सेना और बीजेपी को आमने-सामने ला खड़ा कर दिया है. अब उद्धव 16 तारीख को सहयोगी पार्टी बीजेपी के उम्मीदवार के सामने प्रचार करते हुए सभा करेंगे. कुल मिलाकर इस चुनाव में बड़े नेताओं का पत्ता काटकर नए चेहरों को जगह दी गई है. इसमें बीजेपी के वरिष्ठ नेता एकनाथ खडसे, प्रकाश मेहता और विनोद तावड़े का नाम शुमार है. बताया जा रहा है कि तीनों की नजर सीएम फडणवीस की कुर्सी पर है और पिछले कुछ समय से फडणवीस से मतभेद के चलते ही तीनों को घर पर बिठाया गया है.

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First published: October 14, 2019, 2:00 PM IST
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