लाइव टीवी

OPINION: आखिर पदभार संभालने की इतनी हड़बड़ी में क्यों थे देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार?

Anil Rai | News18Hindi
Updated: November 25, 2019, 1:42 PM IST
OPINION: आखिर पदभार संभालने की इतनी हड़बड़ी में क्यों थे देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार?
देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार ने 23 नवंबर को शपथ ली थी.

महाराष्ट्र (Maharashtra) के मामले में देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) और अजित पवार (Ajit Pawar) सर्वोच्च अदालत को ये बताना चाहते थे कि बतौर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री दोनों ने अपनी जिम्मेदारियां संभाल ली हैं, ताकि अगर विपरीत हालात में सुप्रीम कोर्ट यथा स्थिति बनाए रखने को कहे, तो वो अपना काम जारी रख सके.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 25, 2019, 1:42 PM IST
  • Share this:
महाराष्ट्र (Maharashtra) को लेकर सोमवार को एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में बहस चल रही थी, दूसरी ओर मुंबई में राजनीतिक सरगर्मी भी तेज थी. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) और उप-मुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar) शपथ ग्रहण के 48 घंटे बाद सोमवार को अचानक मंत्रालय पहुंच गए. दोनों ने आनन-फानन में अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया. उधर, करीब 15 दिनों से सरकार बनाने को लेकर आम राय नहीं बना पाने वाली शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस भी एक्टिव हो गई है. तीनों पार्टी के नेता राजभव पहुंच और राज्यपाल को समर्थन पत्र सौंपते हुए सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब मामले की सुनवाई देश की सबसे बड़ी अदालत में चल रही है, तो सभी राजनीतिक दल इतनी हड़बड़ी में क्यों थे? कोई भी पक्ष सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार क्यों नहीं कर रहा है.

ये है हड़बड़ी की असली वजह!
इन सवालों का जबाब तलाशने पर कई चीज़ें साफ होती हैं. एक बात साफ है कि दोनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के पहले अपनी-अपनी दलीलें मजबूत कर लेना चाहते थे. देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार सर्वोच्च अदालत को ये बताना चाहते थे कि बतौर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री दोनों ने अपनी जिम्मेदारियां संभाल ली हैं, ताकि अगर विपरीत हालात में सुप्रीम कोर्ट यथा स्थिति बनाए रखने को कहे, तो वो अपना काम जारी रख सके.

दूसरी ओर विपक्ष (शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस) का गठबंधन राज्यपाल के सामने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के पहले सरकार बनाने का दावा पेश करना चाहता था. ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि सरकार के गठन से पहले राज्यपाल के सामने दावा पेश करना जरूरी होता है. अगर सुनवाई के पहले दावा पेश नहीं किया जाता, तो विपक्ष की देवेंद्र फडणवीस की नियुक्ति रद्द करते हुए सरकार बनाने का मौका देने की मांग अपने आप ही रद्द हो जाती.

maha
शरद पवार, सोनिया गांधी और उद्धव ठाकरे


महाराष्ट्र में अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सभी पक्षों की दलीलें सुनी और फैसला 24 घंटे के लिए सुरक्षित रख लिया. अब कोर्ट मंगलवार सुबह 10:30 बजे अपना फैसला सुनाएगी. सुप्रीम कोर्ट को तय करना है कि विधानसभा का सत्र कब बुलाया जाएगा, लेकिन अगर कोर्ट इस मामले में कोई समय सीमा नहीं भी देता है; तो स्थापित परंपरा के अनुसार सरकार को गुरुवार 28 नवंबर या शुक्रवार 29 नवंबर तक सत्र बुलाना पड़ेगा.ये समय इसलिए, क्योंकि राज्यपाल बीएस कोश्यारी ने फडणवीस सरकार को बहुमत साबित करने के किए 30 नवंबर तक का समय दिया है. इस तरह विधानसभा सत्र का एक दिन नव निर्वाचित विधायकों के शपथ ग्रहण और विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के लिए आरक्षित रखना होगा. विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के साथ ही फ्लोर टेस्ट की प्रक्रिया शुरू होगी.

ये भी पढ़ें: महाराष्‍ट्र पर महा-संग्राम: 'अजित पवार ही NCP' से लेकर घुड़सवार और घोड़े तक- पढ़ें सुप्रीम कोर्ट की पूरी बहस


 बहुमत साबित न होने पर विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर सकती है BJP

'अजित पवार ऐसे ही दावा नहीं कर रहे, उनके पास कुछ तकनीकी ताकत है'


News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए Mumbai से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 25, 2019, 1:40 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर