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महाराष्ट्र की सियासत में अचानक क्यों सबसे अहम हो गए हैं राज ठाकरे?

राज ठाकरे (फाइल फोटो)

राज ठाकरे (फाइल फोटो)

कांग्रेस, एनसीपी राज ठाकरे से एक समय इतनी दूरी बनाकर रखते थे कि राज ठाकरे की परछाई पड़ने पर उन्हें अपने वोट बैंक के खिसकने खतरा बना रहता था. उसी ठाकरे के जरिए अब वे अपना वोट बैंक बचाने की तैयारी में लगे हैं.

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जिस राज ठाकरे को महाराष्ट्र में पार्टियां देखना नहीं चाहती थीं. अचानक वही राज ठाकरे उन पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण बन गए हैं. कांग्रेस, एनसीपी राज ठाकरे से एक समय इतनी दूरी बनाकर रखते थे कि राज ठाकरे की परछाई पड़ने पर उन्हें अपने वोट बैंक के खिसकने खतरा बना रहता था. उसी ठाकरे के जरिए अब वे अपना वोट बैंक बचाने की तैयारी में लगे हैं.

2019 में होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले जिस तरीके से कांग्रेस और एनसीपी के नेता बीजेपी और शिवसेना का दामन थाम रहे हैं, उससे कहीं न कहीं कांग्रेस, एनसीपी को किसी ऐसे साथी की जरूरत आन पड़ी, जिसकी छवि कट्टर मराठी मानुष की हो और यही वजह है कि इन दिनों कांग्रेस, एनसीपी और राज ठाकरे महाराष्ट्र की राजनीति में हर पार्टियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण बनते जा रहे हैं, भले ही राज ठाकरे अपने एक भी विधायक नहीं जीता पाए हों या फिर राज ठाकरे की पार्टी खुद भी गर्दिश में हो, लेकिन तमाम दूसरी पार्टियां खासकर कांग्रेस और एनसीपी को राज ठाकरे के साथ रहकर अपना वोटबैंक बनाए रखने की गणित समझ में आने लगी है.

वजूद बचाने के लिए राज ठाकरे का साथ चाहते हैं कांग्रेस-एनसीपी
लोकसभा चुनाव के भी पहले राज ठाकरे ने लगातार कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं के लिए तमाम सारी रैलियां की हालांकि उन रैलियों का कोई पॉजिटिव रिजल्ट नहीं आया लेकिन कांग्रेस एनसीपी को लगता है कि राज ठाकरे को साथ रखने से कहीं न कहीं महाराष्ट्र की सियासत में उनका वजूद बचा रह सकता है.

एनसीपी नेता अजीत पवार और जयंत पाटील ने भी की है राज ठाकरे से मुलाकात
एनसीपी नेता अजीत पवार और एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटील ने भी राज ठाकरे के साथ मुलाकात की है.

एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटील (फाइल फोटो)


हालांकि इस मुलाकात के पीछे की वजह नहीं उन्होंने नहीं बताई है लेकिन उन्होंने साफ-साफ कहा है कि आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में कुछ नया होने वाला है. यानी साफ है कि बीजेपी शिवसेना के डर से जिस राज ठाकरे से कांग्रेस एनसीपी दूरी बना रही थीं, उसी राज ठाकरे के जरिए अब अपना वोट बैंक बचाने की तैयारी कर रही हैं.

मराठी वोट बैंक को बचाने की भी है तैयारी
यही पार्टियां पहले राज ठाकरे को साथ लेने से घबराती थी क्योंकि उन्हें लगता था कि नॉन मराठी वोट बैंक उनसे खिसक जाएगा लेकिन जिस तरीके से लोकसभा चुनाव में गैर मराठी वोट कांग्रेस और एनसीपी के बजाय बीजेपी और शिवसेना को गया है. कहीं न कहीं अब कांग्रेस एनसीपी को लगता है कि मराठी वोट बैंक को बचाए रखने के लिए राज ठाकरे की लड़ाकू और मराठी मानुष की छवि को भुनाया जा सकता है और यही वजह है कि दोनों ही पार्टियां राज ठाकरे से अलग-अलग मीटिंग कर रही हैं.

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