पंजाब में उग्रवाद को समाप्त करने वाले अफसर रिबेरो ने अनुच्छेद 370 के फैसले की नैतिकता पर उठाए सवाल

भाषा
Updated: August 25, 2019, 9:57 PM IST
पंजाब में उग्रवाद को समाप्त करने वाले अफसर रिबेरो ने अनुच्छेद 370 के फैसले की नैतिकता पर उठाए सवाल
पंजाब में उग्रवाद को समाप्त करने वाले अफसर रिबेरो ने अनुच्छेद 370 पर दिया यह बयान.

पंजाब पुलिस प्रमुख के रूप में उग्रवाद से निपटने में अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व पुलिस अधिकारी जूलियो रिबेरो ने मुंबई में जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के संबंध में केंद्र सरकार के अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाने की नैतिकता पर सवाल उठाए.

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पंजाब पुलिस प्रमुख के रूप में उग्रवाद से निपटने में अहम भूमिका निभाने वाले पूर्व पुलिस अधिकारी जूलियो रिबेरो ने मुंबई में जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के संबंध में केंद्र सरकार के अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाने की नैतिकता पर सवाल उठाए. उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले को एक पुलिसकर्मी के नजरिए से तो पूरे अंक दिए और कहा कि ऐसे मामलों में लोगों की इच्छा ही सबसे महत्वपूर्ण होती है. साथ ही उन्होंने कहा कि नैतिकता के दृष्टिकोण से वह ऐसा फैसला कभी नहीं लेते जैसा केंद्र सरकार ने लिया है.

1980 के दशक में पुलिस प्रमुख के रूप में पंजाब में उग्रवाद से सख्ती से निपटने के लिए जाने जाने वाले और एवं पद्म भूषण से सम्मानित रिबेरो ने कहा, ‘‘एक पुलिसकर्मी के तौर पर यदि आपको यह सुनिश्चित करना है कि कोई दिक्कत पैदा न हो, तो यह बहुत चतुराई से किया गया. पुलिस के नजरिए से, मैं इसे पूरे नंबर दूंगा, लेकिन नैतिकता के आधार से मैं ऐसा नहीं करूंगा. लोगों को शामिल किया जाना चाहिए.’’

370 हटाकर जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में कर दिया गया है विभाजित
केंद्र ने पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के कुछ प्रावधानों को निरस्त कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था. पूर्व पुलिस आयुक्त ने कहा, ‘लोगों को अपने विश्वास में लेना सबसे महत्वपूर्ण बात है और उसे (सरकार को) ऐसा करना ही होगा, अन्यथा आपको समस्या होगी. लोगों को अपने पक्ष में करना ही मामले का मूल आधार है.’’

पूर्व पीएम वाजपेयी ने उनसे जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनने का किया था अनुरोध
रिबेरो ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उनसे जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनने का अनुरोध किया था और जब उन्होंने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया तो उन्होंने फारूक अब्दुल्ला को उन्हें राजी करने की जिम्मेदारी सौंपी. वाजपेयी को यह पता चला था कि वह लोगों को विश्वास में लेकर किस प्रकार पंजाब में उग्रवाद से निपटे और वह कश्मीर में भी ऐसा ही करना चाहते थे. रिबेरो ने कहा, ‘‘मैंने कहा कि राज्यपाल के तौर पर मैं ऐसा नहीं कर सकता. मैं पुलिस महानिदेशक या राज्यपाल के सलाहकार के तौर पर ऐसा कर सकता हूं, लेकिन राज्यपाल के तौर पर मैं ऐसा नहीं कर सकता.’’

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First published: August 25, 2019, 9:57 PM IST
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