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JNU छात्रों के समर्थन में उतरी शिवसेना, 'खूनी झगड़े' को लेकर किया आगाह

News18Hindi
Updated: November 21, 2019, 9:43 AM IST
JNU छात्रों के समर्थन में उतरी शिवसेना, 'खूनी झगड़े' को लेकर किया आगाह
JNU छात्रों के प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस की बर्बरता को शिवसेना ने अमानवीय करार दिया है. (फाइल फोटो)

शिवसेना (Shiv Sena) ने कहा है कि दिल्ली की सड़कों पर अपनी मांगों के लिए आंदोलन करनेवाले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के नेत्रहीन छात्रों को जिस प्रकार से बंधक बनाया गया वह चिंताजनक है.

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  • Last Updated: November 21, 2019, 9:43 AM IST
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मुंबई. जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के छात्र नए हॉस्टल मैनुअल (Hostel Manual) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. उनकी मांग है कि नए मैनुअल में बढ़ाए गए फीस को वापस लिया जाए. इसी को लेकर विश्वविद्यालय (University) के छात्रों ने संसद भवन तक मार्च करने का ऐलान किया था. छात्रों का आरोप है कि इस दौरान दिल्ली पुलिस (Delhi Police) उनके साथ बर्बरता से पेश आई. कई छात्रों को बुरी तरह से पीटा गया. अब इन छात्रों को शिवसेना (Shiv Sena) का भी साथ मिल गया है. शिवसेना ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को अमानवीय करार दिया है और कहा है कि दिल्ली में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है.

शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखे गए संपादकीय में पुलिस की कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा गया है. शिवसेना ने कहा है, 'जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय पर सरकार का गुस्सा हो सकता है. 'नेहरू' नाम से वर्तमान सरकार का झगड़ा है, लेकिन फीस के विरोध में सड़कों पर उतरे विद्यार्थियों से सरकार ऐसा खूनी झगड़ा न करे.'

'छात्रों के आंदोलन को रक्तरंजित कर कुचलना ठीक नहीं'
शिवसेना ने कहा है कि विधानसभा सत्र और संसद सत्र के समय कई मार्च और आंदोलन होते हैं. कुछ मामले आवश्यक और गंभीर होते हैं. ऐसे मामलों में सरकार को तुरंत निर्णय लेकर रास्ता निकालना पड़ता है. कुछ दिनों से ऐसे आंदोलनों पर दिल्ली में बैन लगा दिया गया है. शिवसेना ने याद दिलाया है कि साल 2011 में हुए अन्ना हजारे के आंदोलन में बीजेपी के कई नेता उपस्थित थे. बीजेपी का स्थान इस आंदोलन से ही बना था. इसलिए आज जब दिल्ली में बीजेपी का शासन है तो विद्यार्थियों के आंदोलन को रक्तरंजित करके कुचलना ठीक नहीं है.

'कानून-व्यवस्था की आड़ में लाठी चार्ज करना दुर्भाग्यपूर्ण'
साथ ही शिवसेना का कहा है, 'दक्षिणपंथी विचारवालों का मानना है कि जेएनयू नक्सलवादी और वामपंथी विचारवालों का अड्डा है. इस विश्वविद्यालय ने कई अच्छे नेता और विशेषज्ञ देश को दिए हैं, लेकिन उसमें से कोई दक्षिणपंथी विचारों वाला नहीं था. इसलिए इस विश्वविद्यालय से अधिकारों के लिए उठने वाली आवाज को दबाना ही चाहिए, ऐसा सोचकर कानून-व्यवस्था की आड़ में आंदोलनकारी विद्यार्थियों पर अमानवीय लाठीचार्ज करने की नीति दुर्भाग्यपूर्ण है.'

जवाहर लाल नेहरू, जेएनयू, जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष, प्रेस कॉन्फ्रेंस, दिल्ली पुलिस, Jawaharlal Nehru, JNU, JNU Students Union President Aishi Ghosh, Press Conference, Delhi Police,
फीस बढ़ोत्तरी के अलावा कई अन्य मांगों के साथ जेएनयू छात्र प्रदर्श कर रहे हैं. (फोटो- पीटीआई)

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'नेत्रहीनों को मारनेवाली पुलिस जनता की सेवक नहीं हो सकती'
'सामना' में लिखे लेख के माध्यम से शिवसेना ने कहा है, 'दिल्ली की सड़कों पर अपनी मांगों के लिए आंदोलन करने वाले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के नेत्रहीन, विकलांग विद्यार्थियों को जिस प्रकार से बंधक बनाया गया वो चिंताजनक है. नेत्रहीनों को मारनेवाली पुलिस जनता की सेवक और कानून की रक्षक हो ही नहीं सकती. विद्यार्थियों को मत कुचलो. सरकार इतनी लापरवाह न हो.'

'देश में कानून का राज होना चाहिए'
आपातकाल के समय किए गए देशभर के छात्रों के आंदोलन को याद दिलाते हुए शिवसेना ने कहा है, 'वर्तमान नेताओं को एक बात ध्यान में रखनी चाहिए कि आपातकाल के कालखंड को आज भी काले पर्व के रूप में जाना जाता है. उस आपातकाल में ‘दबंगई’ के खिलाफ विद्यार्थी रास्ते पर उतरे थे. समय-समय पर विद्यार्थी वर्ग आजादी और लोकतंत्र के लिए रास्ते पर उतरा है. इसका राजनीतिक लाभ कई लोगों ने उठाया है. इसमें आज की बीजेपी भी शामिल है. देश में कानून का राज होना चाहिए. इसके लिए अगर कोई दमन चक्र शुरू करने की सोच रहा होगा तो ये देश के लिए घातक है.'

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First published: November 21, 2019, 9:24 AM IST
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