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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव: बीजेपी-शिवसेना की 'आंधी' में जमी रहीं शरद पवार की मजबूत जड़ें

एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने सतारा में तेज बारिश में भींगते हुए एक रैली को संबोधित किया था. (फाइल फोटो)

एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने सतारा में तेज बारिश में भींगते हुए एक रैली को संबोधित किया था. (फाइल फोटो)

80 साल के शरद पवार (Sharad Pawar) ने पूरे महाराष्ट्र में करीब 3 महीने दौरे किए और चुनावी समय में खुद एक दिन में करीब 3 से 4 रैलियां की.

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मुंबई. सियासत में यूं तो शरद पवार (Sharad Pawar) का सफर 50 साल से ज्यादा है. लेकिन करीब 4 दशकों से मराठाओं के छत्रप बनकर महाराष्ट्र (Maharashtra) सहित पूरे देश में अपने राजनीतिक दांव के लिए माने जाने वाले शरद पवार के लिए 2019 के विधानसभा चुनावों (Assembly Election) का परिणाम महत्वपूर्ण है.

26 साल की उम्र में पहली बार विधायक बने थे शरद पवार
किसी को इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि सबसे कम उम्र में महाराष्ट्र की सियासत में कांग्रेस के बड़े सियासी हस्तियों को पीछे छोड़ते हुए शरद पवार मुख्यमंत्री बनेंगे. 26 साल की उम्र में पहली बार विधायक बने शरद पवार, महज 12 सालों के भीतर 1978 में मुख्यमंत्री बन गए. दो साल तक मुख्यमंत्री रहे शरद पवार की सरकार 1980 में बर्खास्त हो गई लेकिन 1988, 1990, 1993 में शरद पवार फिर मुख्यमंत्री बने.

भले ही शरद पवार ने बतौर मुख्यमंत्री कभी भी महाराष्ट्र में अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया लेकिन कांग्रेस के आलाकमान को कम उम्र में झुकाने से लेकर अपने को वसंत राव नाइक, शंकर राव चव्हाण या यशंवत राव चव्हाण जैसे बड़े नेताओं की श्रेणी में लाकर पवार ने खुद को खड़ा कर दिया. 1999 में एनसीपी की स्थापना करने वाले शरद पवार की पार्टी ने 2014 तक सत्ता का सुख भोगा, लेकिन देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें राजनीतिक तौर पर पटखनी देते हुए बीजेपी को सत्ता में ला दिया.

पांच साल देवेंद्र फडणवीस ने जिस तरीके से सरकार चलाई और कांग्रेस-एनसीपी के बड़े से बड़े नेताओं और पवार के करीबियों को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया, उससे शरद पवार के करिश्माई राजनीति और मराठा राजनीति पर ग्रहण सा लग गया.

2019 के विधानसभा चुनाव में 80 साल के शरद पवार ने की ताबड़तोड़ रैली
अपने गढ़ में सेंध लगते देख शरद पवार ने एक बार फिर 2019 विधानसभा चुनाव के समय राजनीतिक रण में कूद गए. 80 साल के होने के बाद भी उन्होंने पूरे महाराष्ट्र में करीब 3 महीने दौरे किए और चुनावी समय में खुद एक दिन में करीब 3 से 4 रैलियां की. वरिष्ठ पत्रकार बृजमोहन पांडेय बताते हैं कि लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद शरद पवार अपनी पार्टी और अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने के लिए खुलकर मैदान में आ गए. जबकि पिछले कुछ समय से वो खुद चाणक्य की भूमिका में रहते हुए दूसरों को आगे रखते थे. यही नहीं विपक्ष को जितनी भी सीटें मिलेगी, फिर चाहे वो कांग्रेस की हों या किसी भी दूसरे दल की, उसमें शरद पवार की रणनीति और उनके प्रचार का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा. वहीं, कांग्रेस नेता अविनाश पांडेय बताते हैं कि शरद पवार एक कुशल नेता हैं और महाराष्ट्र की सियासत में उनका एक्टिव होना सभी के लिए फायदेमंद है.

सतारा में तेज बारिश में भींगते हुए दिया चुनावी भाषण
चुनावी सरगर्मी में बीजेपी सरकार को उनके ही दांव में दो बार शरद पवार ने पटखनी देने में कामयाबी हासिल की. पहला जब उनके खिलाफ ईडी ने मामला दर्ज किया. जब तक लोग समझ पाते हैं, उतनी देर में ही शरद पवार ने सरकार के खिलाफ तुरंत इसे एक राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया और खुद 48 घंटे पहले ही ईडी जाने का ऐलान कर सरकारी तंत्र के लिए मुसीबत तो पैदा की ही, साथ ही मराठा नेताओं के बीच भी अपने आपको पीड़ित साबित करने में कामयाबी हासिल कर ली.

दूसरा दांव शरद पवार ने सतारा में उस समय खेला जब तेज और तूफानी बारिश में भींगते हुए मंच से लगातार अपने कार्यकर्ताओ को संबोधित किया. जिसकी वजह से पश्चिम महाराष्ट्र में सहित पूरे प्रदेश में शरद पवार के प्रति लोगों की संवेदना बढ़ गई.

चुनावी रुझान भी बताते हैं कि अब तक कांग्रेस का छोटा भाई के तौर पर पहचाने जाने वाले एनसीपी आने वाले समय में कांग्रेस का बड़ा भाई बनने की राह पर है. अगर विपक्ष ने शानदार प्रदर्शन किया तो उसमें शरद पवार की चुनावी दांव और कुशल रणनीति की महत्वपूर्ण भूमिका होगी.

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