मैं कभी नहीं कहता कांग्रेस मुक्‍त भारत हो: उद्धव ठाकरे

उद्धव ठाकरे ने कहा, 'ऐसा मैं कभी नहीं कहता. नष्ट करो या कांग्रेसमुक्त. ये मुक्त, वो मुक्त, ऐसी फालतू कल्पना मेरे पास नहीं. लेकिन आज कांग्रेस की अवस्था नेताविहीन है, यह निश्चित है. उनके पास उस ऊंचे स्तर के नेता नहीं हैं.'

News18Hindi
Updated: April 2, 2019, 2:12 PM IST
मैं कभी नहीं कहता कांग्रेस मुक्‍त भारत हो: उद्धव ठाकरे
उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के नेताओं के साथ बैठक की
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Updated: April 2, 2019, 2:12 PM IST
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुखपत्र सामना को दिए इंटरव्‍यू में कांग्रेस को लेकर बड़ी बात कही है. भाजपा के साथ गठबंधन में 2019 लोकसभा चुनाव लड़ रहे ठाकरे ने भाजपा के लोकप्रिय नारे कांग्रेसमुक्‍त भारत से असहमति जताई है. उद्धव ठाकरे ने कहा, 'कांग्रेसमुक्त देश हो ऐसा मैं बोलता ही नहीं. कांग्रेस को नष्ट करो, ऐसा मैं कभी नहीं बोलता क्योंकि विपक्ष रहना ही चाहिए. मुख्यमंत्री पर तो जिम्मेदारी रहती ही है लेकिन विपक्ष पर उससे बड़ी जिम्मेदारी होती है. क्योंकि विरोध करना मतलब तांडव करना नहीं, उस पर भी जिम्मेदारियां रहती हैं.

ठाकरे ने आगे कहा, 'जनता को न्याय दिलाने की भूमिका उसे अधिक निभानी पड़ती है. वैसे देखा जाए तो किसी को भी नष्ट करो, ऐसा मैं कभी नहीं कहता. नष्ट करो या कांग्रेसमुक्त. ये मुक्त, वो मुक्त, ऐसी फालतू कल्पना मेरे पास नहीं है. लेकिन आज कांग्रेस की अवस्था नेताविहीन है, यह निश्चित है. उनके पास उस ऊंचे स्तर के नेता नहीं हैं. जैसे नरसिम्‍हा राव थे, निश्चित ही थे. नरसिंहराव ने निश्चित ही अच्छा काम किया.'



राम मंदिर पर उद्धव ने कहा, 'हमारे अयोध्या जाने के बाद राम मंदिर का मुद्दा उठा और उसमें हलचल हुई और कोर्ट को मध्यस्थ नियुक्त करने पड़े. बेरोजगारी एक ज्‍वलंत मुद्दा है. उसे उठाएंगे. हमारा गठबंधन बीजेपी के साथ हिंदुत्व पर हुआ. हम 25 साल तक साथ में रहे लेकिन हम लोगों के मुद्दे उठाते रहे. 2014 और 2019 की परिस्थिति में कोई फर्क नही पड़ा है क्योंकि उस समय भी विरोधी दल जैसा कोई नही था. इस बार भी कोई नहीं है. नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह सहित कई अन्य प्रधानमंत्रियों ने अच्छा काम किया लेकिन उस समय कांग्रेस में कोई नेता नहीं था. राहुल गांधी कभी-कभी सही बोलते हैं तो कभी-कभी गड़बड़ कर देते हैं.

उद्धव ने कहा, 'महागठबंधन की कोशिश पहले भी हुई है. आपने अनुभव लिया है इंदिरा जी के समय. उन्होंने आपातकाल लादा था. आपातकाल और उसका अमल जिस तरीके से और जिस पद्धति से हुआ, जनता में आक्रोश था. फिर सभी विरोधी दल एक साथ आए और जनता पार्टी की सरकार आई. वह सरकार 22 महीने टिकी रही और गिर गई. उस समय तो कम से कम जयप्रकाश नारायण थे. इस बार सभी को एकत्रित करे ऐसा एक भी चेहरा पूरे देश में नहीं दिख रहा. मान लो विपक्ष के पास सत्ता आई तो प्रधानमंत्री होने की इच्छा रखे सभी विपक्षी दलों के नेताओं में एक बार फिर विवाद होगा और आखिर में मैंने जो कहा कि ना चोटी ना बुर्का. हममें हिंदुत्व एक समान मुद्दा तो है, हिंदुत्व मतलब राष्ट्रीयत्व. यह हमारा हिंदुत्व है और यही शिवसेना प्रमुख ने हमें सिखाया है. अब अगर हम पीछे गए तो इस देश में हिंदू को हिंदू के रूप में खड़ा रहना कठिन होगा.'

'25 वर्ष शिवसेना और भाजपा की युति हिंदुत्व के आधार पर मजबूत थी. करीब-करीब 30 वर्षों के बाद भाजपा की बहुमतवाली सरकार केंद्र में आई. यह चमत्कार था इसलिए उन्हें शायद ऐसा लगा कि पूरे देश में अकेले आगे जा सकेंगे. कुछ निर्णय सरकार के रूप में उन्होंने लिए, उस पर कटाक्ष भी हुए. एनडीए में रहते हुए भी हमने उस पर कहा. उसमें हमारा व्यक्तिगत स्वार्थ कहें तो बिल्कुल नहीं था. मुझे इस पर कोई अफ़सोस नहीं. उस समय जो कहा था कठोर रूप में ही कहा था. मैंने जो मुद्दे उठाए उसे भाजपा ने भी स्वीकारा. किसानों की समस्या थी, नाणार का मुद्दा था, राम मंदिर का मुद्दा था.'

बीजेपी को अचानक से शिवसेना की जरूरत क्यों पड़ी? इस पर उद्धव ठाकरे ने कहा, 'सही में यह सवाल उनसे पूछना चाहिए था लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि जो चर्चा हमारे बीच हुई थी. उसमें जो कुछ बातें हुई थीं. जिसकी वजह से हमारे बीच दूरियां पैदा हुई थीं. उसे दूर करने का प्रयत्न जरूर हुआ. हिंदुत्व पर हमने उस समय युति की थी. आज भी हिंदुत्व की डोर ही है. मान लो कि इस बार हम अलग लड़े होते तो कौन कितना जीतता. इसकी बजाय किसका कितना नुकसान होता. विपक्ष के पास अब भी सीटों का बंटवारा सही से नहीं हो रहा है और उनका एक नेता नहीं तय हो रहा है. राज्य में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष को ऐसा लग रहा है कि उनकी कोई नहीं सुन रहा है. शरद पवार एक बार कहते हैं लड़ने का और एक बार नहीं. मतलब न कोई आकार न उकार, ऐसे विरोधी दलों की जबरन एकजुट होने की कोशिश हो रही है. उनके हाथों में देश दें क्या?'

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