पेट्रोल-डीजल के दाम पर शिवसेना का निशाना- हनुमान जी की पूंछ की तरह बढ़ रही कीमत
Mumbai News in Hindi

पेट्रोल-डीजल के दाम पर शिवसेना का निशाना- हनुमान जी की पूंछ की तरह बढ़ रही कीमत
सामना के संपादकीय में कहा गया है कि पेट्रोल-डीजल दरवृद्धि पर केंद्र की चुप्पी ठीक नही.

शिवसेना के मुख्यपत्र सामना (Saamana) के संपादकीय (Editorial) में कहा गया है कि अनलॉक के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतें भगवान हनुमान की पूंछ की तरह बढ़ती जा रही हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 25, 2020, 11:07 AM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों (Petrol-Diesel Price Hike) को लेकर शिवसेना (ShivSena) के मुखपत्र सामना ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. सामना (Saamana) के संपादकीय में लिखा गया है कि पेट्रोल-डीजल दरवृद्धि पर केंद्र की चुप्पी ठीक नही, आखिर सरकार कुछ बोल क्यों नही रही? संपादकीय में कहा गया है कि लॉकडाउन के बाद कोरोना पीड़ितों का आंकड़ा और अनलॉक के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतें भगवान हनुमान की पूंछ की तरह बढ़ती जा रही हैं.

ईंधन कंपनियों की मनमानी!
संपादकीय में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा है- 'फिलहाल देश में दो चीजों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. एक है कोरोना पीड़ितों का और दूसरा है पेट्रोल-डीजल दरवृद्धि का. कोरोना पीड़ितों की संख्या देशभर में 4.5 लाख से ऊपर पहुंच गई और राजधानी दिल्ली में डीजल की दर ने अभूतवपूर्व छलांग लगाई. डीजल, पेट्रोल की तुलना में महंगा हो गया.'

फिर अखबार लिखता है- 'ईंधन दरवृद्धि का मीटर रुकने को तैयार नहीं है. कोरोना का आंकड़ा कम करने के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन पेट्रोल-डीजल की दरवृद्धि पर चुप्पी वाली तस्वीर दिख रही है. ईंधन दरवृद्धि से केंद्र की जेब भर रही होगी लेकिन आम आदमी की जेब खाली होती जा रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेलों की कीमत नही बढ़ी हैं, फिर भी डीजल-पेट्रोल के दामों को लॉक क्यों नही किया जा रहा.'
एक तरफ सरकार कुछ लाख करोड़ का पैकेज घोषित करती है तो दूसरी तरफ दूसरे हाथ से ईंधन दरवृद्धि से उसे निकाल भी लेती है. सरकार को अपनी आयवृद्धि के दूसरे उपाय ढूंढने चाहिए, बेलगाम ईंधन दरवृद्धि ही इसका रास्ता नही है.'



ये भी पढ़ें- कोविड-19: अब सबसे ज्यादा प्रभावित दिल्ली, जानिए क्या है सरकारी तैयारी

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार इजाफा
हिन्दुस्तान टाइम्स में छपी एक खबर के अनुसार, महामारी के दौरान घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम कीमतों के बीच का अंतर लगभग दो दशकों में सबसे अधिक रहा है. जिसका मुख्य कारण पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री पर करों में तेज वृद्धि है. यह एनालिसिस दिल्ली में पेट्रोल और डीजल की कीमतों और ब्रेंट क्रूड की कीमतों पर आधारित है. दिल्ली में 17 दिन में पेट्रोल के दाम 8.50 रुपये और डीज़ल की कीमतें 9.77 रुपये तक बढ़ गईं.

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर भारत में खुदरा कीमतों में दिखा है. रिपोर्टों के अनुसार, घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में चल रहीं बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत पर आधारित हैं. जून के महीने में खुदरा कीमतों में तेजी आई. 6 जून से 22 जून के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 8.30 रुपये / लीटर और 9.16 रुपये / लीटर की वृद्धि हुई है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading