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महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू, एक-दूसरे के निशाने पर रहीं सभी पार्टियां

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Updated: November 12, 2019, 11:20 PM IST
महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू, एक-दूसरे के निशाने पर रहीं सभी पार्टियां
राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद राज्य की सभी प्रमुख पार्टियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस पर एक दूसेर पर निशाना साधा (File Photo)

महाराष्ट्र (Maharashtra) में राजनीतिक उठापटक का दौर राष्ट्रपति शासन लागू होने के साथ ही लगभग खत्म हो गया. राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि हम अभी भी बीजेपी के संपर्क में है. हमारी जो मांगे हैं, अगर वो पूरी होती हैं तो हम सरकार बनाने के लिए बीजेपी को समर्थन देंगे.

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  • Last Updated: November 12, 2019, 11:20 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र (Maharashtra) में राजनीतिक उठापटक का दौर राष्ट्रपति शासन लागू होने के साथ ही लगभग खत्म हो गया. बीजेपी और शिवसेना के बाद राज्यपाल ने तीसरी सबसे बड़ी पार्टी एनसीपी को सरकार बनाने के लिए दावा पेश करने के लिए आमंत्रित किया. बाद में राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की. इस पर शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. हालांकि मंगलवार शाम में राष्ट्रपति शासन लग गया. इसके बाद कांग्रेस-एनसीपी, शिवसेना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एक-दूसरे पर निशाना साधा. एक नजर महाराष्ट्र में चले सियासी घटनाक्रम पर...

बीजेपी ने राष्ट्रपति शासन के लिए शिवसेना को ठहराया जिम्मेदार
बीजेपी ने महाराष्ट्र में 19 दिन के राजनीतिक गतिरोध के बाद राष्ट्रपति शासन लगने के लिए अपनी पूर्व सहयोगी एवं राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी शिवसेना के ‘हठ’ को उसका नाम लिए बिना जिम्मेदार ठहराया. बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुधीर मुनगंतीवार ने बीजेपी की कोर समिति की एक बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘राष्ट्रपति शासन लगना जनादेश का अपमान है और यह कुछ लोगों के हठ के कारण हुआ है, जिन्होंने उस जनादेश का अपमान किया. हम उभर रही राजनीतिक स्थिति पर नजदीकी नजर रखे हुए हैं.’ मुनगंटीवार ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना द्वारा कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन से सरकार बनाने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा, ‘एक स्पष्ट जनादेश के बावजूद हमने अपनी सहयोगी की तरह वैकल्पिक संभावनाएं नहीं तलाशी, जिसने चुनाव परिणाम के बाद अन्य विकल्पों के बारे में बातें की.’ उन्होंने सवाल किया, ‘यदि उन्हें सरकार बनाने को लेकर विश्वास था तो वे समर्थन का पत्र लेने में क्यों असफल रहे.’

राज्य में जल्द ही बनेगी एक स्थिर सरकार: देवेंद्र फडणवीस

बीजेपी विधायक दल के नेता देवेंद्र फडणवीस ने उम्मीद जताई कि राज्य में जल्द ही एक स्थिर सरकार बनेगी. उन्होंने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया. उन्होंने कहा, ‘एक स्पष्ट जनादेश के बावजूद सरकार नहीं बन पाई और राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा. यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. मैं उम्मीद करता हूं कि राज्य को जल्द ही स्थिर सरकार मिलेगी.’ पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य कई मुद्दों का सामना कर रहा है. उन्होंने कहा, ‘बेमौसम वर्षा से फसल नुकसान का सामना करने वाले किसानों को राहत एवं सहायता मुहैया कराना एक प्रमुख मुद्दा है. राजनीतिक अस्थिरता के चलते, राज्य में निवेश प्रभावित हो सकता है और लोगों को परेशानी हो सकती है. मैं उम्मीद करता हूं कि सभी दल स्थिति पर गंभीरता से विचार करेंगे और राज्य को एक स्थिर सरकार मिलेगी.’

एनसीपी-कांग्रेस, शिवसेना को मूर्ख बनाने की कोशिश कर रही है: नारायण राणे
इस बीच बीजेपी नेता एवं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए जो भी जरूरी होगा वह करेंगे कि उनकी पार्टी राज्य में सरकार बना ले. उन्होंने कहा, ‘मैं एक नई बीजेपी सरकार बनने के लिए जो भी जरूरी होगा करूंगा, लेकिन मैं (तौर तरीके) चर्चा नहीं करूंगा.’ उन्होंने कहा कि शिवसेना सरकार गठन में अभी तक ‘असफल’ रही है और इसके बावजूद दावा किया. उन्होंने कहा कि मैं नहीं मानता कि शिवसेना कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के साथ जाएगी. मुझे लगता है कि एनसीपी-कांग्रेस, शिवसेना को मूर्ख बनाने की कोशिश कर रही है.
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शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी मिलकर सरकार बनाने का फार्मूला खोज लेंगे: उद्धव
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी मिलकर सरकार बनाने का रास्ता खोज लेंगे. उन्होंने कहा कि शिवसेना को भी कांग्रेस और एनसीपी की तरह न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर स्पष्टीकरण की आवश्यकता है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी से पहली बार 11 नवंबर को संपर्क किया था. उन्होंने कहा, 'कांग्रेस और एनसीपी की तरह ही शिवसेना को भी न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर स्पष्टीकरण की आवश्यकता है. शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी से पहली बार सोमवार को संपर्क किया था. इससे बीजेपी का यह आरोप गलत साबित होता है कि शिवसेना चुनाव परिणाम के बाद से ही कांग्रेस और एनसीपी के संपर्क में थी.'

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लोकतंत्र पर ‘क्रूर मजाक’: कांग्रेस
कांग्रेस ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और केंद्र सरकार पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए निशाना साधते हुए कहा कि ये कार्रवाई न सिर्फ लोकतंत्र से ‘क्रूर मजाक’ है, बल्कि साथ ही ऐसा ‘निंदनीय कार्य’ है, जिसने संवैधानिक प्रथाओं को रौंदा है. कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने महाराष्ट्र के राज्यपाल पर एनसीपी, शिवसेना और बीजेपी को सरकार बनाने के लिए बहुमत साबित करने के लिए ‘मनमाने ढंग से’ समय देने का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा, ‘राज्यपाल और दिल्ली के शासकों ने महाराष्ट्र के व्यथित किसानों और आम आदमी के साथ घोर अन्याय किया है.’

शिवसेना को समर्थन पर अभी तक कोई फैसला: एनसीपी-कांग्रेस
कांग्रेस और एनसीपी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि उन्होंने महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए शिवसेना को समर्थन देने के बारे में अभी तक कोई फैसला नहीं किया है, लेकिन वे इस बारे में आगे चर्चा जारी रखेंगे. एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि दोनों दल चर्चा करेंगे और इस बात पर एक सहमति बनाएंगे कि शिवसेना को समर्थन देने के लिए नीतियां और कार्यक्रम क्या होंगे. वहीं कांग्रेस नेता अहमद पटेल, मल्लिकार्जुन खड़गे और के सी वेणुगोपाल मौजूद थे. पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस मुद्दे पर एनसीपी के साथ आगे और चर्चा करने के लिए इन नेताओं को नियुक्त किया है. अहमद पटेल ने कहा कि शिवसेना ने समर्थन के लिए आधिकारिक रूप से सोमवार को कांग्रेस-एनसीपी से संपर्क किया.

बता दें, महाराष्ट्र विधानसभा के पिछले महीने हुए चुनाव में बीजेपी 105 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी थी. शिवसेना ने 56 सीटें, एनसीपी ने 54 सीटें और कांग्रेस ने 44 सीटें जीती थीं. चुनाव परिणाम 24 अक्टूबर को घोषित हुए थे.

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First published: November 12, 2019, 10:26 AM IST
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