मो. रफ़ी की 39वीं बरसी पर विशेष: हां, तुम मुझे यूं भुला न पाओगे, जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे...

रफ़ी साहब बड़े गायक के साथ बड़े दिलवाले और नेकदिल इंसान थे. यूं तो उनकी नेकनियती के बहुत किस्से हैं, जिनमें से कुछ किस्सों का जिक्र करना जरूरी है.

स्‍वतंत्र मिश्र | News18India
Updated: July 31, 2019, 7:37 AM IST
मो. रफ़ी की 39वीं बरसी पर विशेष: हां, तुम मुझे यूं भुला न पाओगे, जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे...
मोहम्मद रफ़ी 31 जुलाई 1980 को सिर्फ 56 साल की उम्र में चल बसे थे
स्‍वतंत्र मिश्र | News18India
Updated: July 31, 2019, 7:37 AM IST
मोहम्मद रफ़ी को गुजरे हुए आज करीब चार दशक बीत गए, पर गायिकी के इस सितारे की चमक जरा भी फीकी नहीं पड़ती हुई दिख रही है. चार दशक पहले यानि आज के ही दिन 31 जुलाई 1980 को वे सिर्फ 56 साल की उम्र में चल बसे. रफ़ी साहब बड़े गायक के साथ बड़े दिलवाले और नेकदिल इंसान थे. यूं तो उनकी नेकनियती के बहुत किस्से हैं, जिनमें से कुछ किस्सों का जिक्र करना जरूरी है. इन किस्सों से आप महान गायक रफ़ी साहब की महानता का अंदाजा लगा पाएंगे.

'रफ़ी साहब आप एक गाना सुना दीजिए, हम ए​डमिशन दे देंगे'

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रफ़ी साहब बड़े गायक के साथ बड़े दिलवाले और नेकदिल इंसान थे.


मुंबई शहर की बात है. रफ़ी साहब की मकबूलियत उनदिनों बुलंदी पर थी. उनके साथ काम करने वाले एक बहुत ही साधारण से आदमी ने अपने बच्चे के एडमिशन के लिए उनसे सिफारिश करने को कहा. रफ़ी ने पूछा- मेरे कहने से तुम्हारे बच्चे का एडमिशन हो जाएगा? उस आदमी ने कहा- हां, बिल्कुल हो जाएगा, बस आपको मेरे साथ स्कूल जाना पड़ेगा. रफ़ी बहुत सहजता से तैयार हो गए और बच्चे के एडमिशन के लिए स्कूल के लिए चल पड़े.

'हारमोनियम की व्यवस्था कर दीजिए, मैं गाना सुना दूंगा'

रफ़ी साहब जब स्कूल पहुंचे तो स्कूल के प्रिंसिपल ने कहा- आप एक गाना सुना दीजिये तो हम बच्चे का एडमिशन ले लेंगे. उन्होंने पूछा- हारमोनियम है? हारमोनियम लेकर वे बैठ गए और उन्होंने एक गाना पूरे स्कूल को सुनाया. बच्चे का एडमिशन हो गया.

जब रफ़ी ने एलपी से गाना गाने के लिए पैसे नहीं लिए
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Mohammad Rafi-मोहम्मद रफी
दुनिया के महान मुक्केबाज मोहम्मद अली और मोहम्मद रफी


भारतीय सिनेमा के मशहूर संगीकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल (एलपी) मोहम्मद रफ़ी के पास पहुंचे और उनसे गाना गाने की सिफारिश की. एलपी के नाम से मशहूर हुई इस जोड़ी ने रफ़ी साहब को गाने के लिए 500 रुपये दिए और कहा मेरे लिए आप गाएं. रफ़ी ने पूछा- ये तुम्हारा पहला गाना है न? एलपी ने हामी भर दी. रफ़ी साहब ने पॉकेट से 500 रुपये निकाले. दो एक-एक रुपये के सिक्के भी निकाले. दोनों के हाथ में 501-501 रुपये देते हुए कहा- तुम्हें बहुत बहुत शुभकामनाएं. तुम दोनो की जोड़ी हिट हो. मैं इस गाने के लिए कोई पैसे नहीं लूँगा।

अपने प्रशंसकों को सिग्नेचर देने में भी शर्माते थे रफ़ी साहब

रफ़ी साहब को एक बार पंजाब के पटियाला से किसी कॉलेज के लिए गाना गाने के लिए बुलावा आया. गायक महेंद्र कपूर उन दिनों मुम्बई में नए-नए आये थे और रफ़ी साहब की शागिर्दी में गायन की बारीकियाँ सीख रहे थे. रफ़ी साहब ने महेंद्र कपूर से भी अपने साथ पटियाला चलने को कहा. दोनों पटियाला पहुँचे. लड़कियों का कॉलेज था. वहाँ पहुंचने के बाद लड़कियों ने उनसे पेन और पेपर हाथ में थमाते हुए सिग्नेचर देने को कहा. रफ़ी साहब ने महेंद्र कपूर से पंजाबी में सादगी के साथ पूछा- ये क्या है? महेंद्र कपूर ने उनसे कहा- आप पॉपुलर हैं इसलिए आपका सिग्नेचर चाहती हैं. रफ़ी साहब ने कहा- महेंद्र तू सिग्नेचर दे दे.

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First published: July 31, 2019, 7:13 AM IST
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