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Maharashtra Election Results 2019: शुरुआती रुझानों में दिखी मराठा क्षत्रप शरद पवार की ताकत

Abhishek Pandey | News18Hindi
Updated: October 24, 2019, 11:06 AM IST
Maharashtra Election Results 2019: शुरुआती रुझानों में दिखी मराठा क्षत्रप शरद पवार की ताकत
रुझान अगर नतीजे बन जाएं तो शरद पवार (Sharad Pawar) की स्थिति पहले से बहुत मजबूत हो जाएगी.

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra Assembly Election) के रुझानों के अनुसार, एनसीपी (NCP) बड़े भाई की भूमिका में आ सकती है. उसकी सीटों की संख्या कांग्रेस से ज्यादा हो सकती है. इससे शरद पवार (Sharad Pawar) की स्थिति पहले से बहुत मजबूत हो जाएगी.

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  • Last Updated: October 24, 2019, 11:06 AM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 (Maharashtra Assembly Election 2019) में सबसे ज्यादा असर प्रत्याशियों के अपने व्यवहार का रहा है. चाहे शिवसेना बीजेपी गठबंधन (Shiv Sena BJP Alliance) की बात हो या फिर एनसीपी-कांग्रेस (NCP Congress) की. दोनों तरफ से मतदाताओं ने प्रत्याशियों को देखते हुए वोट दिए हैं. कम से कम अभी तक के रुझानों के दौर से यह बात आसानी से समझ में आ रही है. रुझानों के अनुसार, शरद पवार (Sharad Pawar) की स्थिति पहले से बहुत मजबूत हुई है.

बड़े भाई की भूमिका में आ सकती है एनसीपी
दूसरी महत्वपूर्ण बात ये हुई है कि अब तक के जो रुझान दिखा रहे हैं वो ये कि दोनों गठबंधनों में अब तक जो पार्टी बड़े भाई की भूमिका में रही है उसका वो कद बदलता नजर आ रहा है. खास तौर से एनसीपी और शिवसेना की बात की जाए तो इस गठबंधन में पहले कांग्रेस पार्टी की स्थिति बड़े भाई की रही है, लेकिन नतीजों के रुझान साफ दिखा रहे हैं कि अब एनसीपी बड़े भाई की भूमिका में आ सकती है. उसकी सीटों की संख्या कांग्रेस से ज्यादा हो सकती है. इसे शरद पवार की सफल रणनीति कहा जा सकता है. मराठा क्षत्रप के तौर पर जिस तरह की पकड़ शरद पवार की पहले रही है वो और मजबूत हुई है.

बीजेपी की स्थिति एक बार फिर बदल सकती है

इधर महायुति यानी बीजेपी-शिवसेना गठबंधन में भी गणित कुछ ऐसी बनती दिख रही है कि शिवसेना के विधायकों की संख्या अगर बीजेपी से ज्यादा हो जाए तो हैरानी की बात नहीं कही जा सकती. अब तक बड़े भाई की भूमिका में रहने वाली बीजेपी की स्थिति एक बार फिर बदल सकती है.

राजनीतिक विरासत को लेकर मैदान में उतरने वाले नेताओं को कठिनाई
इन सबमें एक बात और सामने आ रही है कि शुरुआती रुझानों में वो नेता जो दल बदल कर के चुनाव लड़ रहे हैं उनकी रणनीति कारगर साबित होती दिख रही है. ऐसे नेता जो अपना दल छोड़ कर विरोधी पार्टियों का झंडा थाम लिए उन्हें मतदाताओं का समर्थन मिला है. हालांकि इस बारे में पूरी बात तो नतीजे सामने आने के बाद ही कही जा सकती है. इसी तरह रुझानों के अनुसार अपनी राजनीतिक विरासत को लेकर मैदान में उतरने वाले नेताओं को कठिनाई हो रही है.
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First published: October 24, 2019, 10:29 AM IST
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