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खुलासा: पाकिस्तान अब दाऊद के साथ मिलकर भारत के खिलाफ रच रहा है ये साजिश

गैंगस्टर लकड़वाला ने खुलासा किया है कि डॉन दाऊद इब्राहिम साल 1998 में ही मार दिया जाता लेकिन...

गैंगस्टर लकड़वाला ने खुलासा किया है कि डॉन दाऊद इब्राहिम साल 1998 में ही मार दिया जाता लेकिन...

क्राइम ब्रांच (Crime Branch) की पूछताछ में जावेद ने बताया कि उसे दुबई में सरदार नामक शख्स ने 2,000 के जाली नोट भारत पहुंचाने के लिए दिए थे. इसके बदले उसने उसे मोटा कमीशन देने का लालच भी सरदार ने ही दिया था.

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    मुंबई. पाकिस्तान (Pakistan) से दुबई (Dubai) के रास्ते भारत लाए गए 2000 के नकली नोटों की खेप के मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में एक और बेहद ही चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी जावेद शेख ने क्राइम ब्रांच के सामने डी कंपनी के उस शख्स का नाम उगल दिया है, जिसने उसे नकली नोटों को भारत लाने और भारत में बैठे दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim) के गुर्गे तक पहुंचाने के लिए कहा था. उस शख्स का नाम कुछ और नहीं, बल्कि सरदार है, जो डी कंपनी का बेहद ही खास गुर्गा है.


    भारत की अर्थव्यवस्था को डगमगाने का सपना पाले बैठा पाकिस्तान, उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई और दाऊद के सपने तो पहले ही चूर-चूर हो चुके हैं और अब उसी का गुर्गा परत दर परत मुंबई क्राइम ब्रांच के सामने पोल खोल कर तीनों को बेनकाब कर रहा है. इस खुलासे के बाद पाकिस्तान, उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई और दाऊद के चेहरे का नकाब पूरी तरह से उतर चुका है.


    सरदार नामक शख्स ने दिए थे
    क्राइम ब्रांच की पूछताछ में जावेद ने बताया कि उसे दुबई में सरदार नामक शख्स ने 2000 के जाली नोट भारत पहुंचाने के लिए दिए थे. इसके बदले उसने उसे मोटा कमीशन देने का लालच भी सरदार ने ही दिया था. सरदार का आदेश था कि वह भारत पहुंच कर मुंबई में बैठे गुर्गे तक पहुचाना है और उसके बदले उसे 35-40 फीसदी कमीशन दिया जाएगा. इस खुलासे पर महारांष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि इस मामले में इस तथ्य के साथ-साथ कई और तथ्य सामने आए हैं, जिनकी क्राइम ब्रांच जांच कर रही है. हम इस मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.


    यह डी कंपनी का बेहद ही खास गुर्गा है
    बता दें कि सरदार नाम का यह शख्स डी कंपनी का बेहद ही खास गुर्गा है और तकनीकी रूप से बेहद ही शातिर. दाऊद और उसके भाई अनीस इब्राहिम को सरदार पर बहुत भरोसा है. इतना ही नहीं, सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान, आईएसआई और डी कंपनी ने नकली नोटों को बनाने से लेकर उसे भारत में मुंबई सहित अलग-अलग इलाकों में पहुंचाने की सरदार को ही जिम्मेदारी सौंपी है. दाऊद का यह गुर्गा आईएसआई की फैक्ट्री में जाली नोटों को छपवाने के कार्य से लेकर उसे दुबई पहुंचाने और वहां से भारत भेजने के लिए लोगों को चुनने का कार्य करता है. इस गुर्गे पर दाऊद और अनीस इब्राहिम के भरोसे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बंगाल के मालदा में नकली नोटों के पकड़े जाने के बाद हवाई रास्ते के जरिए भारत में नकली नोट भेज अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने का आइडिया इसी ने दिया था,जिसको दाऊद, आईएसआई और पाकिस्तान ने बिना किसी शक के मान लिया था.


    दुबई से जाली नोटों की खेप कैसे भारत भेजनी है, इसकी योजना भी यही बनाता है. विशेषज्ञों की माने तो डी कंपनी, पाकिस्तान और आईएसआई इस तरह के कार्यों को करने के लिए अपने सबसे भरोसेमंद गुर्गे को चुनते हैं. इसके लिए बाकायदा विशेष ट्रेनिंग दी जाती है और उस ट्रेनिंग में जिसे महारत हासिल हो जाता है उसे जिम्मेदारी सौंपी जाती है. मुम्बई पुलिस के पूर्व पुलिस कमिश्नर पीएस पसरीचा का कहना है कि दाऊद ऐसे ही किसी गुर्गे पर भरोसा नहीं करता, बल्कि बहुत सोच समझ कर कदम उठाता है. उसने अगर सरदार को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है तो जाहिर है वह उसका बहुत ही भरोसेमंद आदमी होगा.


    नोट पाकिस्तान में बने हुए हैं
    फेक करेंसी के इस केस में मुंबई क्राइम ब्रांच को ये तो पता था कि जाली नोट पाकिस्तान में बने हुए हैं, लेकिन इसके पीछे डी कंपनी भी शामिल होगी, इसकी अंदाजा भी उन्हें नहीं था, लेकिन जैसे-जैसे पूछताछ और जांच आगे बढ़ी, कड़ियां अपने आप जुड़ती चली गईं और अब जबकि दाऊद के खास गुर्गे का नाम उनके सामने आ चुका है तो ऐसे में उसको पकड़ने की योजना में क्राइम ब्रांच जुटी हुई है.


    2000 के जाली नोटों के साथ पकड़े गए जावेद शेख ने पूछताछ के एक और भी बेहद चौकाने वाला खुलासा किया है, जिससे मुम्बई क्राइम ब्रांच के अधिकारी भी चौक गए. इस खुलासे ने जाली नोटों के इस केस का कनेक्शन बिहार की राजधानी पटना से जुड़ता नज़र आ रहा है. मुम्बई क्राइम ब्रांच की पूछताछ में जावेद शेख ने बताया है कि वह दुबई से हवाई रास्ते के जरिये जाली नोटों को पटना और महारांष्ट्र के नासिक जिले में भी पहुंचा चुका है, यानी पाकिस्तान, आईएसआई और डी कंपनी के निशाने पर सिर्फ मुम्बई ही नहीं, बल्कि कई और राज्य भी हैं.


    24 लाख के जाली नोटों के साथ पकड़ा था
    9 फरवरी 2020 को मुम्बई एयरपोर्ट से मुम्बई क्राइम ब्रांच ने जब 24 लाख के जाली नोटों के साथ जब जावेद शेख को पकड़ा तो उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि पाकिस्तान, आईएसआई और दाऊद ने सिर्फ मुम्बई ही नहीं, बल्कि कई और राज्यों में भी 2000 के जाली नोटों को भेज चुके हैं. इसका खुलासा खुद जावेद शेख ने क्राइम ब्रांच के सामने किया है. जावेद ने बताया है कि मुंबई से पहले वह बिहार के पटना और महाराष्ट्र के नासिक में जाली नोटों की एक खेप पहुंचा चुका है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पटना में पाकिस्तान में बने वह करीब 25 लाख के जाली नोट और नासिक में 20-22 लाख के 2000 के जाली नोट की खेप पहुंचा चुका है. यह जाली नोट उसे सरदार ने ही दिया था, जिसे बाद में उसने पटना और नासिक में बैठे दाऊद के गुर्गे तक पहुंचाया. क्राइम ब्रांच के जॉइंट सीपी संतोष रस्तोगी ने बताया कि हमारी जांच चल रही है और हम इस मामले की हर एंगल से जांच कर रहे हैं. मामला संवेदनशील है, इसलिए ज्यादा जानकारी देना अभी ठीक नहीं है.


    नकली नोटों की तस्करी कोई नया नहीं है
    दरअसल, बिहार की राजधानी पटना का रूट नकली नोटों की तस्करी के लिए कोई नया नहीं है,बल्कि यहां नेपाल के रास्ते नकली नोटों की तस्करी की जाती रही है, लेकिन पुलिस की कड़ी निगरानी के चलते कुछ सालों से यह रुट बंद हो गया था, जिसे पाकिस्तान, आईएसआई और दाऊद इब्राहिम फिर से मिलकर अलग रास्ते के जरिए सक्रिय करने की फिराक में हैं. इसके लिए उन्होंने हवाई रास्ते को चुना है और जावेद शेख के जरिए एक बार जाली नोटों की खेप भेज भी चुके हैं, हालांकि जावेद ने अभी इस बात का खुलासा नहीं किया है कि वह पटना और नासिक के किस इलाके में जाली नोटों को पहुंचाया था. मुम्बई के पूर्व पुलिस कमिश्नर माने तो नकली नोटों की तस्करी के लिए पटना के कुछ इलाके पहले से ही डी कंपनी के लिए हॉट स्पॉट रहे हैं, जहां डर की वजह से पुलिस तो क्या, कोई भी नहीं जाता था, लेकिन कुछ सालों से कड़ी निगरानी की वजह से वह रास्ता बंद होने से डी कंपनी हवाई रास्ते के सहारा ले रही है.


    इस जानकारी के बाद मुम्बई क्राइम ब्रांच ने बिहार पुलिस और नासिक पुलिस से संपर्क में है, ताकि दोनों जगहों पर भेजे गए जाली नोटों को बाजारों में फैलने से रोका जा सके और भारत की अर्थव्यवस्था को कमजोर होने से बचाया जा सके. वहीं, इस पूरे मामले में क्राइम ब्रांच को लैब रिपोर्ट का भी इंतजार है, जिसके आने के बाद कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं.



     

    (रिपोर्ट- दिवाकर सिंह)

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